कुंभ मेले में आएंगे 13 अखाड़ों के साधु-संत, लंबे समय तक त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर और आसपास लगा रहेगा मेला
Source : DB News Update
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Nashik Kumbh 2027: नासिक त्र्यंबकेश्वर शिव मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है. यहां कुंभ आयोजन की तिथियां घोषित हो चुकी हैं. नासिक में पिछला सिंहस्थ कुंभ मेला 2015-16 में आयोजित किया गया था. अब यहां 2027 में कुंभ मेले का आयोजन किया जाएगा. इसके लिए धर्म संसद ने प्रमुख स्नान की तिथियां और अमृत स्नान की तारीख निश्चित कर दी है. प्रशासनिक स्तर पर कुंभ की तैयारियां भी प्रारंभ कर दी गई हैं. महाराष्ट्र सरकार ने कुंभ में आने वाले संतोंं और अखाड़ों को फंड भी देगी. बताया जा रहा है बिजली और पानी पूरी तरह से मुफ्त रहेगा. इसके अलावा जमीन का अधिग्रहण भी सरकार ही करेगी. इन सभी तैयारियों को लेकर मेला प्राधिकरण बनाया गया है.
इन चार स्थानों पर होता है कुंभ
भारत में चार स्थानों में कुंभ मेले का आयोजन होता है. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, उत्तराखंड के हरिद्वार, महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के उज्जैन में कुंभ होता है. हर तीन साल में इनमें से किसी भी स्थान पर एक कुंभ मेले का आयोजन होता है. 12 साल में आयोजित होने वाला कुंभ मेला पूर्ण कुंभ के नाम से जाना जाता है और छह साल में अर्ध कुंभ आयोजित होता है.
कहां कब है कुंभ मेला
- नासिक में 2027 में कुंभ मेला आयोजित होगा.
- उज्जैन में 2028 में कुंभ मेला लगेगा.
- हरिद्वार में 2033 में अगला पूर्ण कुंभ मेला आयोजित होगा.
- प्रयागराज में 2031 में कुंभ मेला आयोजित होगा.
किन नदियों के तट पर आयोजित होता है कुंभ?
- नासिक कुंभ मेला – गोदावरी नदी के तट पर
- हरिद्वार कुंभ मेला- गंगा के तट पर
- उज्जैन सिंहस्थ कुंभ- क्षिप्रा नदी के किनारे
- प्रयागराज कुंभ- गंगा-यमुना और अदृश्य नदी सरस्वती के संगम पर
किस संप्रदाय के कितने अखाड़े
- वैष्णव संप्रदाय के अखाड़े
निर्वाणी अनी अखाड़ा
निर्मोही अखाड़ा
दिगंबर अखाड़ा - शैव संन्यासी संप्रदाय के अखाड़े
जूना अखाड़ा
अग्नि अखाड़ा
आवाहन अखाड़ा
महानिर्वाणी अखाड़ा
निरंजनी अखाड़ा
आनंद अखाड़ा पंचायती
श्रीशंभू पंचायती अटल अखाड़ा
उदासीन संप्रदाय के अखाड़े
बड़ा उदासीन अखाड़ा
नया उदासीन अखाड़ा
निर्मल अखाड़ा
साधु ग्राम में सजेंगी तंबू नगरी
कुंभ मेले के दौरान शैव, वैष्णव और उदासीन संप्रदाय के सभी 13 अखाड़ों के साधु-संतों, महामंडलेश्वरों और नागा बाबाओं के लिए अलग-अलग सेक्टर्स में जमीन आवंटित की जाएगी. यहाँ विशाल वाटरप्रूफ पांडाल, यज्ञशालाएं और प्रवचन पंडाल तैयार किए जाएंगे. इन पंडालों में अखाड़े का ध्वजारोहण किया जाएगा. साधु ग्राम में पांडालों के सजने के बाद अगस्त 2027 में अखाड़ों का पारंपरिक धर्म-ध्वजारोहण होगा, जिसके साथ ही संतों के छावनी प्रवेश की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी.
महाराष्ट्र सरकार की वित्तीय मदद व सुविधाएं
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्रियों की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में संतों की सुविधाओं के लिए बड़े फैसले लिए गए हैं. बताया जा रहा है कि अखाड़ों के लिए विशेष फंड का प्रबंध किया जाएगा. कुंभ मेले की तैयारियों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रत्येक बड़े अखाड़े को ₹5 करोड़ और छोटी स्थानीय धार्मिक संस्थाओं को ₹15 लाख का अनुदान देने की मंजूरी दी गई है.
मुफ्त रहेगी बिजली और पानी
साधु-संतों के पांडालों में उपयोग होने वाली बिजली का बिल पूरी तरह माफ रहेगा, जिसका भुगतान सीधे मेला प्राधिकरण करेगा. इसके साथ ही स्वच्छ पेयजल की चौबीसों घंटे आपूर्ति की जाएगी. इसके अलावा साधु ग्राम के विस्तार और मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकार ने ₹267 करोड़ के फंड को मंजूरी दी है. प्रयागराज महाकुंभ के अनुभवों के आधार पर यहाँ आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पक्के रास्तों का निर्माण किया जा रहा है.
अखाड़ों के स्नान की व्यवस्था
इस बार नासिक कुंभ में संतों के स्नान को ‘शाही स्नान’ के बजाय आधिकारिक तौर पर “अमृत स्नान” नाम दिया गया है. बताया जा रहा है कि वैष्णव अखाड़े जो भगवान विष्णु के अनुयायी (अणि अखाड़े) हैं, वे नासिक शहर के प्रसिद्ध रामकुंड पर अपने पांडालों से भव्य पेशवाई (जुलूस) निकालकर अमृत स्नान करेंगे. वहीं शैव अखाड़े जो नागा साधुओं सहित भगवान शिव के अनुयायी (शैव अखाड़े) हैं, वे ज्योतिर्लिंग क्षेत्र त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त कुंड में पवित्र स्नान अनुष्ठान संपन्न करेंगे.
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