रक्षाबंधन-जन्माष्टमी का त्योहार, 79वें स्वतंत्रता दिवस से लेकर गणेशोत्सव तक के सारे व्रत, तीज-त्योहार
Source : DB News Update
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Hindi Panchang 1 August 2025: 1 अगस्त 2025 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है. अगस्त के महीने में रक्षा-बंधन और कृष्ण जन्माष्टमी जैसे दो बड़े त्योहार मनाए जाएंगे. देश का 79वां स्वतंत्रता दिवस भी इसी महीने हैं. इस दिन मासिक दुर्गाष्टमी है, जो माता रानी को समर्पित तिथि है. जिन लोगों को जीवन में रोग, दोष परेशान कर रहे हैं उन्हें इस दिन देवी की आराधना करना चाहिए. दुर्गा चालीसा का पाठ करें और कन्या को भेंट स्वरूप कुछ दान दें. यह माह उत्सव, उमंग और उत्साह से भरा है. इस माह हिंदू मान्यता के विशेष तीज, त्योहार और व्रत रखने का अच्छा मुहूर्त बतलाया गया है.
क्या है पंचांग?
पंचांग इसी स्वभाव को समझने का एक तरीका है। यह केवल तारीख बताने वाला कैलेंडर नहीं है, बल्कि एक ऐसा दैनिक संदर्भ है जो यह संकेत देता है कि कौन-सा समय किस काम के लिए अधिक अनुकूल हो सकता है. यही कारण है कि लोग महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से पहले, पूजा-पाठ के समय या बड़े निर्णय लेते हुए पंचांग देखते हैं. यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि समय और जीवन की लय को समझने का एक संतुलित दृष्टिकोण है.
हिंदू पंचांग का महत्व
पूरे भारत में भले ही हिंदू पंचांग सबसे प्रसिद्ध कैलेंडर है फिर भी कई अन्य कैलेंडर भी हैं जिन्हें भारत के अलग-अलग राज्यों में प्रमुखता दी जाती है.
- शालिवाहन शक, इसे शक संवत् के नाम से जाना जाता है और इसका इस्तेमाल दक्षिण भारत में किया जाता है.
- विक्रम संवत् (बिक्रमी) उत्तर और मध्य भारत में प्रचलित है.
- तमिलनाडु में तमिल कैलेंडर प्रचलित है.
- बंगाल क्षेत्र में बंगाली कैलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है.
- केरल में मलयालम कैलेंडर इस्तेमाल किया जाता है. यह कैलेंडर सूर्य चक्र पर आधारित होता है जबकि ऊपर दिये गये बाकी कैलेंडर चंद्र चक्र पर आधारित होते हैं.
ग्रेगोरियन कैलेंडर से जटिल है हिंदू पंचांग
हिंदू कैलेंडर या हिंदू पंचांग, ग्रेगोरियन कैलेंडर से जटिल है. ग्रेगोरियन कैलेंडर में हर चार साल में एक महीने में एक दिन जोड़ा जाता है, ताकि 354 चंद्र और 365 सौर दिनों के बीच तालमेल बैठ सके लेकिन पूर्व में इसके लिये अधिक जटिल स्वरूप है. चंद्र माह की समग्रता को बनाए रखने के लिए, भारतीय कैलेंडर में विस्तृत गणना के माध्यम से हर कुछ वर्षों में एक पूरा महीना जोड़ दिया जाता है.
तिथियों के प्रकार एवं उनका प्रभाव
तिथि का नाम पक्ष महत्व / प्रभाव
प्रतिपदा (1वीं तिथि) शुक्ल / कृष्ण नए कार्यों की शुरुआत, नए व्यवसाय एवं शुभ कार्यों के लिए उत्तम.
पंचमी (5वीं तिथि) शुक्ल / कृष्ण आध्यात्मिक साधना, मंत्र जाप, पूजा-पाठ और ज्ञान प्राप्ति के लिए शुभ.
दशमी (10वीं तिथि) शुक्ल / कृष्ण धन, समृद्धि, सफलता तथा महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनुकूल.
अमावस्या कृष्ण पक्ष आध्यात्मिक साधना, पितृ तर्पण एवं ध्यान के लिए शुभ, लेकिन नए कार्यों की शुरुआत के लिए सामान्यतः उपयुक्त नहीं मानी जाती.
पूर्णिमा शुक्ल पक्ष मानसिक स्पष्टता, आध्यात्मिक उन्नति, अंतर्ज्ञान और सफलता को बढ़ाने वाली तिथि.
मासिक 2025 कैलेंडर
यहां मासिक 2025 कैलेंडर में ग्रेगोरियन स्वरुप को इस्तेमाल किया गया है; हालांकि हिंदू व्रत और त्योहारों की गणना हिंदू कैलेंडर पर ही आधारित होते हैं। नये साल को जनवरी की 1 तारीख का प्रचलन है हालांकि हिंदू नववर्ष मार्च-अप्रैल हिंदू महीने चैत्र में आता है। आइए अब एक नज़र डालते हैं कि, दोनों कैलेंडरों के महीने कैसे मेल खाते हैं और इन दोनों में क्या अंतर हैं!
हिंदी माह में कब पड़ता है अंग्रेजी महीना
- चैत्र (मार्च–अप्रैल)
- वैशाख (अप्रैल-मई)
- ज्येष्ठ (मई-जून)
- श्रावण (जुलाई-अगस्त)
- भाद्रपद (अगस्त-सितंबर)
- आश्विन (सितंबर-अक्टूबर)
- कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर)
- मार्गशीर्ष (नवंबर-दिसंबर)
- पौष (दिसंबर-जनवरी)
- माघ (जनवरी-फरवरी)
- फाल्गुन (फरवरी-मार्च)
ग्रेगोरियन कैलेंडर में 7 दिन और 12 महीने
समय की सही जानकारी प्राप्त करने के लिये सबसे ज्यादा ग्रेगोरियन कैलेंडर का इस्तेमाल होता है जिसमें सात दिन और बारह महीने होते हैं. इसमें दिन सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार, वहीं महीनों की बात की जाए तो, जनवरी, फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर बारह महीने होते हैं. हालांकि दुनिया के विभिन्न क्षेत्र के लोग अपने महत्वपूर्ण त्योहारों को जानने के लिये पारंपरिक या प्राचीन कैलेंडर का प्रयोग करते हैं. फिर भी, विभिन्न क्षेत्र अभी भी अपने महत्वपूर्ण त्योहारों और इस तरह की गणना के लिए पारंपरिक और स्थानीय कैलेंडर पर निर्भर करते हैं. भारत में वैसे तो सभी प्रशासनिक कार्यों में ग्रेगोरियन कैलेंडर का इस्तेमाल होता है, लेकिन भारत के प्रमुख त्योहारों और व्रत की तिथियों की गणना के लिए, पंचांग का ध्यान रखा जाता है.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

