Radha Ashtami: राधाष्टमी पर राधा-कृष्ण की पूजा का खास महत्व है, मान्यता है इससे जीवन में सुख और मनचाहा वरदान मिलता है.
Source : DB News Update
By : डीबी न्यूज अपडेट \ Edited By : सुप्रिया
Radha Ashtami: हिंदी पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बरसाने समेत पूरे ब्रज में धूमधाम से राधाष्टमी का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 19 सितंबर दिन शनिवार को है. इस दिन राधा रानी की पूजा और कुछ विशेष उपाय कर लिए जाएं तो मनचाहा वरदान मिलता है, श्रीकृष्ण की कृपा बरसती है. कहते हैं राधाष्टमी की पूजा के बिना कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा का फल प्राप्त नहीं होता.
राधा अष्टमी पर पूजा मुहूर्त
राधाष्टमी पर राधा जी की पूजा का मुहूर्त 19 सितंबर को सुबह 11.01 से दोपहर 01.28 के बीच रहेगा. राधा रानी की उपासना से श्रीकृष्ण बेहद प्रसन्न होते हैं.
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि
अष्टमी तिथि की शुरुआत: 18 सितंबर 2026 को दोपहर 1:02 बजे
अष्टमी तिथि का समापन: 19 सितंबर 2026 को दोपहर 3:28 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त (मध्याह्न काल): सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक
राधाष्टमी के उपाय
- जिन लड़कियों के विवाह में दिक्कतें आ रही है वह राधाष्टमी पर देवी राधा को गुलाब का फूल अर्पित करें और फिर ऊं ह्रीं श्री राधिकायै नम: मंत्र का 108 बार जाप करें. मान्यता है इससे शीघ्र विवाह के योग बनते हैं.
- जो लोग अपनी पसंद की लड़की या लड़के से शादी करने की इच्छा रखते हैं लेकिन इसमें बाधा आ रही है वो राधा अष्टमी के दिन भोजपत्र पर चंदन की स्याही से अपने प्रेमी-प्रेमिका का नाम लिखें और फिर उसे राधा-कृष्ण के मंदिर में अर्पित कर दें. कहते हैं मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना जल्द पूर्ण होती है.
- राधा अष्टमी पर राधा-रानी और श्रीकृष्ण को मालपुआ या रबड़ी का भोग जरुर लगाना चाहिए. मान्यता है इससे वैवाहिक जीवन में मिठास बढ़ती है. पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है.
- राधा अष्टमी के दिन गुप्त रूप से तिल का दान करें. कहते हैं ये उपाय ग्रह दोष के कारण विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करता है. कुंवारी लड़कियों को इस दिन श्रृंगार की वस्तुएं और सुगंधित इत्र का दान करना चाहिए. इससे शुक्र मजबूत होता है.
- राधाष्टमी के दिन स्त्रियां खासकर राधा रानी को कुमकुम, हल्दी, अक्षत और वैजयंती का फूल चढ़ाएं. ये उपाय सुख-समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करता है.
राधा अष्टमी पर रखें इन बातों का ध्यान
- राधा अष्टमी के दिन देवी राधा और श्रीकृष्ण को घर में बनाए हुए पकवान का भोग लगाएं.
- भूलकर भी इस दिन तामसिक भोजन न करें.
- इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें.
- इस दिन किसी से भी किसी प्रकार का वाद-विवाद और किसी के बारे में बुरा बोलने से बचें.
राधारानी के प्रिय भोग
राधाष्टमी के अवसर पर राधारानी को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल और सात्विक व्यंजन अर्पित करने की परंपरा है. ब्रज की भक्ति परंपरा में कुछ भोग विशेष रूप से लोकप्रिय माने जाते हैं.
माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी – राधा-कृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाने की परंपरा प्रसिद्ध है.
अरबी – राधा रानी को अरबी का भोग लगाना अति प्रिय माना जाता है.
मालपुआ – ब्रज के कई मंदिरों में मिष्ठान के रूप में अर्पित किया जाता है.
खीर – दूध और चावल से बनी खीर का भोग लगाया जाता है.
मिश्री और दूध – सरल सात्विक भोग के रूप में.
पेड़ा और रबड़ी – विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र की पूजा परंपरा में लोकप्रिय.
लड्डू – बेसन, बूंदी या अन्य सात्विक सामग्री से बने लड्डू चढ़ाए जा सकते हैं.
फल – केला, सेब, अंगूर, अनार, नारियल आदि मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं.
मेवे – बादाम, काजू, किशमिश और मखाने जैसे सूखे मेवे.
पंचामृत – दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत पूजा में महत्वपूर्ण माना जाता है.
तुलसी दल – राधा-कृष्ण की पूजा में तुलसी अर्पित करने की परंपरा भी है.
फल और मेवे के साथ पंचामृत का प्रसाद
अगर आप घर पर सरल तरीके से भोग लगाना चाहते हैं तो केला, सेब, अनार, अंगूर, नारियल जैसे मौसमी फल अर्पित कर सकते हैं. इसके साथ बादाम, काजू, किशमिश और मखाने भी रखे जा सकते हैं. इसके अलावा पूजा में पंचामृत भी अर्पित किया जाता है. दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत को पूजा के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है.
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