सीबीआई की चार्जशीट में नीट-यूजी पेपर लीक के मामले में बड़ा खुलासा. सीबीआई के मुताबिक, पेपर किसी प्रिंटिंग प्रेस से नहीं, बल्कि एनटीए के लिए काम कर रहे विषय विशेषज्ञों ने बाहर पहुंचाया.
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Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
NEET UG 2026 Paper Leak: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट से NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. सीबीआई ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. एजेंसी का दावा है कि यह कोई साधारण पेपर लीक नहीं था बल्कि कई राज्यों में फैला एक सुनियोजित नेटवर्क था जिसमें परीक्षा से जुड़े लोग, कोचिंग संचालक, बिचौलिए और दलाल शामिल थे. जांच एजेंसी का दावा है कि नीट पेपर किसी प्रिंटिंग प्रेस से लीक नहीं हुआ है, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के लिए काम कर रहे विषय विशेषज्ञों के द्वारा अपने अधिकृत एक्सेस का दुरुपयोग करके पेपर बाहर पहुंचाए गए थे. CBI ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है हालांकि चार्जशीट में कुछ तकनीकी कमियां होने के कारण अदालत ने अभी तक उस पर संज्ञान नहीं लिया है. इस मामले में दाखिल चार्जशीट पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट 10 अगस्त को सुनवाई करेगी.
प्रूफरीडिंग के दौरान ही लीक हो गया था प्रश्नपत्र
सीबीआई की जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि नीट के प्रश्नपत्र का जब गोपनीय अनुवाद, बैक-ट्रांसलेशन और प्रूफरीडिंग की जा रही थी. उसी दौरान विषय विशेषज्ञों ने पेपर की गोपनीयता भंग कर दी थी और अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया था. जांच में यह भी सामने आया है कि बॉटनी-ज़ूलॉजी की विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री के विशेषज्ञ प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (पीवी कुलकर्णी) और फिजिक्स की विशेषज्ञ मनीषा संजय हवालदार ने प्रश्नपत्र की जानकारी बाहर पहुंचाई.
मौखिक रूप से बताए गए सवाल
सीबीआई की जांच के मुताबिक, अप्रैल 2026 के दौरान पीवी कुलकर्णी और मनीषा मंधारे ने पुणे स्थित अपने घरों पर गुप्त स्पेशल रिवीजन सेशन आयोजित किए. इनमें उम्मीदवारों को प्रश्न, उनके चार विकल्प और सही उत्तर मौखिक रूप से बताए. उम्मीदवारों ने इन्हें अपनी नोटबुक में हाथ से लिखा, ताकि इसका कोई डिजिटल रिकॉर्ड न बन सके.
ऑन लाइन पैसे किए गए ट्रांसफर
सीबीआई जांच में सामने आया कि फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा हवालदार ने प्रश्न पुणे स्थित एपीएमए के फिजिक्स लेक्चरर तेजस हर्षदकुमार शाह को बताए. इसके बाद शाह ने हस्तलिखित नोट्स की तस्वीरें खींचीं और उन्हें लातूर स्थित रेणुकाई करियर सेंटर के निदेशक प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर को भेज दिया. सीबीआई ने यह भी दावा किया है कि शाह ने मनीषा हवालदार के पति के मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन पैसे भी ट्रांसफर किए.
अस्पताल में उम्मीदवारों को कराया गया प्रश्न बैंक याद
सीबीआई के अनुसार, पीवी कुलकर्णी और मनीषा मंधारे ने लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे के साथ मिलकर उम्मीदवारों को सिद्धिविनायक अस्पताल बुलाया. वहां परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को पूरा प्रश्न बैंक याद कराया गया, ताकि वे परीक्षा में वही सवाल हल कर सकें. जांच में पता चला कि नासिक के शुभम खैरनार ने गुरुग्राम के यश यादव से संपर्क किया. लीक हुए प्रश्नों को पीडीएफ में बदलकर टेलीग्राम के माध्यम से यश यादव को भेजा गया. इसके बाद यश यादव ने यह पीडीएफ जयपुर के मांगीलाल बिवाल उर्फ मांगीलाल खटीक को 10 से 12 लाख रुपये में उपलब्ध कराई.
कोचिंग और ट्यूटर्स तक पहुंचाया गया प्रश्नपत्र
सीबीआई के मुताबिक, मांगीलाल ने प्रश्नपत्र की प्रिंट कॉपी निकालकर अपने परिवार के सदस्यों, स्थानीय कोचिंग संस्थानों के छात्रों और निजी ट्यूटर्स में बांट दी. इस तरह लीक हुआ प्रश्नपत्र कई उम्मीदवारों तक परीक्षा से पहले पहुंच गया. सीबीआई ने बताया कि केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और सरकारी दस्तावेज परीक्षक की हैंडराइटिंग जांच में महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं.
छापेमारी के दौरान बरामद उम्मीदवारों की नोटबुक का मिलान तीन मई को आयोजित वास्तविक नीट-यूजी प्रश्नपत्र से किया गया. जांच में दोनों में मौजूद प्रश्न और उत्तर पूरी तरह समान पाए गए.
5 लाख नकदी बरामद
जांच एजेंसी को ऑनलाइन भुगतान से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड भी मिले हैं. इनमें मनीषा हवालदार के परिवार के बैंक खाते में हुए लेनदेन शामिल हैं. इसके अलावा डॉ. मनोज शिरुरे के परिवार के एक सदस्य से पांच लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं. सीबीआई ने इसे जांच का अहम सबूत बताया है.
WhatsApp, Telegram और PDF के जरिए भेजे गए प्रश्नपत्र
CBI की जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि, लीक हुए नीट के प्रश्नपत्र **WhatsApp, Telegram, PDF फाइल और फोटो** के जरिए साझा किए गए. जांच एजेंसी ने जब्त किए गए मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कराई जिसमें कई अहम डिजिटल सबूत मिले हैं. इनमें चैट, दस्तावेज और लीक हुए प्रश्नों से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं.
AP Broker नाम से सेव मोबाइल नंबर की पहचान
सीबीआई ने मीडिया को बताया कि आरोपी यश यादव के मोबाइल फोन से लीक हुए NEET प्रश्नों की PDF फाइल और Telegram चैट बरामद हुई है. फोन में AP Broker नाम से सेव मोबाइल नंबर की पहचान सह-आरोपी शुभम मधुकर खैरनार के रूप में हुई है. इसके अलावा जांच के दौरान मोबाइल में NEET 2026 नाम का एक WhatsApp ग्रुप भी मिला जिसे एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है.
उम्मीदवारों के डिजिटल सुबूत मिले
CBI के मुताबिक, डिजिटल सुबूत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को जोड़ने के बाद पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने आई. जांच में पता चला कि लीक हुए प्रश्न पहले NTA के विषय विशेषज्ञों से निजी ऑपरेटरों और बिचौलियों तक पहुंचे. इसके बाद इन्हें अलग-अलग माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया.
25 लाख रुपये में खरीदे गए लीक हुए प्रश्नपत्र
चार्जशीट में दावा किया गया है कि आरोपी शुभम खैरनार ने धनंजय लोखंडे से 25 लाख रुपये देकर लीक हुए प्रश्नपत्र हासिल किए. CBI के अनुसार धनंजय लोखंडे को ये प्रश्न मनीषा संजय वाघमारे से मिले थे. जांच एजेंसी का कहना है कि मनीषा वाघमारे का संपर्क NTA के केमिस्ट्री विषय विशेषज्ञ प्रह्लाद कुलकर्णी से था. कुलकर्णी ने कथित तौर पर केमिस्ट्री प्रश्नपत्र के मराठी से अंग्रेजी बैक ट्रांसलेशन पर काम किया था.
भ्रष्टाचार के तहत दर्ज हुआ मामला
CBI ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत कार्रवाई की है. इन धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ जांच आगे बढ़ाई जा रही है.

