निरंजनी अखाड़ा प्रमुख कैलाशानंद गिरी जी ने बताया है कि लॉरेन पॉवेल को एक साल पहले ही ‘कमला’ नाम दिया जा चुका था.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Mahakumbh 2025 Steve Jobs’ Wife: लॉरेन पॉवेल को महाकाली के बीज मंत्र की दीक्षा दी गई है. वह ॐ क्रीं महाकालिका नमः का जाप करेंगी. उन्होंने अपने गुरु आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि से दीक्षा ली है. लॉरेन पॉवेल 10 दिनों के लिए महाकुंभ आईं थीं लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद वह तीन दिन में ही प्रयागराज से लौंट गईं.
बता दें कि एपल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल 2025 के इस महाकुंभ में खूब सुर्खियां बटोरीं हैं. फिलहाल उन्हें प्रयागराज से लौटे दो दिन हो चुके हैं लेकिन उनकी चर्चा अभी भी जारी है. नई जानकारी यह है कि लॉरेन एक साल पहले ही सनातन के रास्ते चल पड़ी थीं. पिछले साल फरवरी में ही उन्हें ‘कमला’ नाम मिल चुका था. यह बात इस कुंभ में उन्हें दीक्षा देने वाले पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के प्रमुख स्वामी कैलाशानंद गिरी ने बतलाई है.
महाकाली का बीज मंत्र से दी दीक्षा
महाकाली का बीज मंत्र ‘ॐ क्रीं महाकालिका नमः’ हैं. इसी की दीक्षा स्वामी कैलाशानंद गिरि ने दी है. वहीं, महाकुंभ के बीच स्टीव जॉब्स के 1974 के एक लेटर की नीलामी हुई. जिसमें उन्होंने कुंभ में शामिल होने की इच्छा जताई थी.
‘कमला’ नाम 18 फरवरी को मिला
आध्यात्मिक गुरू कैलाशानंद गिरी ने बताया, ‘हमने मकर संक्रांति पर यानी 14 जनवरी की रात 10 बजकर 10 मिनट पर उन्हें दीक्षा दी. हालांकि एक साल पहले ही उन्हें ‘कमला’ नाम और गौत्र दिया जा चुका था. पिछले साल 18 फरवरी को उन्हें यह नाम मिला था.’
न्यूज एजंसी ANI से बातचीत करते हुए कैलाशानंद जी ने बताया, ‘वह भौतिकवाद के चरम तक पहुंच चुकी थीं. अब वह सनातन धर्म से जुड़ना चाहती हैं और अपने गुरू से जुड़कर अपनी परंपराएं जानना चाहती हैं. वह बेहद ही सरल और शांत हैं. उनमें अहंकार बिल्कुल नहीं है. वह एक आम श्रद्धालु की तरह ही शिविर में 4 दिन तक रूकीं.’
कैलाशानंद जी बताते हैं, ‘उनके साथ दो बड़े हवाई जहाज में उनके 50 निजी स्टॉफ भी आए थे. वह पूरी तरह से शाकाहारी हैं. वह प्याज और लहसून तक नहीं खाती.’
मां काली की पूजा करने को प्रेरित करते हैं कैलाशानंद
दीक्षा समारोह का आध्यात्मिक माहौल पंचायती अखाड़ा निरंजनी में आयोजित दीक्षा समारोह में अध्यात्म और पवित्रता का अद्भुत संगम देखने को मिला. समारोह में वैदिक मंत्रोच्चारण और मां काली की पूजा-अर्चना ने वातावरण को दिव्य बना दिया. इस मौके पर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी ने कहा- मां काली की साधना से मनुष्य अपने जीवन में शांति और सशक्तिकरण का अनुभव करता है.
अमृत स्नान के दिन बीमार पड़ गई थीं लॉरेन
अमृत स्नान के दिन बीमार पड़ गई थीं महाकुंभ में अमृत स्नान से पहले लॉरेन पॉवेल बीमार पड़ गई थीं. स्वामी कैलाशानंद गिरि ने ANI से कहा था कि- लॉरेन पॉवेल मेरे शिविर में आराम कर रही हैं. उन्हें एलर्जी हो गई है। वह कभी इतनी भीड़भाड़ वाली जगह पर नहीं गई हैं. उन्होंने पूजा के दौरान हमारे साथ समय बिताया. हमारी परंपरा ऐसी है कि जो लोग इसे पहले नहीं देख पाए हैं, वे सभी इसमें शामिल होना चाहते हैं. दीक्षा लेते समय वह स्वस्थ दिखीं.
काशी विश्वनाथ के दर्शन करके महाकुंभ आई थीं महाकुंभ में आने से पहले लॉरेन पॉवेल काशी विश्वनाथ के दर्शन किए थे। गंगा में नौकायन के बाद गुलाबी सूट और सिर पर दुपट्टा डालकर बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचीं। गर्भगृह के बाहर से ही बाबा का आशीर्वाद लिया। सनातन धर्म में गैर हिंदू शिवलिंग का स्पर्श नहीं करते, इस बात का ध्यान रखते हुए उन्होंने बाहर से ही दर्शन किया.
13 जनवरी को प्रयागराज पहुंची थीं लॉरेन
लॉरेन 13 जनवरी को प्रयागराज पहुंची थीं। वह साधुओं की संगत में रहकर सनातन, आध्यात्म और भारतीय संस्कृति को जानने की कोशिश कर रही. उन्होंने निरंजनी अखाड़े में कल्पवास यानी आत्मशुद्धि और तपस्या का संकल्प लिया है.
मीडियो रिपोर्ट के मुताबिक, 1974 में एपल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने एक लेटर लिखा था. जिसमें उन्होंने भारत आने की इच्छा जताई थी. जॉब्स कुंभ मेला जाना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. माना जा रहा है कि अब उनकी वाइफ लॉरेन पॉवेल जॉब्स की इच्छा पूरी करने के लिए भारत आई हैं. वहीं स्टीव जॉब्स का लिखा ये लेटर 4.32 करोड़ रुपए में बिका है.
