भोलेनाथ की आरधना करने वालों के मनोरथ पूर्ण करने वाला प्रमुख दिन साल 2025 महाशिवरात्रि कब मनाई जाएगी ?
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Mahashivratri 2025 : हर चंद्र मास का चौदहवां दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है लेकिन देवों के देव महादेव का सबसे प्रिय पर्व ‘शिव की महान रात्रि’ अर्थात महाशिवरात्रि फाल्गुन माह में मनाई जाती है.
पुराणों, वेदों और हिन्दू धर्म शास्त्रों में भगवान शिव के महात्म्य का वर्णन किया गया है. कहा जाता है कि महाशिवरात्रि की रात भोलेनाथ शिवलिंग में वास करती है. इस दिन की गई शिव आराधना समस्त संकटों का नाश करती है. महाशिवरात्रि 2025 में कब है, क्या है पूजा का मुहूर्त आइए जानते हैं.
महाशिवरात्रि 2025 डेट
महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी. इस दिन भोले के भक्त इस दिन भगवान शिव और आदिशक्ति की दिव्य शक्तियां एक साथ आती हैं. महाशिवरात्रि से सम्बंधित कई पौराणिक मान्यताएं हैं.
महाशिवरात्रि पर पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भोलेनाथ माता पार्वती के साथ धरती पर आते हैं. इस दिन शिवजी और गौरी जी की विधिपूर्वक और सच्चे मन से पूजा करने से कई गुना अधिक शुभ फलों की प्राप्ति होती है. इस दिन काशी, उज्जैन, हरिद्वार समेत अन्य शिव तीर्थस्थलों पर महाशिवरात्रि पूजा की खास रौनक रहती है. महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखने और पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. यदि आप ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने न जा पाएं तो अपने आसपास के शिवालय में जाकर शिव जी का दर्शन लाभ अवश्य प्राप्त करें, जिससे आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी.
महाशिवरात्रि 2025 मुहूर्त
निशिता काल पूजा समय – देर रात 12:09 – प्रात: 12:59, फरवरी 27
शिवरात्रि पारण समय – प्रात: 06:48 – प्रात: 08:54 (27 फरवरी 2025)
महाशिवरात्रि 2025 चार प्रहर मुहूर्त
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि शुरू – 26 फरवरी 2025, सुबह 11.08
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि समाप्त – 27 फरवरी 2025, सुबह 8.54
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – शाम 06:19 – रात 09:26
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – रात 09:26 – प्रात: 12:34, 27 फरवरी
रात्रि तृतीया प्रहर पूजा समय – प्रात: 12:34 – प्रात: 03:41, 27 फरवरी
रात्रि चतुर्थी प्रहर पूजा समय – प्रात: 03:41 – प्रात: 06:48, 27 फरवरी
महाशिवरात्रि की रात क्यों है खास
इस रात, ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य भीतर ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से ऊपर की और जाती है. यह एक ऐसा दिन है, जब प्रकृति मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद करती है.
महाशिवरात्रि के दिन सबसे शक्तिशाली मंत्र
मंत्र: ॐ नमः शिवाय
अर्थ: “मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ।”
पंचाक्षरी मंत्र: इस मंत्र में पाँच अक्षर (न, म, शि, वा, य) होते हैं. ये पाँच अक्षर सृष्टि के पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का प्रतीक हैं.
प्रभावशील मंत्र: यह भगवान शिव का सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र है, जिसका जाप कोई भी व्यक्ति आसानी से कर सकता है.
कृपा की प्राप्ति : नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और महादेव की असीम कृपा प्राप्त होती है.
इसके अलावा, संकटों और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए महामृत्युंजय मंत्र –
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
भी अत्यंत शक्तिशाली और प्रिय माना गया है.
शिवलिंग पर चढ़ाने की सामग्री
जल
कच्चा दूध
गंगाजल
बेल पत्र
चंदन
अक्षत
भांग, धतुरा
सफेद फूल, आक
घी
शहद
फल
मिश्री या चीनी
शमी के फूल या पत्ता
जौ
तिल
शिवलिंग पर क्या अर्पित नहीं करें?
तुलसी के पत्ते
सिंदूर
हल्दी
कटा-फटा, धारीदार वाले बेलपत्र
केतकी के फूल
शिवलिंग पूजा विधि
- शिवलिंग पर सबसे पहले तांबे के लोटे से जल या गंगाजल धीरे-धीरे चढ़ाएं.
- इसके बाद दूध, दही, शहद, घीर और चीनी चढ़ाएं.
- फिर शुद्ध जल या गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक करें.
- अब शिवलिंग पर चंदन अर्पित करें.
- इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, शमी के पत्ते, भाग आदि चीजें शिवलिंग पर अर्पित करें.
- शिवलिंग पर बेलपत्र का चिकना भाग रखें.
- शिवलिंग के पास धूप, दीप जलाएं और फल, मिश्री का भोग लगाएं.
- शिव चालीसा का पाठ करें और मंत्रों का जाप करें.
- पूजा का समापन आरती के साथ करें.
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