कुंडली के नौ ग्रह हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं पर शुभ और अशुभ प्रभाव डालते हैं. जाने किस वजह से कमजोर होते हैं ग्रह.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Navagraha For Mantras : हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में 9 ग्रहों का काफी महत्व है. ज्योतिष शास्त्र में कुंडली मिलान से लेकर जीवन में आने वाली अनेक परेशानियों की जानकारी इन्हीं नौ ग्रहों को देखकर समाधान ढूढ़ने का प्रयास किया जाता है. क्योंकि कुंडली के नौ ग्रह हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं पर शुभ और अशुभ प्रभाव डालते हैं. यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह कमजोर है तो नीचे दिए गए मंत्रों का उच्चारण करने से समाधान मिलना प्रारंभ हो जाता है.
किन ग्रहों को मजबूत करने के लिए करें मंत्र जप
- जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर है तो उन्हें, “ॐ आदित्याय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए.
- जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, उन्हें “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए.
- जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह प्रभावित है, उन्हें मंगल “ॐ अं अंगारकाय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए.
- कुंडली में बुध की स्थिति कमजोर है तो “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए.
- कुंडली में बृहस्पति की स्थिति को सही करने के लिए “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का उच्चारण करना सही माना जाता है. इस मंत्र का रोजाना जाप करने से इसके फायदे बहुत जल्द नजर आने लगेंगे.
- कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति को ठीक करने के लिए “ॐ शुं शुक्राय नमः” मंत्र का जाप करें. इस मंत्र के जाप करने से व्यक्ति की आयु लंबी होती है.
- कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति मजबूत या शनि दोष से छुटकारा पाने के लिए “शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का उच्चारण करें.
- राहु की स्थिति सही करने के लिए “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए.
- कुंडली में केतु की स्थिति ठीक करने के लिए “ॐ कें केतवे नमः” मंत्र का उच्चारण करना सही माना जाता है.
जीवन में किस प्रकार का बदलाव लाते हैं ग्रह?
सूर्य- ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है. सूर्य की कृपा से ही व्यक्ति को जीवन में मान सम्मान, नौकरी और समृद्धि मिलती है.
चंद्रमा- चंद्रमा को मन, भावनाओं और सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है. कुंडली में इसकी स्थिति कमजोर होने पर कलह, मानसिक विकार दुर्बलता, धन की कमी जैसी समस्याएं सामने पैदा होती हैं.
मंगल- मंगल को साहस और पराक्रम का कारक ग्रह माना जाता है. जन्म कुंडली में मंगल के कमजोर होने पर जातक के साहस और ऊर्जा में निरंतर कमी रहती है.
बुध- वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को सबसे प्रबल ग्रह माना जाता है. कुंडली में बुध मजबूत हो तो जीवन में तरक्की और प्रसिद्धि प्राप्त होती है.
बृहस्पति- कुंडली में बृहस्पति के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को धन लाभ, सुख-सुविधा, सौभाग्य और लंबी आयु प्राप्त होती है. बृहस्पति कमजोर हो तो वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
शुक्र -वैदिक ज्योतिष में शुक्र को भौतिक सुख-सुविधाओं और प्रेम का कारक माना जाता है। कुण्डली में शुक्र मजबूत होने पर जातक को सभी तरह की सुविधा मिलती है.
शनि- ज्योतिष में शनिदेव को कर्मफलदाता और न्याय का देवता कहा जाता है. अगर कुंडली में शनि कमजोर होता है तो जातक को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
राहु – ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह माना जाता है। यह जीवन में अचानक होने वाली घटनाओं का कारक होता है. कुंडली में राहु की अशुभ स्थिति होने पर जातक को सफलता आसानी से नहीं मिलती.
केतु- कुंडली में केतु की कमजोर स्थिति होने पर जातक को जीवन भर परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जीवन में कलह बनी रहती है. वैदिक ज्योतिष में केतु को वैराग्य और अचानक लाभ-हानि का कारण माना गया है.
अत्यंत प्रभावशाली शक्ति बीज मंत्र
हिंदू धर्म और मंत्र विज्ञान में ‘ॐ’ को सभी बीज मंत्रों का मूल, आधार और सबसे शक्तिशाली सार्वभौमिक बीज माना जाता है, वहीं विशिष्ट ऊर्जा व शक्तियों के लिए ‘ऐं’, ‘ह्रीं’, और ‘क्लीं’ को अत्यंत प्रभावशाली शक्ति बीज मंत्र कहा गया है.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

