Janmashtami Bhog: जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की पूजा में उनके प्रिय भोग जरुर शामिल करना चाहिए.
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By : DB News Update | Edited By-सुप्रिया
Janmashtami : पौराणिक कहानियों के अनुसार कान्हा को बचपन से ही तरह-तरह के व्यंजन पसंद थे. जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए लोग 56 भोग (Kanha Chhapan Bhog) अर्पित करते हैं. भगवान कृष्ण के भोग में पारंपरिक व्यंजन होते हैं जिनकी कहानियां कान्हा के साथ जुड़ी होती हैं.
56 भोग में शामिल व्यंजन
भगवान का भोग पूरी तरह से सात्विक यानि बिना लहसुन-प्याज के बनाया जाता है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यंजन शामिल किए जाते हैं-
18 प्रकार की मिठाइयां- रसगुल्ला, जलेबी, रबड़ी, पेड़ा, मालपुआ, लड्डू आदि.
12 प्रकार के नमकीन व्यंजन- आलूबंडा, कचौरी, समोसा, मठरी, पापड़ आदि.
9 प्रकार के फल और मेवे- केला, सेब, अनार और सूखे मेवे (ड्राय फ्रूट्स) बादाम, काजू, मखाना, किसमिस आदि.
6 प्रकार के डेयरी उत्पाद- माखन, मिश्री, मलाई, दही, दूध, घी, पनीर.
6 प्रकार का अनाज के व्यंजन- खीर, चावल, दाल, कढ़ी, पूरी, कचौड़ी.
5 प्रकार के अन्य पवित्र अर्पण- तुलसी दल, शहद, पान, सुपारी, लौंग, इलायची आदि.
56 भोग के पीछे की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए लगातार 7 दिन और 7 रात अपनी सबसे छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था. शास्त्र में प्रमाण के रूप में बताया गया है कि इन 7 दिनों तक ब्रज के लाल कान्हा ने बिना कुछ खाए-पिए ब्रज की रक्षा की थी. जबकि माता यशोदा उन्हें दिन में 8 बार भोजन कराती थीं. इसी के चलते सात दिनों को प्रतिदिन के 8 भोजन से गुणा करने पर कुल 56 बार का भोजन बनता है. यानि 8 भोजन गुणा 7 दिन बराबर 56 प्रकार का व्यंजन. इसके पीछे प्रमुख रूप से इंद्र का अहंकार टूटने का रहस्य छिपा है. कथा आती है कि इंद्र ब्रजवासियों से रुष्ट होकर लगातार वर्षा शुरू कर दी थी. तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली में उठा लिया था. उसके बाद जब इंद्र का अहंकार टूटा और वर्षा रुकी, तो ब्रजवासियों ने कान्हा के प्रति आभार जताने के लिए प्रेमपूर्वक 56 अलग-अलग प्रकार के व्यंजन तैयार करके उन्हें अर्पित किया. तभी से यह परंपरा शुरू हो गई.
सुख-शांति आती है
ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति विधि पूर्वक जन्माष्टमी पर रात्रि काल में पूजन और श्रीकृष्ण को उनके प्रिय भोग चढ़ाता है उसके घर में सुख-शांति आती है और जीवन में सफलता भी मिलती है. जानें जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को कौन सा भोग लगाएं.
एल्यूमिनियम, लोहे, स्टील बर्तनों से करें परहेज
भगवान को हमेशा चांदी, मिट्टी, पीतल या फिर सोने के बर्तन में ही भोग लगाना चाहिए। भगवान को भोग लगाने के लिए कभी भी एल्यूमिनियम, लोहे, स्टील आदि बर्तनों का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा आप खुद के बनाए गए भोजन का भी भोग लगा सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि लहसुन-प्याज के बौगर वाला ही भोजन का भोग लगाएं।
श्रीकृष्ण के 5 प्रिय भोग
पंचामृत –
जन्माष्टमी का त्योहार कान्हा का जन्म दिवस माना जाता है. इस दिन उनका पंचामृत से अभिषेक करें और दूध, दही, घी, शहद, शक्कर मिलाकर पंचामृत का भोग लगाएं. मान्यता है इससे परिवार में मिठास बनी रहती है. भोग में तुलसी दल जरुर डालें.
आटे या धनिए की पंजीरी –
जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की पूजा में आटे या धनिए की पंजीरी भोग में शामिल करें. माखन-मिश्री के अलावा कान्हा को धनिया पंजीरी बेहद पसंद है.
खीरा –
बाल गोपाल के जन्मोत्सव के दौरान खीरा जरुर चढ़ाना चाहिए. जन्माष्टमी की रात खीरा काटकर लड्डू गोपाल का जन्म कराया जाता है. जैसे बच्चे को मां के गर्भ से अलग करने के लिए गर्भनाल को काटा जाता है, ठीक उसी प्रकार डंठल वाले खीरे को भगवान श्री कृष्णका गर्भनाल मानकर उसे काटा जाता है.
मखाने की खीर –
कहा जाता है कि मैय्या यशोदा अपने लल्ला को प्यार से खीर खिलाती थी. मान्यता है जन्माष्टमी पर खीर का भोग लगाने से संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है. मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है
माखन मिश्री –
श्रीकृष्ण को जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री का प्रसाद चढ़ाए. इसमें केसर जरुर डालें. मान्यता है ऐसा करने पर विवाह में आ रही परेशानियां खत्म होती है. शादी के योग बनते हैं.
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