रुद्राक्ष और भद्राक्ष दोनों का सनातन धर्म में विशेष महत्व है. दोनों ही बीज अपने उपचार गुणों के लिए जाने जाते हैं. रुद्राक्ष और भद्राक्ष दोनों की विशेषता जानकर आपके होश उड़ जाएंगे.
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By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By : सुप्रिया
Rudraksha: हिंदू धर्म में रुद्राक्ष और भद्राक्ष दोनों का काफी महत्व है. मान्यताओं के मुताबिक रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न हुई है, जबकि भद्राक्ष को मां भद्रकाली से जोड़कर देखा जाता है.
रुद्राक्ष और भद्राक्ष दोनों का सनातन धर्म में विशेष महत्व है. दोनों ही बीज अपने उपचार गुणों के लिए जाने जाते हैं. दोनों का इस्तेमाल माला और कंगन बनाने के लिए भी उपयोग किया जाता है.
आइए जानते हैं रुद्राक्ष और भद्राक्ष की उपयोगिता
- रुद्राक्ष 21 प्रकार के होते हैं, जिनमें 11 प्रकार के रुद्राक्ष का काफी ज्यादा किया जाता है, जबकि भद्राक्ष एक ही तरह के होते हैं.
- रुद्राक्ष का प्रयोग बुरी शक्तियों से दूर रहने के लिए किया जाता है, जबकि भद्राक्ष का प्रयोग आमतौर पर आभूषणों के निर्माण के लिए किया जाता है.
- रुद्राक्ष को अगर पानी में डाला जाए तो ये पूरी तरह डूब जाता है, जबकि भद्राक्ष पानी में डूबने की बजाए तैरता है.
- रुद्राक्ष ईश्वरीय गुणों से समाहित होता है और ये सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है जिसमें भीनी-सी सुगंध भी होती है. जबकि भद्राक्ष किसी भी तरह की पूजा-अनुष्ठान में काम में नहीं लाया जाता है. भद्राक्ष को मृत्यु का प्रतीक माना जाता है.
रुद्राक्ष और भद्राक्ष में क्या है अंतर
- यूं तो भद्राक्ष को भी रुद्राक्ष का ही एक अन्य रूप माना जाता है, लेकिन यह निम्न कोटि का होता है.
- भद्राक्ष की गुणवत्ता रुद्राक्ष के कमतर होती है. भद्राक्ष में रुद्राक्ष की तरह चमक नहीं होती है. यह हल्का मलिन होती है.
- भद्राक्ष अंडाकार होता है. वहीं रुद्राक्ष गोलाकार होता है.
- भद्राक्ष में छेद नहीं होता है. जबकि रुद्राक्ष में बेलनाकार छेद होता है.
- भद्राक्ष भारत में पाया जाता है जबकि रुद्राक्ष भारत और नेपाल दोनों जगह पाया जाता है.
- भद्राक्ष वजन में रुद्राक्ष की तुलना में हल्का होता है.
- रुद्राक्ष शार्प और उभरा हुआ होता है. वहीं भद्राक्ष पतला और कम उभरा होता है.
- रुद्राक्ष का इस्तेमाल जाप और आभूषण दोनों के लिए किया जाता है. जबकि भद्राक्ष सिर्फ आभूषण में इस्तेमाल किया जाता है.
- रुद्राक्ष को पानी में डालते ही वह डूब जाता है. जबकि भद्राक्ष को पानी में डालने पर वह धीरे-धीरे डूबता है.
कैसे पता करें कि कोई मनका रुद्राक्ष है या भद्राक्ष?
रुद्राक्ष अनुसंधान एवं परीक्षण प्रयोगशाला (आरआरटीएल) का उपयोग करके यह पता लगा सकते हैं कि आपका रुद्राक्ष रुद्राक्ष है, भद्राक्ष है या असली रुद्राक्ष है. इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि मनके शुद्ध और प्रामाणिक हैं. इतना ही नहीं उनमें आंतरिक शक्ति और प्रभावशीलता का भी पता लग जाता है.
भद्राक्ष क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्राक्ष एक तरह का मोती होता है. जो कि भार में रुद्राक्ष की अपेक्षा हल्का और साइज में थोड़ा भिन्न होता है. यह रुद्राक्ष के निम्न कोटि का माना जाता है. भद्राक्ष देखने में अंडाकार होता है. रुद्राक्ष की तरह भद्राक्ष भारत में भी पाया जाता है.
भद्राक्ष किस वृक्ष से उत्पन्न होता है?
भद्राक्ष कोएनिगी, गुडनीएसी, स्केवोला फ्रूटसेंस, लैंसीफोलियस और सिक्किमेंसिस नामक वृक्षों से प्राप्त होता है. इन किस्मों के बीज चपटे, हल्के और कम कांटेदार होते हैं. ये अधिकतर दो मुखी होते हैं और इनमें कोई प्राकृतिक छेद नहीं होता. कुछ लोग इनका उपयोग जप करने के लिए करते हैं और इनका उल्लेख कुछ धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है. इनका उपयोग अधिकतर धार्मिक भेंट के रूप में या विशिष्ट उद्देश्यों के लिए माला के रूप में किया जाता है.
भद्राक्ष के क्या नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं?
भद्राक्ष का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होता क्योंकि यह केवल एक फल का बीज है, लेकिन इससे आपको नेपाल में पाए जाने वाले भद्राक्ष जैसे प्रभाव नहीं मिलेंगे.
एक मुखी रुद्राक्ष क्या भद्राक्ष है?
बताया जाता है कि नेपाल का गोल एक मुखी रुद्राक्ष एक मिथक है. पुराणों में इनका उल्लेख तो है, लेकिन ये वास्तव में मौजूद नहीं हैं. रुद्रलाइफ के शोध और अनुभव के अनुसार, बाज़ार में बिकने वाले नेपाल के एक मुखी रुद्राक्ष नकली हैं. लोगों को इन्हें खरीदने से बचना चाहिए क्योंकि ये महंगे होते हैं और इन्हें इस तरह बनाया जाता है कि देखने वाले को धोखा दिया जा सके.
दक्षिण भारत से प्राप्त अर्धचंद्राकार या काजू के आकार के ये मोती (एलायोकार्पस ट्यूबरकुलैटस) नेपाल के एक मुखी काजू के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं. ये भद्राक्ष की श्रेणी में आते हैं और इनका अच्छा विकल्प हैं.

