चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ (SSR) करने का ऐलान किया. एमपी, यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे राज्य भी आए जद में
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Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Election Commission News: चुनाव आयोग द्वारा कराए गए एसआईआर को लेकर देशभर में घमासान मचा हुआ है. वहीं दूसरी ओर आज गुरुवार 15 अक्टूबर को स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) कराने का निर्णय ले लिया गया है. एसएसआर की जद में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान सहित 17 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश आएंगे, जिनकी वोटर लिस्ट का स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) कराया जाएगा. चुनाव आयोग ने इस संबंधित में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्राचार भी कर दिया है.
SSR के तहत वोटर लिस्ट में नए नाम जोड़े जाएंगे और पहले से दर्ज जानकारी में गलतियां सुधारी जाएंगी. इसके अंतर्गत 2027 में 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवा भी नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे. यह आदेश ऐसे समय आया है, जब देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विवाद और विरोध के स्वर गूंज रहे हैं. विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) में वो राज्य भी शामिल हैं, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा सहित 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को एक पत्र लिखा है, जिसमें आयोग ने बताया कि एक जनवरी 2027 ‘‘पात्रता तिथि’’ मानी जाए.
किन राज्यों में जरूरी है SSR?
यह रिवीजन अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में लागू होगा. आयोग ने अपने पत्र के माध्यम से संदेश दिया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां एसएसआर का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा.
Election Commission के द्वारा SSR कराने का उद्देश्य
Election Commission का एसएसआर कराने का प्रमुख उद्देश्य पात्र मतदाताओं, खासकर उन युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं को सूची में शामिल करना है और इसकी एंट्री में सुधार करना और इसमें संशोधन को और बेहतर बनाना है. चुनाव आयोग के मुताबिक, SSR का मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट रखना है. ताकि कोई भी पात्र नागरिक लिस्ट में नाम दर्ज कराने से न छूटे.
1 जनवरी 2027 के अलावा 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवा भी पहले से आवेदन कर सकेंगे. आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी पात्र मतदाताओं से आवेदन लेने की कोशिश की जाए.
SIR में छूटे नामों को जोड़ने की प्रक्रिया का जिक्र नहीं
चुनाव आयोग के SSR से जुड़े आदेश में SIR के दौरान वोटर लिस्ट में नाम शामिल नहीं हो पाने वाले लोगों के लिए अलग से प्रक्रिया नहीं बताई गई है. हालांकि, SIR के दौरान जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने पर संबंधित व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकता है. इसके साथ जरूरी दस्तावेज भी देने होंगे. आवेदन के आधार पर नाम अपने आप नहीं जुड़ेगा. निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) पात्रता की जांच करने के बाद ही नाम जोड़ने पर फैसला करेगा.
SIR को लेकर देशभर में बवाल
एक ओर जहां एसआईआर में कथित गड़बड़ी को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है. चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का इंडिया गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी देश भर में अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन करने में जुटे हुए हैं. विपक्षी दल का गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा है. वहीं दूसरी ओर विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया है और इस प्रक्रिया पर चिंता जताई है.
एक केंद्र पर 1200 से ज्यादा मतदाता नहीं होने चाहिए
आयोग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मतदान केंद्रों की संख्या और जगह की समीक्षा की जाए और एक केंद्र पर सामान्य तौर पर 1200 से ज्यादा मतदाता नहीं होने चाहिए. नया केंद्र बनाने के लिए आयोग की मंजूरी जरूरी होगी.
एसएसआर के तहत ये होंगे काम
- मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर से ज्यादा दूरी न तय करनी पड़े. इसके लिए हाईराइज इमारतों, रिहायशी कॉलोनियों और शहरी झुग्गी-बस्तियों में सर्वे किया जाएगा.
- नए केंद्र की जरूरत होने पर जिला निर्वाचन अधिकारी प्रस्ताव भेजेंगे. मौजूदा और नए केंद्रों की जगह का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा.
- यूपी विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को खत्म हो रहा है. वहीं 60-सदस्यीय मणिपुर, 40-सदस्यीय गोवा, 117-सदस्यीय पंजाब और 70-सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर खत्म होगा.
इलेक्शन कमीशन के अधिकार?
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत निर्वाचन आयोग को यह अधिकार है कि वह कार्यकाल समाप्त होने से 6 महीने पहले चुनाव करा सकता है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत वोटर लिस्ट तैयार करने, उसमें संशोधन करने और गलतियां सुधारने में लगे अधिकारी इस अवधि में चुनाव आयोग के नियंत्रण और निगरानी में काम करेंगे.
अधिकारियों के पद खाली नहीं रहेंगे, ट्रांसफर पर भी रोक
आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि SSR के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO), सहायक ERO और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन दिए जाएं. इस दौरान CEO, DEO, ERO और AERO के पद खाली नहीं रहने चाहिए. आयोग की मंजूरी के बिना इन अधिकारियों का तबादला भी नहीं किया जा सकेगा. अगर किसी अधिकारी का तबादला जरूरी हो, तो कारण सहित प्रस्ताव आयोग को भेजना होगा.
