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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > रात्रि में कतई न करें घट स्थापना, जानें… कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और तारीख
Religion

रात्रि में कतई न करें घट स्थापना, जानें… कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और तारीख

DB News
Last updated: 05/10/2026 10:29 AM
DB News
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6 Min Read
शारदीय नवरात्रि पर घट स्थापना का शुभ मुहूर्त जानें...
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शारदीय नवरात्रि 2026 की प्रतिपदा 10 अक्टूबर की रात से शुरू होगी, लेकिन कलश स्थापना 11 अक्टूबर को होगी. जानें इसकी वजह…

Source : DB News Update

Contents
शारदीय नवरात्रि 2026 की प्रतिपदा 10 अक्टूबर की रात से शुरू होगी, लेकिन कलश स्थापना 11 अक्टूबर को होगी. जानें इसकी वजह…तिथि के अनुसार निर्धारित होते हैं त्योहारउदयातिथि को दी गई है मान्यताकलश स्थापना का सही समय क्या है?शारदीय नवरात्रि 2026 को प्रतिपदा व उदयातिथिकलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्तव्रत और कलश स्थापना 11 अक्टूबर कोशारदीय नवरात्रि 9 दिनों का संपूर्ण कैलेंडर

Written By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: सुप्रिया

Navratri 2026: मां दुर्गा की उपासन, पूजा और व्रत का प्रमुख हिंदू पर्व शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होने जा रही है. इसकी तैयारी में श्रद्धालु जुटे हुए हैं. लेकिन हिंदू पंचांग की तिथि और समय देखकर उलझन में पड़ सकते हैं. क्योंकि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 10 अक्टूबर की रात को प्रारंभ हो रही है, जबकि कैलेंडर में नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर 2026 लिखा है. ऐसे में कलश स्थापना कब करें और पहला व्रत किस दिन रखें? इसको लेकर असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है. तारीखों के इस फर्क को समझने के लिए तिथि के आरंभ और पूजा के लिए निर्धारित समय को अलग-अलग देखना होगा. पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर को रात 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर को रात 9:30 बजे समाप्त होगी. शारदीय नवरात्रि की घटस्थापना रविवार 11 अक्टूबर को है.

तिथि के अनुसार निर्धारित होते हैं त्योहार

हिंदू धर्म के जितने भी पर्व और त्योहार निर्धारित होते हैं, वे सब तिथि के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं. अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख आधी रात को बदलती है. हिंदू पंचांग की तिथि सूर्य और चंद्रमा की आपसी कोणीय दूरी से तय होती है. दोनों के बीच यह दूरी हर 12 अंश बढ़ने पर अगली तिथि शुरू हो जाती है. इसलिए तिथि सुबह, दोपहर या रात, किसी भी समय बदल सकती है. इसी कारण किसी तिथि का दो अंग्रेजी तारीखों में पड़ना सामान्य बात है. पंचांग में उसके शुरू होने का समय देखकर ही त्योहार का दिन तय कर लेना सही नहीं होगा. संबंधित व्रत या पूजा में किस समय की तिथि चाहिए, यह भी देखना होगा.

उदयातिथि को दी गई है मान्यता

हिंदू धर्म में उदयातिथि को मान्यता दी गई है, इसका अर्थ है सूर्योदय के समय मौजूद तिथि. इस वर्ष 11 अक्टूबर के सूर्योदय पर प्रतिपदा रहेगी. नवरात्रि का पहला व्रत और मां शैलपुत्री की पूजा इसी दिन होगी. हालांकि सभी त्योहारों पर उदयातिथि का एक ही नियम लागू नहीं होता, कुछ में रात्रि या अन्य विशेष काल की तिथि देखी जाती है. घटस्थापना में प्रतिपदा के साथ दिन का उपयुक्त समय भी जरूरी है. हिंदू पंचांग के बताए नियमानुसार रात्रि में घटस्थापना वर्जित है. इसलिए 10 अक्टूबर को रात में प्रतिपदा लगते ही कलश स्थापित करना उचित नहीं होगा.

कलश स्थापना का सही समय क्या है?

हिंदू पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक घटस्थापना का मुहूर्त दिया गया है. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक है. दूसरे शहरों में स्थानीय सूर्योदय के अनुसार मुहूर्त देखना चाहिए.

शारदीय नवरात्रि 2026 को प्रतिपदा व उदयातिथि

प्रतिपदा तिथि आरंभ: 10 अक्टूबर 2026, रात्रि 09:19 बजे से

प्रतिपदा तिथि समाप्त: 11 अक्टूबर 2026, रात्रि 09:30 बजे तक

हिंदू धर्म में उदयातिथि को प्रधानता दी गई है (अर्थात जिस तिथि में सूर्योदय होता है, वही पूरे दिन मान्य होती है). इसलिए शारदीय नवरात्रि का पहला दिन व घटस्थापना 11 अक्टूबर को ही मान्य है.

कलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य की मानें तो आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 11 अक्टूबर, दिन रविवार को शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं. देवीपुराण के अनुसार द्विस्वभाव लग्न युक्त प्रातः काल में देवी का आह्वान एवं घटस्थापना पूजन का विधान है.

चित्रा नक्षत्र: रात्रि 10:32 बजे तक

वैधृति योग: रात्रि 09:05 बजे तक

शास्त्रों के अनुसार, प्रतिपदा के दिन चित्रा नक्षत्र अथवा वैधृति योग सम्पूर्ण दिन व्याप्त रहे तो अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना करनी चाहिए. इस दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग भी रहेंगे, जिन्हें घटस्थापना में सामान्यतः टालने की सलाह दी जाती है. हिंदू पंचांग ने इनकी मौजूदगी का उल्लेख करते हुए मुहूर्त दिया है, इन्हें देखकर नवरात्रि की शुरुआत अगले दिन नहीं खिसकानी चाहिए.

व्रत और कलश स्थापना 11 अक्टूबर को

कैलेंडर में 11 अक्टूबर देखकर इसे पंचांग की गलती न मानें. प्रतिपदा का आरंभ 10 अक्टूबर की रात होगा, जबकि नवरात्रि का पहला व्रत और विधिवत कलश स्थापना 11 अक्टूबर को होगी.

शारदीय नवरात्रि 9 दिनों का संपूर्ण कैलेंडर

दिनांक देवी की पूजा

11 अक्टूबर 2026: मां शैलपुत्री पूजा, कलश स्थापना (घटस्थापना)

12 अक्टूबर 2026: मां ब्रह्मचारिणी पूजा

13 अक्टूबर 2026: मां चंद्रघंटा पूजा

14 अक्टूबर 2026: मां कूष्मांडा पूजा

15 अक्टूबर 2026: मां स्कंदमाता पूजा

16 अक्टूबर 2026 : मां कात्यायनी पूजा

17 अक्टूबर 2026 : मां कालरात्रि पूजा

18 अक्टूबर 2026 : मां महागौरी पूजा (दुर्गा अष्टमी)

19 अक्टूबर 2026 : मां सिद्धिदात्री पूजा (महानवमी)

20 अक्टूबर 2026: दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी (दशहरा)

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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