श्रीरामेश्वरम् के उपलिंग से विख्यात गुप्तेश्वर महादेव मंदिर से शुरू हुई शाही सवारी, श्रद्धालु-भक्तों ने किया पूजन, लिया आशिर्वाद.
Source : DB News Update
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
MP Jabalpur News : संस्कारधानी जाबालिपुरम् के श्रद्धालु भक्तों के लिए आज 21 जुलाई सावन का दूसरा सोमवार बहुत ही पुण्यदायी रहा. क्योंकि आज के दिन श्रीरामेश्वरम् महादेव के उपलिंग भगवान गुप्तेश्वर महादेव स्वयं भक्तों को दर्शन देने के लिए निकले थे.
इतना ही नहीं शहर के संतों का दर्शन भी संस्कारधानी वासियों को इस अवसर पर मिला. क्योंकि गुप्तेश्वर महादेव भक्त मंडल द्वारा उज्जैन महाकाल की तर्ज पर जाबालिपुरम् में भी शाही सवारी का आयोजन किया गया था. इस यात्रा में भगवान भोलेनाथ पालकी में सवार होकर निकले थे, जिनका स्वागत करने वाले भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ देखने को मिली. शिवभक्तों को पूजन-दर्शन करने वाले भक्त जगह-जगह पाण्डाल लगाकर शाही सवारी का इंतजार करते देखे गए. वहीं गुप्तेश्वर महादेव का दर्शन-पूजन करने वालों की भी प्रतिदिन देखने को मिलती है. बड़ी संख्या में लोग गुप्तेश्वर महादेव के श्रृंगार का दर्शन लाभ प्राप्त कर रहे हैं. जाबालि ऋषि भी तपोभूमि में विराजमान भगवान गुप्तेश्वर महादेव को दक्षिण भारत के रामेश्वर महादेव के उपलिंग की मान्यता है, जिसके चलते देश भर से लोग महादेव गुप्तेश्वर का दर्शन लाभ प्राप्त करने के लिए पहुंचते हैं. सावन माह में भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार करने की परंपरा है. भगवान के अनेक रूप यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षण का केन्द्र हैं.
संकारधानी के भक्तों का हालचाल जाना
गुप्तेश्वर महादेव भगवान स्वयं पालकी में सवार होकर शहर का भ्रमण किया और शहरवासियों का हालचाल जाना. शाही सवारी में भगवान शंकर के अनेक रूपों का दर्शन भी हुए. भगवान शिव की भक्ति गीत में श्रद्धालु झूमते नजर आए. उनका स्वागत शहर की हर गली में हुआ. भक्तों ने पुष्पमाला लेकर पालके बिछाए बैठे रहे और शाही सवारी के आगमन पर पूजन अर्चन किया.
इन संतों ने की अगवानी
शाही सवारी की अगवानी करने में शहर के संत-महंत विशेष रूप से शामिल रहे, गुप्तेश्वर पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी मुकुंददास जी महाराज के साथ जगद्गुरु श्रीरामरंगी द्वाराचार्य डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज, जगद्गगुरु स्वामी राघवदेवाचार्य जी, जगद्गगुरु स्वामी राजारामाचार्य जी, स्वामी ज्ञानेश्वरी दीदी, महामण्डलेश्वर स्वामी राधेचैतन्य जी के अलावा अनेक संत महात्मा शामिल रहे.
जनप्रतिनिधियों ने पालकी में कंधा लगाया
शहर भ्रमण पर निकले गुप्तेश्वर महादेव की पालकी में कंधा लगाने वालों की होड़ लगी रही. शाही सवारी के संयोजक पंकज पाण्डे, द्वारका मिश्रा के अलावा महापौर जगतबहादुर सिंह अन्नू, मुन्ना भैया, जिला भाजपा अध्यक्ष शहर रत्नेश सोनकर, राममूर्ति मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल होकर गुप्तेश्वर महादेव की पालकी पर कंधा लगाया.
ऐसी भगवान गुप्तेश्वर की पौराणिक कथा
ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम जब वनवास काल में प्रयागराज से होते हुए जाबालिपुरम् पहुंचे, उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि यह स्थान तो जाबालि ऋषि की तपोभूमि है. भगवान राम तपस्वी ऋषि जाबालि से मिले. जाबालि ऋषि ने भगवान श्रीराम से आग्रह किया कि यहां भगवान शंकर का पूजन कर लें. भगवान श्रीराम ने पहाड़ी के अंदर एक बालू से शिवलिंग बनाया और पूजन किया. जिसे आज गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है.
लंका पर विजय प्राप्त कर रावण वध के पश्चात भगवान श्रीराम को ब्रह्महत्या के दोष से मुक्त होने के लिए ऋषियों ने शिवलिंग की स्थापना कर पूजा करने की सलाह दी थी. भगवान श्रीराम को जाबालि ऋषि द्वारा स्थापित गुप्तेश्वर महादेव का स्मरण हुआ. मान्यता है कि जैसे उन्होंने रामेश्वरम में बालू से ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी, वैसे ही गुप्तेश्वर महादेव को भी उसी परंपरा में रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का उपलिंग माना जाता है.
सावन में होता है विशेष श्रृंगार
सावन मास में शिव पूजा का विशेष महत्व होता है. पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया था. विष के प्रभाव को शांत करने के लिए इंद्र देव ने वर्षा की थी. यह समय सावन मास का था, इसलिए इस मास को शिवभक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है.
गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दौरान प्रतिदिन शिवलिंग का विशेष श्रृंगार किया जाता है. भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है क्योंकि वे शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं. भक्तों की मान्यता है कि सावन मास में की गई पूजा से भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
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