उत्तराखण्ड में 14 जनवरी से 20 अप्रैल, 2027 तक आयोजित है कुंभ, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेला नियंत्रण कक्ष (सीसीआर) के सभागार अर्धकुंभ की जानकारी दी. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कुंभ भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, सनातन संस्कृति और जनआस्था का भव्य उत्सव है.
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Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Haridwar Kumbh 2027 : हरिद्वार कुंभ मेला (अर्धकुंभ)-2027 का आधिकारिक लोगो, वेबसाइट और गीत जारी कर दिया गया है. हरिद्वार कुंभ-2027 के लोगो में मां गंगा, हर की पौड़ी क्षेत्र, धनुष पुल और सूर्योदय की दिव्य आभा को दर्शाया गया है. इसमें भगवान शिव की प्रतिमा, साधु-संतों, सनातन परंपरा के प्रतीकों त्रिशूल और डमरू के साथ ही मां मनसा देवी और मां चंडी देवी की पहाड़ियों को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है. यहां बतादें कि कुंभ मेला प्रशासन ने 2027 के कुंभ मेले का लोगो तैयार करने के लिए राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों से प्रविष्टियां आमंत्रित की थीं. सैकड़ों प्रविष्टियों में से चयन समिति ने 13 मौलिक डिजाइनों की समीक्षा करने के बाद हरिद्वार के जगजीतपुर निवासी मधु शर्मा के डिजाइन का चयन किया. इसी डिजाइन के आधार पर हरिद्वार कुंभ-2027 का आधिकारिक लोगो तैयार किया गया.
सीएम ने किया लोगो और वेबसाइट का उद्घाटन
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार 12 अक्टूबर को मेला नियंत्रण कक्ष (सीसीआर) के सभागार से कुंभ के लोगो और वेबसाइट का अधिकारिक रूप से उद्घाटन किया. इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धामी ने कहा कि कुंभ भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, सनातन संस्कृति और जनआस्था का भव्य उत्सव है. उन्होंने आगे कहा कि, “हरिद्वार कुंभ का लाखों श्रद्धालुओं के लिए अत्यधिक धार्मिक महत्व है. राज्य सरकार दिव्य और भव्य कुंभ मेला-2027 आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है. इस आयोजन को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी.”
आम लोगों को जोड़ने की भूमिका निभाएगा लोगो और गीत
सीएम धामी ने कहा कि आधिकारिक लोगो, वेबसाइट और गीत कुंभ की पहचान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा श्रद्धालुओं और आम लोगों को इस आयोजन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. राज्य सरकार ने कहा कि कुंभ मेला-2027 की आधिकारिक सरकारी वेबसाइट के माध्यम से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और आम लोगों को कुंभ से संबंधित प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.
साधु और संतों के मन में हर्ष छा गया…के बोल से बना गीत
कुंभ मेला-2027 के आधिकारिक गीत का लोकार्पण समारोह का प्रमुख आकर्षण गीत में रहा. जिसका बोल ‘‘साधु और संतों के मन में हर्ष छा गया, कुंभ का पर्व आ गया’’ की पंक्तियों ने सभागार में बैठे लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. यह गीत कुंभ के आगमन की प्रसन्नता, साधु-संतों के उत्साह और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वर को दर्शा रहा है. इस गीत की रचना, गायन और संगीत हरिद्वार निवासी गायक राघव राजा ने दिया है.
कुंभ की वेबसाइट से मिलेंगी अधिकारिक जानकारी
अधिकारियों ने बताया कि वेबसाइट पर आयोजन से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध होगी. इसके माध्यम से देश-विदेश के श्रद्धालुओं को कुंभ मेले से जोड़ने में भी मदद मिलेगी. कुंभ मेला-2027 की आधिकारिक वेबसाइट https://haridwarkumbh.uk.gov.in के माध्यम से श्रद्धालुओं, आगंतुकों और आमजन तक कुंभ से संबंधित प्रामाणिक जानकारियां पहुंचाई जा सकेंगी.
डिजिटल मंच पर सूचनाओं की उपलब्धता से आयोजन संबंधी जानकारी को व्यवस्थित ढंग से प्रसारित करने और देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं को भी कुंभ से जोड़ने में मदद मिलेगी. सोशल मीडिया का यह माध्यम कुंभ की तैयारियों और आयोजन से जुड़ी जानकारियों तक लोगों की पहुंच सुगम बनाने के साथ हरिद्वार की धार्मिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने में उपयोगी साबित होगा.
परंपरा की गरिमा के साथ आधुनिक संचार माध्यमों का समन्वय
हरिद्वार कुंभ-2027 उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है. आधिकारिक लोगो आयोजन को विशिष्ट दृश्य पहचान प्रदान करेगा, वेबसाइट सूचना के डिजिटल प्रसार का माध्यम बनेगी और गीत कुंभ के आगमन से जुड़ी भावनाओं को अभिव्यक्त करेगा. तीनों माध्यमों के समन्वित उपयोग से कुंभ की धार्मिक महत्ता, सांस्कृतिक वैभव और परंपराओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जा सकेगा.
परंपरागत आध्यात्मिक गरिमा के साथ आधुनिक संचार माध्यमों का उपयोग कुंभ के संदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में सहायक होगा. इन माध्यमों से हरिद्वार की धार्मिक पहचान और कुंभ की विशिष्टता को देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी.
हरिद्वार कुंभ मेला 2027 की तिथियां
- 14 जनवरी 2027- मकर सक्रांति
- 06 फरवरी 2027– मौनी अमावस्या
- 11 फरवरी 2027– वसंत पंचमी
- 20 फरवरी 2027 – माघ पूर्णिमा
- 7 अप्रैल 2027 – नव संवत्सर
- 15 अप्रैल 2027 – राम नवमी
- 20 अप्रैल 2027 – चैत्र पूर्णिमा
हरिद्वार कुंभ मेला 2027 के अमृत स्नान की तिथियां
- 6 मार्च 2027 – महाशिवरात्रि (पहला अमृत स्नान)
- 8 मार्च 2027- सोमवती अमावस्या (दूसरा अमृत स्नान)
- 14 अप्रैल 2027- मेष संक्रांति/बैसाखी (तीसरा अमृत स्नान)
- 20 अप्रैल 2027- चैत्र पूर्णिमा (चौथा अमृत स्नान)
कुंभ का आध्यात्मिक महत्व
कुंभ की तिथि घोषित होने के साथ आयोजन की रूपरेखा देश भर के साधु-संतों अर श्रद्धालुओं के मन में अपने आप बन जाती है. हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले धार्मिक लोग इसे सबसे पवित्र धार्मिक त्योहारों में से एक मानते हैं, जिसमें लाखों लोग आध्यात्मिक शुद्धि के लिए गंगा स्नान करने के लिए पहुंचते हैं. हरिद्वार अर्ध कुंभ मेला 2027 केवल इसलिए विशेष और महत्वपूर्ण है क्योंकि हरिद्वार पूर्ण कुंभ की दो तिथियों के बीच में पड़ता है (एक छह साल बाद और एक छह साल पहले)। यह आयोजन गंगा नदी के पवित्र तट पर आयोजित होता है. जिसमें 13 अखाड़ों के साधु-संत एक साथ आते हैं और भव्य जुलूस व पारंपरिक अनुष्ठान के साथ “शाही स्नान” करते हैं.
