Ganesh Chaturthi: गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने-अपने घरों में गणपति जी को बैठाते हैं और उनकी पूजा करते हैं.
Source : DB News Update
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By : सुप्रिया
Ganesh Chaturthi: गणेश चतुर्थी के दिन 14 सितंबर 2026 को मध्याह्न गणेश स्थापना के बाद भी विसर्जन का शुभ मुहूर्त जानना जरूरी है. घर में सिंदूरी गणेश बैठाना शुभ माना जाता है. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. गणेश चतुर्थी पर हमेशा घर में बैठी मुद्रा में गणेश प्रतिमा स्थापित करें. जबलपुर मध्य प्रदेश के ज्योतिषाचार्य विद्वान पंडित प्रदीप मिश्रा की मानें तो उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार बैठे गणपति धन का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसलिए गणपति की पूजा का विशेष महत्व है, तभी फल की प्राप्ति होती है.
2026 में गणपति विसर्जन की प्रमुख तारीखें
डेढ़ दिन: 15 सितंबर 2026
तीसरा दिन: 16 सितंबर 2026
पांचवां दिन: 18 सितंबर 2026
सातवां दिन: 20 सितंबर 2026
अनंत चतुर्दशी: 25 सितंबर 2026
10 दिन की पूजा में ये हैं नियम
गणेश उत्सव को भगवान गणेश के पुनर्जन्म का जश्न मनाया जाता है. 10 दिन तक बप्पा की पूजा में कुछ खास नियमों का जरुर ध्यान रखें, जैसे गणेश जी की उपासना में सूखे फूल, तुलसी, केतकी का फूल, टूटे अक्षत वर्जित माने गए हैं. गणेश उत्सव के दौरान घर में गणेश जी विराजित करते हैं तो घर को कभी सूना न छोड़े न ही जहां बप्पा बैठे हों वहां अंधेरा करें. रोज सुबह-शाम आरती करना न भूलें.
क्या गणपति को तय दिनों से ज्यादा रखना गलत है?
गणेश स्थापना को लेकर ऐसी कोई बाध्यता नहीं है. गणपति को कितने दिन घर में विराजमान रखना है, यह काफी हद तक परिवार की परंपरा और स्थापना के समय किए गए संकल्प पर निर्भर करता है. यदि आपने स्थापना के समय निश्चित अवधि का संकल्प लिया है, तो उसी के अनुसार पूजा और विसर्जन करना उचित माना जाता है.
सबसे जरूरी बात यह है कि गणपति बप्पा को श्रद्धा, भक्ति और सम्मान के साथ विदाई दी जाए. विसर्जन से पहले गणपति की आरती करें, उनसे अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें.
घर में मूषक का होना जरूरी
- गणेश जी की मूर्ति का चुनाव करते वक्त ध्यान रखे कि उसमें चूहा जरूर हो. मूषक यानी चूहा गणपति का वाहन है. मान्यता है बिना मूषक की गणेश मूर्ति की पूजा करने से दोष लगता है.
- गणेश जी की बाईं ओर वाली सूंड की प्रतिमा बहुत शुभ होती है. बाईं ओर सूंड वाली मूर्ति को वाममुखी गणपति कहा जाता है. इनकी उपासना से बप्पा जल्द प्रसन्न होते हैं.
शुभ मुहूर्त पर विसर्जन करें
घर में अगर गणेश जी विराजित कर रहे हैं और 10 दिन से पहले ही मूर्ति विसर्जन करना चाहते हैं तो डेढ़, तीन, या पांच दिन तक गणपति बैठाएं. इसके बाद ही शुभ मुहूर्त विसर्जन करें.
गणेश पूजा के प्रमुख नियम
प्रतिमा स्थापना: बप्पा को घर में स्थापित करते समय ही मन में पक्का कर लें कि आप उन्हें कितने दिनों (डेढ़, ढाई, 5 या 10 दिन) के लिए विराजमान कर रहे हैं.
स्थाई गणेश स्थापना का स्थान: एक बार गणेश प्रतिमा स्थापित होने के बाद, विसर्जन से पहले उन्हें उस स्थान से हटाया नहीं जाता है.
दूर्वा: भगवान गणेश को दूर्वा (घास) जरूर अर्पित करें.
भोग: गणेश जी का प्रिय मोदक या बेसन के लड्डू का प्रतिदिन भोग जरूर लगाएं.
सात्विक आहार: इन 10 दिनों तक घर में पूरी तरह सात्विक रहें और लहसुन-प्याज रहित भोजन का ही इस्तेमाल करें.
नियमित आरती: सुबह और शाम दोनों समय विधि-विधान से दीपक जलाकर गणपति की आरती करें.
विसर्जन: अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन के वक्त संयम और श्रद्धा रखें, अत्यधिक उछल-कूद या अनादर से बचें.
पांचवें और सातवें दिन की भी परंपरा
गणपति विसर्जन के लिए पांचवें और सातवें दिन की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है. सातवें दिन विसर्जन करने वाले भक्त स्थापना के बाद कई दिनों तक भगवान गणेश की विशेष पूजा करते हैं. इन दिनों के दौरान घर में गणपति की आरती, भोग और धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं. इसके बाद भक्त परिवार और मित्रों के साथ गणपति को विदाई देते हैं.
अनंत चतुर्दशी को होता है प्रमुख विसर्जन
गणेश उत्सव का सबसे प्रमुख विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन माना जाता है. गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले उत्सव का समापन इस दिन बड़े स्तर पर होता है. सार्वजनिक गणेश मंडलों में अक्सर इसी दिन भव्य जुलूस के साथ गणपति विसर्जन किया जाता है. भक्त ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच भगवान गणेश को विदाई देते हैं. अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश से सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है.
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