माघ मेला की शुरुआत पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक है. इस दौरान 6 प्रमुख स्नान पर्व हैं. 2027 में माघ मेला 15 जनवरी से शुरू होकर 6 मार्च महाशिवरात्रि तक चलेंगे.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Magh Mela 2027: माघ मेला 2027 की तिथियों की घोषणा कर दी गई है. इसके अनुसार ही तैयारी शुरू कराई जा रही है. पहली बार झूंसी और अरैल के बीच गंगा पर पांटून पुल बनाया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिलेगी. उत्तर प्रदेश प्रयागराज में 15 जनवरी 2027 से माघ मेला प्रारंभ होने जा रहा है. यह मेला संगम तट पर लगेगा, जिसमें संत-साधक एक साथ मां गंगा-यमुना और सरस्वती की आराधना करते नजर आएंगे. प्रयागराज का यह माघ मेला दुनियाभर में प्रसिद्ध है. खासकर हिंदू धर्म को मानने वाले श्रद्धालु-भक्त बड़ी श्रद्धा-भाव से मेले में सम्मिलित होते हैं. मान्यता है कि भारतीय सनातन परंपरा का सबसे प्रचीन और पवित्र परपंराओं में से माघ मेला एक है, जिसका आयोजन हर साल संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) में होता है.
माघ मेला 2027 की पवित्र स्नान तिथियां
मकर संक्रांति: 15 जनवरी 2027
पौष पूर्णिमा: 22 जनवरी 2027
मौनी अमावस्या: 6 फरवरी 2027
बसंत पंचमी: 11 फरवरी 2027
माघी पूर्णिमा: 20 फरवरी 2027
महाशिवरात्रि: 6 मार्च 2027
प्रत्येक स्नान दिवस का महत्व
माघ मेले के प्रत्येक स्नान दिवस का अपना आध्यात्मिक महत्व और अर्थ है. माघ मेला भारत के सबसे पवित्र आध्यात्मिक आयोजनों में से एक है. हर साल लाखों श्रद्धालु प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर आते हैं, जहाँ तीन पवित्र नदियाँ – गंगा, यमुना और सरस्वती (रहस्यमयी) मिलती हैं. ऐसा माना जाता है कि माघ मेले के दौरान स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मन को शांति मिलती है. प्रत्येक स्नान विशेष ग्रहों की स्थिति और प्राचीन परंपराओं से जुड़ा हुआ है. भक्तों का मानना है कि इन दिनों स्नान करने से शांति, आशीर्वाद और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.
पौष पूर्णिमा- यह माघ मेले की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक है. इस दिन, कई श्रद्धालु अपना कल्पवास शुरू करते हैं, जो ध्यान, प्रार्थना और सादा जीवन जीने के लिए संगम में एक महीने का प्रवास होता है.
मकर संक्रांति- इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है. मकर संक्रांति पर स्नान करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं और सौभाग्य प्राप्त होता है.
मौनी अमावस्या – यह पूरे माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे भीड़भाड़ वाला स्नान दिवस है. श्रद्धालु मौन धारण करते हुए पवित्र स्नान करते हैं, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है.
बसंत पंचमी – यह दिन वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है. लोग देवी सरस्वती की पूजा करते हैं और पवित्रता के साथ नए मौसम का स्वागत करने के लिए संगम में स्नान करते हैं.
माघी पूर्णिमा- यह दिन दान, ध्यान और संगम में स्नान करने के लिए अत्यंत पवित्र है. कई कल्पवासी इस दिन अपने अनुष्ठान पूरे करते हैं.
महा शिवरात्रि – यह माघ मेले का अंतिम प्रमुख स्नान दिवस है. भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं और आशीर्वाद के साथ अपनी आध्यात्मिक यात्रा का समापन करने के लिए स्नान करते हैं.
स्नान पर्व के लिए विशेष महत्व रखता है मेला
माघ मेला मुख्य रूप से स्नान पर्व के लिए जाना जाता है. इस दौरान गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु-भक्त पहुंचते हैं.
श्रद्धालुओं के साथ ही माघ मेले पर स्नान के लिए साधु-संत और कल्पवासी भी संगम तट पर स्नान, ध्यान और तपस्या के लिए रावटी (कुटिया) बनाकर रहते हैं. धार्मिक मान्यानुसार माघ मेला में शामिल होने और स्नान करने से व्यक्ति जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है. इस दौरान कई भक्त कल्पवास भी करते हैं.
कब से प्रारंभ है माघ मेला 2027
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मेला की शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन से हो जाएगी और महाशिवरात्रि तक चलेगी. तिथिनुसार माघ मेला 15 जनवरी 2027 से शुरू हो रहा है और 6 मार्च 2027 तक चलेगा. इस दौरान 6 प्रमुख माघ स्नान हैं, जिसमें मौनी अमावस्या के स्नान को सबसे प्रमुख स्नान माना जा रहा है.
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