हिंदू धर्म में आम की लकड़ी को पवित्रता, उर्वरता और देवत्व का प्रतीक है. इन्हीं कारणों से आम की लकड़ियों से हवन किया जाता है. आइए जानते हैं इसके बारे में अध्यात्म और विज्ञान क्या कहता है.
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By : डीबी न्यूज अपडेट| Edited By : प्रिंस अवस्थी
Aam Ki Lakdi: हिंदू धर्म में किसी भी तरह के पूजा-अनुष्ठान में हवन को बेहद शुभ माना जाता है. हम सभी ने कभी न कभी हवन किया होगा. क्या आपको कभी ये ख्याल नहीं आया कि हवन करने के लिए आम की लकड़ियों का ही क्यों इस्तेमाल किया जाता है. हवन के लिए किसी और पेड़ की लकड़ी क्यों प्रयोग में नहीं लाई जाती है. सनातन धर्म में आम के पेड़ को पवित्रता, उर्वरता और देवत्व का प्रतीक माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, इसकी लकड़ी से निकला धुआं घर की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालता है और सकारात्मकता का संचार करता है. आइए जानते हैं इसके पीछे क्या कारण है?
आम की लकड़ी का इस्तेमाल
मान्यता है कि हिंदू धर्म में आम की लकड़ी को पवित्रता, उर्वरता और देवत्व का प्रतीक है. इन्हीं कारणों से आम की लकड़ियों से हवन किया जाता है. हवन में आम की लकड़ी के इस्तेमाल से नए वर और वधू के जीवन में नकारात्मक शक्तियां खत्म होती है.
शास्त्रों में हवन
यज्ञ साधनों में संविदा, सामग्री, अग्नि, कपूर, गौ घी आदि घरेलू वस्तुएं प्रयोग मे लाई जातीं हैं. अतः हवन प्रेमी द्वारा सरलता से हवन किया जा सकता है. हवन किसी भी कारण से किया जाए लेकिन उसमें आम की लकड़ी का इस्तेमाल करना बेहद शुभ होता है. हवन में आम की लकड़ी के साथ धूप, देवदारों की लकड़ियां, कपूर, गुलाब की पंखुड़ी, चंदन, अक्षत, लोबान और फूल मिलाकर हवन किया जाता है. शास्त्रों में हवन को लेकर बताया गया है कि हवन करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. जिस स्थान पर हवन किया जाता है, वहां पर सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.
वैज्ञानिक कारण क्या कहते हैं?
वैज्ञानिक अपनी रिसर्च में कहते हैं कि, आम की लकड़ी से कार्बन डाइऑक्साइड बाकी सभी लकड़ी की तुलना में कम निकलती है. इसके साथ ही आम की लकड़ी काफी ज्वलनशील भी होती है. रिसर्च बताते हैं कि आम की लकड़ी जलने से इसमें फार्मिक एल्डिहाइड नाम की गैस निकलती है जो कई तरह के बैक्टीरिया और जीवाणु को नष्ट कर देती है, जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है. शुद्धता के कारण भी हवन में हमेशा आम की लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है. इस बात को धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही कारणों से सिद्ध किया जा चुका है.
आम की लकड़ी से हवन करने के फायदे
- हवन में आम की लकड़ी के इस्तेमाल से वातावरण शुद्ध होता है.
- आम की लकड़ी काफी लाभदायक होती है, जो घर से नकारात्मक शक्तियों को दूर रखती है.
- हवन में आम की लकड़ियों के इस्तेमाल से मानसिक तनाव दूर होता है, जो अंदर से शांति का अहसास दिलाती है.
- घर में शिशु के जन्म होने पर हवन कराने से, शिशु ग्रह दोषों से बचाता है. जो उसे स्वस्थ जीवन प्रदान करता है.
- आम की लकड़ी से हवन करने पर कई तरह के बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं.
आम की लकड़ी का वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिकों के अनुसार, अन्य लकड़ियों की तुलना में आम की लकड़ी जलने पर बहुत कम मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) छोड़ती है. इसके जलने से फॉर्मिक एल्डिहाइड (Formic Aldehyde) नामक गैस निकलती है, जो हवा में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को नष्ट कर वातावरण को शुद्ध करती है. यह बेहद ज्वलनशील होती है और थोड़ी सी नमी होने पर भी आसानी से जल जाती है.
आम की लकड़ी के अन्य विकल्प?
आम की लकड़ी की उपलब्धता पर शंका बनी रहती है, अतः ऋषियों ने शास्त्रों में दूध वाले पेड़ की लकड़ी को प्रयोग के लिए उपयोगी माना है. आम की जगह पीपल, बरगद एवं पखार आदि का प्रयोग किया जा सकता है, क्योंकि इन लकड़ियों के जलने के बाद सीधे राख ही बनती है. बिना दूध वाली लकड़ियाँ कोयला बनाती है, जो हवन के लिए शुभ नहीं है.
यज्ञ करने की विशेषताएं
सिर्फ आम की लकड़ी, 1 किलो जलाने से हवा में मौजूद विषाणु बहुत कम नहीं हुए. पर जैसे ही उसके ऊपर आधा किलो हवन सामग्री डाल कर जलाया गया तो एक घंटे के भीतर ही कक्ष में मौजूद बैक्टीरिया का स्तर 95% कम हो गया. यही नहीं कक्ष की हवा में मौजुद जीवाणुओं का परीक्षण करने पर पाया कि कक्ष के दरवाजे खोले जाने और सारा धुआं निकल जाने के 24 घंटे बाद भी जीवाणुओं का स्तर सामान्य से 86 प्रतिशत कम था.
एक रिपोर्ट के अनुसार हवन के द्वारा न सिर्फ मनुष्य बल्कि वनस्पतियों एवं फसलों को नुकसान पहुचाने वाले बैक्टीरिया का भी नाश होता है. जिससे फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो सकता है.
