अरुणिता कांजीलाल और ऋचा शर्मा की जादुई आवाज ने बांधा समां. ढ़ोल-ताशा से गूंज उठीं भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियां.
Source : DB News Update
Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Narmada Mahotsav Jabalpur News: मध्य प्रदेश जबलपुर में प्रसिद्ध स्थल भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियों और प्रकृति के अनुपम सौंदर्य के बीच 23वां नर्मदा महोत्सव का आयोजन किया गया. दो दिवसीय इस आयोजन पर कला, संस्कृति सुर और संगीत का अद्भुत संगम देखने मिला. संगमरमरी सौंदर्य के लिए दुनियाभर में मशहूर भेड़ाघाट में नर्मदा महोत्सव के समापन पर शास्त्रीय नृत्य, भजन गायन एवं पारंपरिक वाद्य यंत्र ढ़ोल-ताशा का श्रोताओं और कला रसिकों ने जमकर आनंद उठाया. शरद पूर्णिमा के चंद्रमा की दूधिया रोशनी से नहाई भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियों का सौंदर्य भी आज प्रकृति-प्रेमियों के लिए अद्भुत नजारा पेश कर कर रहा था.
मुंबई की अरुणिता और सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा के भजनों से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
नर्मदा महोत्सव के दूसरे दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मुख्य आकर्षण इंडियन आयडल फेम मुंबई की सुश्री अरुणिता कांजीलाल और सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा द्वारा भजनों का गायन था. परम्परागत रूप से नर्मदा पूजन के बाद शुरू हुए दूसरे दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज त्रिभंग कला अकादमी, जबलपुर की सुश्री कौतुकी उपाध्याय द्वारा कत्थक शैली में शिव स्तुति की प्रस्तुति से हुआ. इसके तुरंत बाद महाराष्ट्र की शिवमुद्रा संस्था के कलाकारों की ढ़ोल-ताशा की जोशीली और मनमोहक प्रस्तुति ने श्रोताओं में उत्साह का संचार कर दिया. ढ़ोल और ताशा महाराष्ट्र के प्रसिद्ध वाद्ययंत्र हैं जो मुख्य रूप से दशहरा, नवरात्रि, गुड़ीपड़वा और अन्य बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में बजाये जाते हैं.
नर्मदा महोत्सव सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक – राकेश सिंह
लोक निर्माण राकेश सिंह ने नर्मदा महोत्सव को सांसांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बताया है. लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह ने दो दिनों के नर्मदा महोत्सव के समापन दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या से वर्चुअली जुड़कर सभी को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं. उन्होंने आगे कहा कि 23 वर्षों से निरंतर आयोजित किये जा रहे इस महोत्सव को और अधिक भव्य एवं यादगार बनाने के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जायेंगे, ताकि नर्मदा तट की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता देश-दुनिया तक पहुंचे.
मां नर्मदा की महिमा और सनातन परंपराओं का सम्मान जरूरी – राज्यसभा सांसद
राज्यसभा सांसद श्रीमती सुमित्रा वाल्मीकि ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शरद पूर्णिमा की रात मां नर्मदा की लहरों को निहारना और उनकी अनुपम छटा का आनंद लेना आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है. मां नर्मदा के प्रति श्रद्धा और आस्था हमारी सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. उन्होंने भेड़ाघाट की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए चौसठ योगिनी मंदिर और पुराने संसद भवन से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए. उन्होंने बताया कि राज्यसभा में पहली बार जाने पर पुराने संसद भवन के स्थापत्य के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई. अध्ययन के दौरान उन्हें चौसठ योगिनी मंदिर और पुराने संसद भवन के स्तंभों की संरचना के बीच समानता के बारे में जानकारी मिली.
इंडियन आइडल की उपविजेता कांजीलाल रहीं आकर्षण का केन्द्र
नर्मदा महोत्सव के दूसरे और समापन दिवस की सांस्कृतिक संध्या का प्रमुख आकर्षण मुंबई की सुश्री अरुणिता कांजीलाल के गायन का श्रोताओं को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा. इंडियन आइडल सीजन- 12 ( 2020-21) की प्रथम उपविजेता अरुणिता ने अपनी गायकी की शुरुआत श्री महिषासुर मर्दिनी स्त्रोतम ‘आई गिरी नंदिनी’ से की. उन्होंने अपनी कर्ण प्रिय आवाज में “राम सियाराम, सियाराम जय जय राम ” भजन प्रस्तुत किया. इसके बाद अरुणिता ने फिल्मी और गैर फिल्मी गीत गाये. इनमें “नैना मोरे तरस गये, आजा बलम परदेशीया” और ” हीरे मोती मैं न चाहूं, मैं तो चाहूं संगम तेरा” ने श्रोताओं का मन मोह लिया. अरुणिता द्वारा शास्त्रीय शैली में गाई ठुमरी “जा-जा रे अपने मंदिरवा, सुन पावे सास ननदिया” और “रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे, मोहे मारे नजरिया सांवरिया रे” की प्रस्तुति भी दी. उन्होंने नर्मदा मैया को समर्पित” मां रेवा थारो पानी निर्मल, खल-खल बहतो जायो रे” भगवान शिव समर्पित लोकप्रिय भजन “कौन हे वो, कौन है वो कहाँ से है आया” माहौल को भक्ति मय बना दिया. अरुणिता ने अपनी सुरीली आवाज में “हेरी सखी मंगल गावो री, धरती अंबर सजावो री, आज मेरे पिया घर आवेंगे” और “एक राधा-एक मीरा, दोनों ने श्याम को चाहा” गाकर श्रोताओं की खूब वाह वही लूटी. अरुणिता ने अपनी अंतिम प्रस्तुति में “सत्यम शिवम सुंदरम” प्रस्तुत कर भक्ति की जो सरिता बहाई, श्रोता उसमें डूबते चले गये.
नर्मदा महोत्सव के दूसरे और समापन दिवस की सांस्कृतिक संध्या की आखिरी प्रस्तुति मुंबई की सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा ने दी. पार्श्व गायिका ऋचा ने अपनी गायकी की शुरूआत ‘’सोनिया वे रांझणा वे’’ से की, जिसे सुनने के बाद दर्शकों में एक उल्लास का माहौल देखने को मिला. इसके बाद गायिका ऋचा शर्मा ने ‘’ जिंदगी में कभी कोई आये न रब्बा’’ , माही वे….. के साथ अन्य गीतों की भी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया.
ज्ञात हो कि जी सिने अवार्ड और कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित ऋचा शर्मा ने फिल्म ‘ताल’ सहित कई फिल्मी गीतों को अपनी आवाज दी है। उन्होंने फिल्म ‘बाबुल’ में बॉलीवुड के इतिहास का सबसे लम्बा विदाई गीत भी गाया है।.
नर्मदा महोत्सव के दूसरे दिन शरद पूर्णिमा पर रंगबिरंगी आतिशबाजी भी दर्शकों के बीच आकर्षण का केन्द्र रही. आज महोत्सव के पहले दिन की अपेक्षा कहीं ज्यादा कला रसिकों ने भजनों और लोक नृत्यों का लुत्फ उठाने भेड़ाघाट पहुंचे थे.
इनकी रही उपस्थिति
नर्मदा महोत्सव के दूसरे और समापन दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मुख्य अतिथि राज्य सभा सांसद श्रीमती सुमित्रा बाल्मीक थी. क्षेत्रीय विधायक नीरज सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में नगर निगम जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष संदीप जैन, नगर निगम जबलपुर के अध्यक्ष रिकुंज विज, जबलपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रशांत केशरवानी, नगर परिषद भेड़ाघाट के अध्यक्ष चतुर सिंह, नगर परिषद के उपाध्यक्ष जगदीश दाहिया, भाजपा के जिला अध्यक्ष (ग्रामीण) राजकुमार पटेल एवं भाजपा के जबलपुर महानगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, महामंत्री पंकज दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे.
