25 नवंबर 2026 से मार्गशीर्ष मास की शुरुआत हुई है, जो 23 दिसंबर 2026 तक चलेगा. यह महीना भक्ति, दान और तप के लिए उत्तम.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Margashirsha Month 2026: हिंदू कैलेंडर का अगहन (मार्गशीर्ष) माह 25 नवंबर 2026, बुधवार से प्रारंभ हो रहा है, जो 23 दिसंबर 2026, बुधवार को मार्गशीर्ष पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा. इस माह स्नान, दान, पूजा, व्रत, जप-तप के लिए उत्तम है. कार्तिक पूर्णिमा के बाद कार्तिक मास की समाप्ति हो जाती है और मार्गशीर्ष महीना शुरू हो जाता है. अगहन (Aghan) का महीना हिंदू कैलेंडर का नौंवा महीना है, जो भगवान श्रीकृष्ण और विष्णु जी की पूजा के लिए पवित्र माना गया है. इस मास में तुलसी पूजन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. इस पूरे महीने में गीता के कम से कम एक अध्याय का पाठ रोज करना बेहद फलदायी माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, इस महीने ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी विशेषकर यमुना जी में स्नान करने से सभी पाप नष्ट होते हैं. यदि नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें. इससे आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होगी और जीवन में अमूलचूक परिवर्तन देखने को मिलेंगे. क्योंकि हिंदू धर्म शास्त्र वैज्ञानिकता को प्रमाणित करते हैं और वेदों में लिखा लेख चरितार्थ होता है.
कब से कब तक है अगहन मास
अगहन महीना 25 नवंबर 2026, बुधवार से प्रारंभ हो रहा है, 23 दिसंबर 2026, बुधवार को मार्गशीर्ष पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा. मार्गशीर्ष पूर्णिमा के बाद पौष मास की शुरुआत हो जाएगी. अगहन महीने में प्रतिदिन सुबह और शाम भगवान श्रीकृष्ण या बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) की पूजा करें. उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें. इस महीने पड़ने वाले सभी गुरुवार (बृहस्पतिवार) को माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जिसे अगहन गुरुवार व्रत कहा जाता है.
भगवान श्रीकृष्ण के लिए प्रिय मास
मान्यता है कि मार्गशीर्ष का महीना भगवान श्रीकृष्ण की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है.धार्मिक मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने स्वयं गीता में कहा है- “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्”, यानी महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं. यह पूरा महीना आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति के लिए उत्तम माना गया है. इस महीने में शीत ऋतु (ठंड) का आगमन हो जाता है, इसलिए जरूरतमंदों को ऊनी कपड़े, कंबल, तिल, घी और अन्न का दान करना महादान माना जाता है.
किन कामों के लिए उत्तम है माह?
- – श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा करने का विधान है.
- – सुबह उठकर स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर तुलसी पर जल चढ़ाना चाहिए.
- – श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें.
- – “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करना इस मास में लाभदायक है.
- – अन्न, कपड़ा, तेल, तिल और गुड़ का दान करने से पितरों और देवों की कृपा प्राप्त होती है.
- – प्रत्येक गुरुवार को तुलसी या पीपल वृक्ष के नीचे जल चढ़ाकर दीप जलाएं.
- – गुरु और माता-पिता की सेवा को विशेष पुण्यदायी माना गया है.
- – एकादशी और पूर्णिमा का व्रत करने और गीता का पाठ करने से पुण्य मिलता है.
- – पवित्र नदियों में स्नान का महत्व भी है. इस माह गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी नदियों में किया स्नान अमृत स्नान के समान माना गया है.
अगहन में कौन से काम न करें?
- यह माह भक्ति के लिए उपयुक्त है.
- इस माह अहंकार और वाद-विवाद से बचना चाहिए.
- वाणी में कटुता या विवाद करने से देवी लक्ष्मी का अनादर होता है.
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन न करें. इस मास में शरीर और मन सात्त्विक रखना चाहिए.
- मार्गशीर्ष में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है. इसलिए शाम के समय तुलसी पत्र न तोड़ें.
- इस माह के गुरुवार, एकादशी और पूर्णिमा पर झगड़ा न करें. ऐसा करने से लक्ष्मी कृपा नहीं मिलती.
- इस मास घर, परिवार और अपने कार्यक्षेत्र में शांति, संयम और सेवा का भाव बनाए रखना चाहिए.
- बासी या ठंडा भोजन नहीं करना चाहिए. मार्गशीर्ष में जीरा का प्रयोग भी भोजन में नहीं करना चहिए.
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