उत्पन्ना के बाद अब मोक्षदा एकादशी 20 दिसंबर 2026 को है. ये व्रत मोक्ष प्राप्ति की कामना से किया जाता है.
Source : DB News Update
By : एस्ट्रोलॉजर पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Mokshada Ekadashi 2026: हिंदू मान्यता के अनुसार कलियुग में मोक्ष प्राप्ति की कामनापूर्ति के लिए एकादशी व्रत करने का विधान बतलाया गया है. इसी कारण हिंदू धर्म को मानने वाले लोग एकादशी व्रत करते हुए बताए गए नियमों का पालन करते हैं. एकादशी व्रतधारी विशेष रूप से मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष पर पड़ने वाली एकादशी का विशेष ध्यान रखते हैं. क्योंकि इसे मोक्षदा एकादशी कहा गया है, इस साल मोक्षदा एकादशी 20 दिसंबर 2026 को पड़ रही है.
इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है. इस एकादशी के नाम में ही मोक्ष है, पुराणों में वर्णित है कि मोक्षदा एकादशी के दिन जो जातक भगवान विष्णु का पूजन और व्रत करता है, उनके लिए बैकुंठ के द्वार खुले रहते हैं.
मोक्षदा एकादशी 2026 मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी 19 नवंबर को रात 04 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगी, 20 दिसंबर को दोपहर 02 बजकर 44 मिनट पर इसका समापन होगा.
एकादशी तिथि प्रारम्भ – दिसम्बर 19, 2026 को 04:39 पी एम बजे
व्रत की तिथि: 20 दिसंबर 2026, रविवार (मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी)
पारण (व्रत तोड़ने का) समय: 21 दिसंबर 2026, सोमवार (सूर्योदय के बाद)
क्यों मनाई जाती है मोक्षदा एकादशी ?
वैदिक पुराणों में वर्णित है कि मोक्ष उसी व्यक्ति को मिलता है जिसे कर्म अच्छे हों, धार्मिक आचरण अपनाने वालों को मृत्यु के बाद जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है. ऐसे में मोक्षदा एकादशी वो व्रत है जिसके फलस्वरूप व्यक्ति अपने पाप कर्म से मुक्ति पाकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है. यही वजह है कि मोक्षदा एकादशी व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.
क्या वास्तव में इस व्रत से मिलता है मोक्ष?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत अन्य सभी एकादशियों में बेहद खास माना जाता है. कथा आती है कि राजा वैखानस ने अपने नरक भोग रहे पिता की मुक्ति के लिए यह व्रत किया था और इसके पुण्य को पिता को दान कर उन्हें मोक्ष दिलाया था. यह एकमात्र ऐसी एकादशी है जिसका फल दूसरों (जैसे मृत पूर्वजों) को समर्पित किया जा सकता है. यह व्रत मानसिक और शारीरिक अशुद्धियों को दूर कर मनुष्य के संचित पापों का नाश करता है, जिससे आत्मा जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर विष्णुलोक (मोक्ष) को प्राप्त करती है.
एकादशी पर कौन से शुभ काम करें ?
- एकादशी की सुबह तुलसी को जल चढ़ाएं और सूर्यास्त के बाद घर के आंगन में तुलसी के पास दीपक जलाएं. इस दिन तुलसी का स्पर्श नहीं करना चाहिए.
- सुबह पूजा में गीता का पाठ करें, क्योंकि मोक्षदा एकादशी पर गीता जयंती भी मनाई जाती है. पूरे ग्रंथ का पाठ करना संभव न हो तो अपने समय के अनुसार कुछ अध्यायों को पाठ कर सकते हैं.
- एकादशी पर किसी गौशाला जाएं और गायों की देखभाल के लिए धन का दान करे.गायों को हरी घास खिलाएं. ये व्यक्ति को हर पाप से मुक्ति दिलाने का कारगर उपाय है.
मोक्षदा एकादशी क्या है? परंपरा को सही संदर्भ में समझें
एकादशी-व्रत वैष्णव परंपराओं में महत्वपूर्ण है, लेकिन उपवास की कठोरता, पारण और पूजा-विधि परिवार व संप्रदाय के अनुसार बदल सकती है. मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी है. विष्णु-उपासना और एकादशी-व्रत की विधि स्थानीय पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है. यहां शास्त्रीय उल्लेख, मंदिर-परंपरा, पारिवारिक विधि और लोक-परंपरा को एक-दूसरे के स्थान पर नहीं रखा गया है.
मोक्षदा एकादशी की परंपराएं
क्षेत्र और परिवार के अनुसार इस पर्व को मनाने का अलग-अलग तरीका है. भारत में एक ही पर्व का पालन क्षेत्रीय भाषा और संप्रदायिक परंपराओं में अलग रूप से मनाया जाता है. मोक्षदा एकादशी के मामले में भी भोजन, व्रत, पूजा-सामग्री, कथा और मंदिर-आयोजन में अंतर मिल सकता है.
मोक्षदा एकादशी की पूजा सामग्री
- इस पर्व के लिए पूरे भारत में एक जैसी अनिवार्य सामग्री-सूची मानना उचित नहीं है. परिवार की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है.
सामान्य सामग्री
दीपक - पुष्प
- स्वच्छ जल
- तुलसी-पत्र जहां परंपरा में उपयोग हो
- फल
- सात्त्विक नैवेद्य
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
