पितृपक्ष में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध के जरिए पितरों को श्रद्धांजलि दी जाती है. जो लोग इस समय श्राद्ध नहीं करते उन्हें जीवन में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
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By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : Supriya
Pitru Paksha: ज्योतिष के अनुसार, जो लोग पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध नहीं करते हैं, उनके जीवन में पितृ दोष उत्पन्न हो जाता है, पितृ दोष पूरे परिवार की खुशहाली और समृद्धि पर नकारात्मक असर डालता है, पितृपक्ष में श्राद्ध न करने वालों को इन परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सांसारिक यात्रा समाप्त कर मृत्यु (Death) के बाद पूर्वज परलोक पहुंचते हैं. शास्त्रों में बताया गया है कि, परलोक में न ही अन्न होता है और ना ही जल. ऐसे में पुत्र-पौत्रादि जब पितरों का तर्पण और श्राद्ध करते हैं तो इससे पितृ संतुष्ट होते हैं और अपने वंश को फलने-फूलने का आशीर्वाद देते हैं.
पितृपक्ष में पितरों को अपने वंशों से आशा रहती है कि वे उनका श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान करेंगे और इसी आशा के साथ आश्विन मास में पितृपक्ष के समय पितृ धरती पर आते हैं. ऐसे में जब पितरों का श्राद्ध नहीं होता तो वे बहुत दुखी होकर और श्राप देकर वापस अपने लोक लौट जाते हैं.
पितृपक्ष के समय जो लोग अपने मृत पूर्वजों का श्राद्ध नहीं करते उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं और जीवनभर परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
आइये जानते हैं श्राद्ध न करने पर क्या होता है?
पितृदोष लगता है:-
पितरों का श्राद्ध न करने पर पितृदोष लगता है. क्योंकि श्राद्ध-तर्पण न करने से पितृ अतृप्त रहते हैं और वे अपने वंशों को आशीर्वाद देने के बजाय कष्ट पहुंचाते हैं.
निरोगी या वीर संताने जन्म नहीं लेती:-
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, जिस कुल में श्राद्ध नहीं होता है. वहां दीर्घायु, निरोगी या वीर संताने जन्म नहीं लेती हैं. साथ ही ऐसे परिवार में मंगल कार्य नहीं होते.
झूठे आरोपों में फंस जाते हैं :-
साथ ही जो लोग पितरों का श्राद्ध या तर्पण नहीं करते हैं वह हमेशा ही बिना गलती के झूठे आरोपों में फंस जाते हैं, जिसका अपमान उन्हें जीवनभर झेलना पड़ता है. ऐसे लोगों को समाज में कभी सम्मान नहीं मिलता.
संतान पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है :-
पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म न करने का बुरा प्रभाव न सिर्फ आपके जीवन पर बल्कि संतान पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. इतना ही नहीं आने वाली पीढ़िया भी इससे प्रभावित होती हैं और इसका बुरा फल उन्हें भी झेलना पड़ता है.
आर्थिक तंगी से जूझना पड़ता है
पितृ दोष के कारण व्यक्ति के पास जीवनभर धन की कमी रहती है, उसे आर्थिक अस्थिरता, रोजमर्रा की परेशानियाँ और कंगाली का सामना करना पड़ सकता है, घर में कभी मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है.
परिवार में अशांति और कलह
यदि पितर संतुष्ट नहीं होते और कुंडली में पितृ दोष होता है, तो परिवार में कलह, झगड़े और तनाव का वातावरण रहता है, ऐसे परिवारों की सफलता और तरक्की रुक जाती है, जीवन में कठिनाइयाँ और विफलताएँ बढ़ने लगती हैं.
संतान संबंधी परेशानियाँ
पितृ दोष संतान से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ाता है, गर्भधारण में कठिनाई, संतान की उन्नति में रुकावट और दुर्घटना का खतरा बना रहता है, संतान का भविष्य अस्थिर हो सकता है.
स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ
जिनकी कुंडली में पितृ दोष होता है, वे अक्सर बीमार रहते हैं, घर में आए दिन कोई न कोई बीमार ही रहता है, बच्चों, बुजुर्गों और पूरे परिवार की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
खुशहाली के लिए पितृ दोष खत्म करें
सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण- अगर किसी वजह से आप अपनी निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाए हैं, तो पितृपक्ष के आखिरी दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण या पिंडदान कर सकते हैं. इस दिन सभी पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा मानी जाती है.
ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन- अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं. इसके साथ ही अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य जरूरी चीजों का दान भी किया जा सकता है. पितृपक्ष में सेवा और दान को भी पुण्यकारी माना जाता है.
काले तिल मिलाकर जल अर्पण- अगर आपको श्राद्ध की विस्तृत विधि नहीं आती है, तो भी आप सरल तरीके से पितरों का तर्पण कर सकते हैं. इसके लिए सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल लें और उसमें काले तिल मिलाएं. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करें.
पितरों से क्षमा मांगकर करें स्मरण- अगर आप किसी मजबूरी के कारण श्राद्ध नहीं कर पा रहे हैं, तो खुले आकाश के नीचे हाथ जोड़कर अपने पितरों का स्मरण करें और अपनी असमर्थता के लिए उनसे क्षमा प्रार्थना करें. इसके साथ ही इन दिनों श्रीमद्भगवद्गीता या भागवत का पाठ और स्मरण करना भी शुभ माना जाता है.
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