ब्रह्मपुराण के अनुसार दिवाली की रात मां लक्ष्मी घरों में विचरण करती हैं. पूजा-पाठ से प्रसन्न होकर मां घर पर वास करती है.
Source : DB News Update
By : पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : सुप्रिया
Diwali Laxmi Puja : दिवाली दीप और खुशियों का पर्व है, जिसे कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है. इस दिन घर, ऑफिस और कल-कारखाने आदि में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने का महत्व है. लोग लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करते हैं. दिवाली की रात को ज्योतिष शास्त्र में ‘स्थिर लग्न’ (विशेषकर वृषभ लग्न) माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि स्थिर लग्न में पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और वे घर में ‘स्थिर’ (हमेशा के लिए) निवास करती हैं, जिससे धन और समृद्धि कभी कम नहीं होती.
इस साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी. शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि, दिवाली में लक्ष्मी पूजन अमावस्या तिथि रहने और प्रदोष काल में करनी चाहिए. आप निशिताकाल मुहूर्त में भी पूजा कर सकते हैं. लक्ष्मी पूजन के लिए उपयुक्त सभी मुहूर्त 8 नवंबर को रहेंगे. प्रदोष काल के समय गृहस्थों और व्यापारियों के लिए लक्ष्मी पूजा हेतु सबसे उत्तम माना गया है. वहीं महानिशीथ काल में तांत्रिक, साधक और विशेष मनोकामना रखने वाले लोग मां काली और महालक्ष्मी की साधना करते हैं.
रात के समय ही लक्ष्मी पूजा करना शुभ
अन्य दिनों में तो आप सुबह-शाम कभी भी मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं. लेकिन दिवाली के दिन रात के समय ही लक्ष्मी पूजा करना शुभ होता है. शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद ही की जानी चाहिए. पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या की रात को ही मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं. जिस घर में रात के समय साफ-सफाई, दीपों का प्रकाश और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना होती है, माता लक्ष्मी उसी घर में प्रवेश करती हैं.
रात 08:09 तक का समय शुभ
दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा के लिए 8 नवंबर को प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक शुभ रहेगा. वहीं निशीथ काल का समय रात 11:39 बजे से मध्य रात्रि 12:31 बजे तक (9 नवंबर की शुरुआत) तक रहेगा.
कार्तिक अमावस्या तिथि की गणना
अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:29 बजे से
अमावस्या तिथि का समापन: 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे तक
चूंकि अमावस्या तिथि 8 नवंबर की पूरी रात मौजूद रहेगी, इसलिए दीपावली और लक्ष्मी पूजा का महापर्व 8 नवंबर, रविवार को ही शास्त्र सम्मत माना गया है.
घर पर सैदव रहता है उनका वास
दिवाली के दिन शुभ मुहूर्त और विधि-विधान से पूजा करने पर मां लक्ष्मी भक्तों को धन-धान्य, ऐश्वर्य, सौभाग्य, समृद्धि आदि का आशीर्वाद देती है और घर पर सैदव उनका वास रहता है.
लक्ष्मी पूजन में दिशा और स्थापना संबंधी सावधानियां
- पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.
- मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में स्थापित करें.
- भगवान गणेश को हमेशा मां लक्ष्मी के बाईं ओर स्थापित करें.
- माता सरस्वती को माता लक्ष्मी के दाईं ओर रखें.
- पूजा में कभी भी मिट्टी की टूटी हुई या खंडित मूर्तियों का उपयोग न करें.
- साथ ही, मां लक्ष्मी की ऐसी तस्वीर न रखें जिसमें वे उल्लू पर सवार हों या खड़ी मुद्रा में हों.
- हमेशा कमल पर बैठी हुई आशीर्वाद मुद्रा वाली मूर्ति ही चुनें.
दीपक की सही दिशा
- पूजा में तेल का दीपक अपने बाईं ओर और शुद्ध घी का दीपक अपने दाईं ओर रखें.
- दिवाली की रात जलने वाला मुख्य दीपक पूरी रात बुझना नहीं चाहिए. उसमें पर्याप्त घी या तेल की व्यवस्था रखें, क्योंकि दीपक का बुझना अशुभ माना जाता है.
- मां लक्ष्मी की पूजा में सीधे तुलसी दल (पत्ते) अर्पित न करें. भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय है, लेकिन लक्ष्मी जी की स्वतंत्र पूजा में तुलसी वर्जित मानी गई है.
- पूजा के समय काले या गहरे नीले रंग के कपड़े भूलकर भी न पहनें. इस शुभ अवसर पर लाल, पीले, गुलाबी या चमकीले वस्त्र पहनना सबसे उत्तम होता है.
- पूजा के दौरान और दिवाली की पूरी रात घर में किसी भी प्रकार का विवाद, गुस्सा या अपशब्दों का प्रयोग न करें.
- शांतिपूर्ण और भक्तिमय माहौल में ही लक्ष्मी जी का वास होता है.
लक्ष्मी जी की आरती के नियम
लक्ष्मी जी की पूजा के बाद सबसे पहले भगवान गणेश की आरती करें, उसके बाद मां लक्ष्मी की आरती करें. पूजा संपन्न होने के बाद या मध्यरात्रि में घर में झाड़ू न लगाएं और न ही कूड़ा घर से बाहर फेंकें. ऐसा करने से घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती हैं. दिवाली की रात मुख्य पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार को कुछ समय के लिए खुला रखा जाता है (माना जाता है कि माता का आगमन होता है), लेकिन घर को पूरी तरह सूना या अंधेरे में न छोड़ें.
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