संस्कारधानी जाबालिपुरम् में दुर्गा प्रतिमा रखने का क्रेज बढ़ा, 90 से ज्यादा स्थानों पर विराजमान हैं मां काली
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Navratri Durga Puja 2025: शारदीय नवरात्र में संस्कारधानी जबलपुर शहर में धूम मची हुई है. संस्कारधानी जबलपुर में करीब 1845 दुर्गा प्रतिमा विराजमान हैं, जिनमें से 90 मां भवानी काली की मूर्तियां शामिल हैं. बताया जा रहा है मां दुर्गा प्रतिमा विराजित करने का सिलसिला हर साल बढ़ता जा रहा है. जिस रफ्तार से शहर का दायरा बढ़ता जा रहा है. उसी अनुपात में मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजित हो रही हैं. अकेले पनागर क्षेत्र में ही 119 प्रतिमाएं विराजित हैं, जो अपने आप में एक कीर्तिमान है. जबकि यह क्षेत्र कभी पिछड़ा माना जाता था और नगर पंचायत पनागर में अधिकांश हिस्सा ग्रामीण का शामिल था. लेकिन शहरी विकास के साथ नवरात्रि का उत्सव भी मनाने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है और इस वर्ष 2025 में दुर्गा प्रतिमाएं सैकड़ा पार कर चुकी हैं. इससे साफ जाहिर होता है कि शहर में दुर्गा प्रतिमा विराजित करने का क्रेज बढ़ा है.
शहरी क्षेत्र से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र में उत्साह
दुर्गा पाण्डाल की सुरक्षा को लेकर शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के दुर्गा समिति के सदस्य पुलिस से सुरक्षा की मांग की है. यह प्रक्रिया हर साल होती है. उन सभी थाना क्षेत्रों से पता चला है कि जिले में 1845 से ज्यादा प्रतिमाएं रखी गई हैं. जिन्होंने सुरक्षा की मांग की है. इसके लिए पुलिस विभाग ने थानावार उन समितियों को सुरक्षा देने का भरोसा दिया है. उन्हीं पुलिस अधिकारियों के आंकड़े बता रहे हैं कि शहर में देवी प्रतिमा स्थापित करने वालों की संख्या बढ़ी है.

काली मां के पूजन का क्रेज बढ़ा
शहर में काली मां के पूजन का चलन बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहा है. हर साल काली प्रतिमा रखने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. इस साल 90 से अधिक काली मां प्रतिमा शहर में रखी गई हैं. जबकि इससे पहले कुछ खास जगह काली मां प्रतिमा रखने का चलन था. लेकिन युवाओं में काली पूजन का महत्व बढ़ा है और उसी अनुपात में काली की मूर्ति रखी जा रही है.

यहां रखी गईं दुर्गा प्रतिमाएं
शहर से लगे पनागर में 119, पाटन में 64, बरेला में 115, गोरखपुर में 70, ग्वारीघाट में 34, गढ़ा में 80, विजय नगर में 19, सिविल लाइन में 19, आधारताल में 81 के अलावा शहपुरा, कुंडम, रांझी, गोकलपुर, बरगी में भी दुर्गा प्रतिमाएं रखी गई हैं. इसके अलावा मां काली की प्रतिमा 90 से ज्यादा स्थापित की गई हैं.
मां की उत्पत्ति की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान पा लिया था कि कोई भी पुरुष या देवता उसका वध नहीं कर पाएगा. अहंकार में चूर होकर महिषासुर ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया. तब सभी देवताओं ने मिलकर अपनी दैवीय ऊर्जा को केंद्रित किया, जिससे भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव के तेज से माँ दुर्गा का प्राकट्य हुआ. माँ दुर्गा ने दसों हाथों में विभिन्न देवताओं के अस्त्र-शस्त्र धारण किए और सिंह पर सवार होकर महिषासुर के साथ नौ दिनों तक भयंकर युद्ध किया. दसवें दिन उन्होंने राक्षस का वध किया, जिसे विजयदशमी या दशहरा के रूप में मनाया जाता है.
अलग-अलग थीम पर बनते हैं भव्य पंडाल
जबलपुर में नवरात्रि और दशहरा उत्सव बहुत प्रसिद्ध है. यहां गढ़ा, अधारताल, और गलगला जैसे क्षेत्रों में विशाल थीम आधारित पंडाल सजाए जाते हैं. यहां मां दुर्गा और महाकाली की दर्जनों भव्य और ऊंची प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं, जिन्हें देखने दूर-दूर से लोग आते हैं. यहां का गरबा नाइट्स काफी प्रसिद्ध है.
जबलपुर के प्रमुख देवी मंदिर
माँ बड़ी खेरमाई का मंदिर लगभग 800 साल पुराना मंदिर है. यहाँ माता की स्थापना एक शिला के रूप में हुई है. इन्हें जबलपुर की मुख्य ग्रामदेवी व कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है. माँ त्रिपुर सुंदरी मंदिर जबलपुर के तेवर क्षेत्र में स्थित है. यहाँ माता महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों स्वरूपों में एक ही मूर्ति में विराजित हैं. वहीं माँ शारदा मंदिर मदन महल की पहाड़ी पर स्थित हैं. जबकि रांझी क्षेत्र में स्थित माँ काली की यह प्रतिमा ‘मन्नत वाली माता जी’ के नाम से प्रसिद्ध है, जहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
