गीता के उपदेश से मिलेगा पर्सनलाइज्ड समाधान, जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स ने 90 हजार रुपए में तैयार किया ऐप, जल्द प्ले स्टोर से कर सकेंगे डाउनलोड.
Source : DB News Update
Written By : सुप्रिया | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Engineering Technology Applications Jabalpur News: सोशल मीडिया, एआई और इंटरनेट के इर्दगिर्द “जेन जी” (Gen-Z) घूम रहा है. जिसमें धैर्य बिल्कुल नहीं है और वह त्वरित तेज रफ्तार से जानकारी हासिल करने में जुटा हुआ है. इसके लिए रील्स, शॉर्ट्स देखकर समाधान खोज रहा है. अमूनन ऐसे युवा छात्र तनाव और कुंठाग्रस्त हो जाते हैं. इन स्टूडेंट्स के बढ़ते तनाव और मानसिक दबाव को जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने महसूस किया और इस पर काफी मंथन किया और समाधान तलाशने में जुट गए. चूंकि इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्रों वैदिक धर्मग्रंथों की ओर अमूनन ध्यान नहीं दिया जाता है. लेकिन जबलपुर इंजीनियर कॉलेज के छात्र हिंदू धर्म ग्रंथों में ही समस्या का समाधान तलाशना प्रारंभ कर दिया और अंतत: सनातन धर्म के श्रीमद् भगवत गीता एक ऐसा धर्म सूत्र है, जिसमें कुंठा से निकलने के सारे सूत्र मिल जाते हैं. इसी के चलते जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने भगवत गीता को आधार माना और ‘अंतर्गीता’ नामक ऐप तैयार कर दिया. यह ऐप भगवद्गीता के उपदेश से यूजर के जीवन की समस्याओं को समझने और उनके समाधान की दिशा तलाशने में मदद करेगा. ऐप रोजाना गीता की सीख के माध्यम से जीवन में सही मार्ग चुनने के लिए मार्गदर्शन भी देगा. खास बात यह है कि ऐप यूजर की डायरी, रोजाना की गतिविधियों और व्यवहार का विश्लेषण कर पर्सनलाइज्ड फीडबैक भी देगा. करीब 90 हजार रुपए की लागत से तैयार इस ऐप को जल्द ही प्ले स्टोर पर उपलब्ध कराने की तैयारी है.
जरूरत के समय सलाह भी देगा ऐप
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर सौरभ सिंह ने बताया कि ऐप बनाने की शुरुआत खुद को समझने की कोशिश से हुई. वे लंबे समय से किताबें पढ़ने और खुद को समझने का प्रयास करते थे. उनके मन में विचार आया कि अगर कोई ऐसी डायरी हो, जो सिर्फ हमारी बातें दर्ज न करे, बल्कि हमें समझे और जरूरत के समय सही सलाह भी दे, तो वह एक अच्छे साथी की तरह काम कर सकती है. इसी विचार को एआई से जोड़कर ऐप बनाने की शुरुआत हुई. प्राचार्य राजीव चांडक ने बताया कि यह ऐप अब पूरी तरह बनकर तैयार है, इसका विमोचन जल्दी ही होगा.
पहले बेसिक ऐप बनाया, फिर एक साल में कई फीचर्स जोड़े
डॉ. माधुरी गोखले ने बताया कि शुरुआत में ऐप का एक बेसिक वर्जन तैयार किया गया था. समय के साथ इसके फीचर्स और उद्देश्य विकसित होते गए. इसके बाद भगवद्गीता को ऐप का आधार बनाने का विचार आया. आईआईटी मद्रास में एक स्टार्टअप कार्यक्रम के दौरान संभावित यूजर्स से फीडबैक भी लिया गया. लोगों से यह समझने की कोशिश की गई कि ऐसा डिजिटल कंपेनियन उनकी व्यक्तिगत और प्रोफेशनल लाइफ में किस तरह मदद कर सकता है. फीडबैक के आधार पर ऐप में कई नए फीचर्स जोड़े गए. पिछले करीब एक साल से इसके डेवलपमेंट पर लगातार काम किया जा रहा है. अब इसमें डायरी, बिहेवियर एनालिसिस, डिजिटल वेलबीइंग, कर्मा स्कोर, हीलिंग और गीता चैट जैसे फीचर्स शामिल हैं.
डायरी सिर्फ लिखेगी नहीं, अगले दिन बताएगी आपकी दिनचर्या का फीडबैक
स्टूडेंट अविषा गुप्ता ने बताया कि ऐप में पारंपरिक डायरी की तरह हर बात बैठकर लंबा लिखना जरूरी नहीं है. दिन में कोई घटना, अनुभव या विचार आया तो यूजर उसे छोटी-सी एंट्री के रूप में दर्ज कर सकता है. दिनभर की ये छोटी-छोटी एंट्री मिलकर उसकी डिजिटल डायरी तैयार करेंगी. इसके बाद ऐप इन एंट्री का विश्लेषण कर अगले दिन यूजर को फीडबैक देगा. इसका उद्देश्य सिर्फ यह बताना नहीं है कि यूजर ने दिनभर क्या किया, बल्कि उसके व्यवहार और बार-बार सामने आ रही समस्याओं को पहचानना भी है.
‘हील योरसेल्फ’ में समस्या के हिसाब से मिलेगी गीता की सीख
ऐप का ‘हील योरसेल्फ ’ फीचर यूजर की समस्या को समझकर उससे संबंधित भगवद्गीता की सीख सामने लाएगा. मसलन, यदि डायरी की एंट्री से किसी तरह की चिंता, उलझन या किसी समस्या का संकेत मिलता है, तो ऐप उससे संबंधित श्लोक और उसका अर्थ उपलब्ध कराएगा. सिर्फ श्लोक दिखाने के बजाय उसे अलग-अलग तरीकों से समझाने की कोशिश की गई है. यूजर को श्लोक और अर्थ के साथ स्टोरी, कॉमिक और वीडियो फॉर्मेट में भी उसकी व्याख्या मिलेगी, ताकि नई पीढ़ी के लिए गीता की सीख को आसानी से समझना संभव हो.

