सकट चौथ व्रत गणपति जी को समर्पित है. इस दिन पति, संतान की लंबी आयु और उनकी खुशहाली के लिए व्रत किया जाता है.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Sakat Chauth 2027: सकट चौथ का व्रत माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर किया जाता है. इस दिन माताएं संतान की खुशहाली, उनके सुरक्षित भविष्य के लिए और लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. ये व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक किया जाता है. गणपति और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करते हैं.
जबलपुर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा के मुताबिक प्रथम पूजनीय भगवान गणेश की पूजा से सभी कष्ट, दुख और पापों का क्षय हो जाता है. चूंकि ये बड़ी चौथ है इसलिए सकट चौथ पर गणेश जी के पूजन और व्रत में कुछ बातों का आवश्यक रूप से ध्यान रखना चाहिए तभी व्रत पूर्ण माना जाता है.
सकट चौथ व्रत जनवरी में कब ?
सकट चौथ का व्रत 25 जनवरी 2027, सोमवार को किया जाएगा. इस दिन सोमवार भी है, जो भगवान शंकर का दिन है. गणपति जी शंकर भगवान के पुत्र हैं, इनकी आराधना से धन लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं. 25 जनवरी 2027 को सुबह 08:10 बजे से 26 जनवरी 2027 को सुबह 06:00 बजे तक चतुर्थी है. इस व्रत की पूर्णता रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही होती है. 25 जनवरी 2027 को देश के मुख्य क्षेत्रों में अनुमानित चंद्रोदय का समय मध्य प्रदेश भोपाल और जबलपुर में रात 09:12 PM से 09:18 PM के बीच रहेगा.
पूजा के शुभ मुहूर्त
अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त (सुबह): सुबह 07:12 बजे से सुबह 08:33 बजे तक
शुभ उत्तम मुहूर्त (सुबह): सुबह 09:53 बजे से दोपहर 11:14 बजे तक
शाम की पूजा का समय: शाम को 05:54 PM से रात 09:16 PM तक
सकट चौथ व्रत में पानी पी सकते हैं क्या ?
सकट चौथ व्रत दो तरीके से किया जाता है एक निर्जल और दूसरा फलाहार. ऐसे में जो लोग सकट चौथ का व्रत निर्जला रखते हैं उन्हें पूरे दिन पानी भी नहीं पीना चाहिए. चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही जल ग्रहण करें. सकट चौथ का व्रत फलाहार व्रत करने वाले एक समय फल खा सकते हैं.
सकट चौथ व्रत करने से क्या लाभ होता है
सकट चौथ का व्रत रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है और संतान प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है. इस व्रत को रखने से माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं. इसे तिलकुटा चौथ, वक्र-तुण्डि चतुर्थी और माघी चौथ भी कहा जाता है.
सकट चौथ का धार्मिक महत्व और मान्यताएं
सकट चाैथ के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान पर आने वाले सभी संकट (सकट) दूर हो जाते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान गणेश ने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा कर अपनी तीव्र बुद्धि से सबसे बड़ा संकट टाला था.
सकट चौथ की मुख्य परंपराएं और रस्में
इस व्रत में तिल और गुड़ से बने ‘तिलकुटा’ का विशेष महत्व है. भगवान गणेश को तिलकुटा का भोग लगाया जाता है. यह व्रत रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा माना जाता है. चंद्र देव को जल, दूध और रोली मिलाकर अर्घ्य दिया जाता है. माताएं दिनभर निर्जला (बिना पानी के) व्रत रखती हैं और रात को पूजा व चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करती हैं.
अर्घ्य देने की विधि
तांबे या मिट्टी के लोटे में शुद्ध जल लें. उसमें कच्चा दूध, रोली, अक्षत (साबुत चावल), तिल और दुर्वा जरूर मिलाएं. चंद्रमा की ओर मुख करके धीरे-धीरे जल अर्पित करें. इस दौरान “ॐ सोमाय नमः” या “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें. अर्घ्य देने के बाद अपने ही स्थान पर खड़े होकर तीन बार परिक्रमा करें.
पारण का नियम
अर्घ्य देने के बाद भगवान गणेश को अर्पित किया गया तिलकुटा (तिल और गुड़ का प्रसाद) खाकर ही व्रत खोला जाता है. पारण के समय सात्विक भोजन ही ग्रहण किया जाता है, जिसमें लहसुन-प्याज का उपयोग वर्जित होता है.
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