प्रदोष काल में धन्वंतरि, कुबेर व लक्ष्मी पूजन कर मुख्य द्वार पर यम का दीप जलाने का विधान है, जिससे घर में आरोग्य और बरकत रहती है.
Written By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Source : DB News Update
Dhanteras 2026: हिंदू संस्कृति के अनुसार दीपावली महापर्व की शुरुआत धनतेरस (धन त्रयोदशी) से ही हो जाती है. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस का पावन पर्व वास्तव में पांच दिवसीय दीपोत्सव का सूचक है. धनतेरस खरीदारी और संध्या कालीन पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है.
पौराणिक मान्यता है कि, समुद्र मंथन के दौरान आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इसी कारण इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में मान्यता मिली है. 2026 में धनतेरस के दिन प्रदोष काल और वृषभ लग्न का संयोग है, जिसके कारण धनतेरस के दिन की गई खरीदारी अत्यंत शुभ और अक्षय फलदायी मानी गई है. इसी रात से यमराज और मां लक्ष्मी के स्वागत में दीये जलाने का क्रम भी प्रारंभ हो जाता है.
धनतेरस के दिन इन देवी-देवताओं की पूजा करने का विधान
धन्वंतरि भगवान : शारीरिक आरोग्य, निरोगी काया और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए इस दिन विशेष रूप से धन्वंतरि देव की पूजा की जाती है.
कुबेर देव : इन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष माना जाता है, जो समस्त धन-संपदा के संरक्षक और संचालक हैं. धन में स्थिरता बनी रहे और आम इंसान की उन्नति व आर्थिक समझ बेहतर हो, इसके लिए भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है.
मां लक्ष्मी: सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी भी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं. इसी कारण धनतेरस की संध्या पर मां लक्ष्मी के स्वागत और आशीर्वाद के लिए घर के मुख्य द्वार व आंगन में दीप जलाए जाते हैं.
धनतेरस की पूजा और खरीदारी के शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार), सुबह 11:06 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 07 नवंबर 2026 (शनिवार), सुबह 10:46 बजे तक
हस्त नक्षत्र प्रारंभ: 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार), सुबह 05:43 बजे से
हस्त नक्षत्र समाप्त: 07 नवंबर 2026 (शनिवार), सुबह 07:20 बजे तक
प्रदोष काल: 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार), शाम 05:30 बजे से 07:00 बजे तक
धनतेरस पर पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार), शाम 05:30 बजे से 07:00 बजे तक
वृषभ लग्न (स्थिर लग्न): 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार), शाम 05:45 बजे से 07:42 बजे तक
धनतेरस पर ग्रहों की स्थिति
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस पर ग्रहों का बेहद अनुकूल और दुर्लभ संयोग बन रहा है:
विशेष दिन: यह पर्व शुक्रवार को पड़ रहा है, जो मां लक्ष्मी और धन-ऐश्वर्य के स्वामी ग्रह शुक्र को समर्पित विशेष दिन है.
तिथि योग: द्वादशी तिथि सुबह 11:06 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी. द्वादशी मांगलिक कार्यों व दान-पुण्य के लिए शुभ मानी जाती है.
नक्षत्र व योग: हस्त नक्षत्र के प्रभाव से धन वृद्धि और दैनिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. यद्यपि विष्कुम्भ योग की पहली घटी सामान्य कार्यों के लिए मध्यम मानी जाती है, परंतु धीरे-धीरे सभी कार्य सिद्ध होते हैं.
ग्रह गोचर स्थिति: सूर्य तुला राशि में, चंद्रमा कन्या राशि में, मंगल कर्क राशि में, बुध तुला राशि में, गुरु सिंह राशि में, शुक्र कन्या राशि में, शनि मीन राशि में, राहु कुंभ राशि में तथा केतु सिंह राशि में संचरण करेंगे.
(नोट: धनतेरस की पूजा में राहुकाल और चौघड़िया का विचार अनिवार्य नहीं माना जाता है.)
धनतेरस पूजा के शास्त्रीय नियम
शास्त्रीय मान्यता है कि, धनतेरस की पूजा संध्या काल यानी प्रदोष काल में ही करना सर्वश्रेष्ठ है. इसके साथ ही स्थिर लग्न (विशेषकर वृषभ लग्न) का समय अत्यंत फलदायी माना गया है. प्रदोष काल और वृषभ लग्न के संयोग में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन कुबेर की विधिवत पूजा-अर्चना करने से घर और व्यापार में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है तथा धन-संपत्ति में निरंतर बरकत बनी रहती है.
खरीदारी के लिए श्रेष्ठ समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार खरीदारी के लिए ये समय सबसे फलदायी रहेंगे-
सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त – प्रदोष व स्थिर लग्न
समय: शाम 05:50 बजे से शाम 07:47 बजे तक
महत्व: प्रदोष काल और स्थिर लग्न (वृषभ काल) में सोने-चांदी के आभूषण, लक्ष्मी-गणेश के सिक्के और नए बर्तन खरीदना सबसे शुभ माना जाता है. मान्यता है कि स्थिर लग्न में खरीदी गई संपत्ति घर में लंबे समय तक टिकती है.
दिन का चौघड़िया मुहूर्त
चर, लाभ और अमृत का चौघड़िया: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक
शुभ चौघड़िया: दोपहर 02:50 बजे से शाम 04:15 बजे तक
खरीददारी के लिए वस्तुएं: दोपहिया, चार पहिया वाहन, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और गृह उपयोगी सामान.
रात्रि का मुहूर्त- समय: रात 09:00 बजे से रात 10:30 बजे तक
महत्व: जो लोग शाम को खरीदारी नहीं कर पाते, वे इस समय धातु की वस्तुएं और झाड़ू खरीद सकते हैं.
धनतेरस पर क्या खरीदना सही और शुभ है?
सोना-चांदी: देवी लक्ष्मी के प्रतीक रूप में सोने के गहने या चांदी के सिक्के.
पीतल-तांबे के बर्तन: पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा पीतल का कलश लेकर प्रकट हुए थे.
झाड़ू: झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इससे दरिद्रता दूर होती है.
साबुत धनिया: धनतेरस के दिन खड़ा धनिया खरीदकर दिवाली पूजन में रखना आर्थिक उन्नति का कारक माना जाता है.
