माता रानी इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही है. ऐसे में ज्योतिषाचार्य से जानिए नवरात्रि से जुड़ी तमाम जानकारियां.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Shardiya Navratri 2026: हिंदू धर्मावलंबियों के आराधना का पर्व शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा पूजा 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होने जा रहा है. 19 अक्टूबर 2026 को दुर्गा नवमी के साथ नवरात्रि का समापन भी होगा. विजयादशमी (दशहरा) 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा.
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि इस बार घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त 11 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह 06:31 बजे से सुबह 10:27 बजे तक है. वहीं प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 10 अक्टूबर 2026 को रात 09:19 बजे से प्रारंभ हो जाएगी जो 11 अक्टूबर 2026 को रात 09:30 बजे समाप्त होगी.
9 दिनों का कैलेंडर और शुभ रंग
2026 में साल नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के स्वरूपों की पूजा और उनके लिए निर्धारित नवरात्रि के कलर की सूची नीचे दी गई है-
दिन व तिथि देवी का स्वरूप विशेष तिथि / पर्व शुभ रंग
11 अक्टूबर 2026 (रविवार) मां शैलपुत्री घटस्थापना / कलश स्थापना नारंगी (Orange)
12 अक्टूबर 2026 (सोमवार) मां ब्रह्मचारिणी द्वितीया पूजा सफेद (White)
13 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) मां चंद्रघंटा तृतीया पूजा लाल (Red)
14 अक्टूबर 2026 (बुधवार) मां कूष्मांडा चतुर्थी पूजा रॉयल ब्लू (Royal Blue)
15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) मां स्कंदमाता पंचमी पूजा पीला (Yellow)
16 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) मां कात्यायनी षष्ठी पूजा हरा (Green)
17 अक्टूबर 2026 (शनिवार) मां कालरात्रि सप्तमी पूजा स्लेटी / ग्रे (Grey)
18 अक्टूबर 2026 (रविवार) मां महागौरी दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी) बैंगनी / पर्पल (Purple)
19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) मां सिद्धिदात्री महानवमी / व्रत पारण मयूर हरा (Peacock Green)
20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) विजयदशमी (दशहरा) दुर्गा विसर्जन
इस साल हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा की मानें तो इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू हो रहे हैं, जिसमें मां दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व बतलाया गया है. ये वाहन नवरात्रि के प्रारंभ होने वाले दिन (वार) पर निर्भर करता है. इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है. इस कारण मां दुर्गा गज पर सवार होकर आएंगी.
क्यों ज्ञान का प्रतीक हैं मां दुर्गा
नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार को होती है, तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं. हाथी को सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है.
ऐसे में हाथी पर सवार होकर मां दुर्गा के आने से देश और समाज में सुख-समृद्धि और उन्नति के योग बनेंगे.
शनिवार या मंगलवार को नवरात्रि शुरू हो तो मां का वाहन अश्व (घोड़ा) पर, गुरुवार या शुक्रवार को डोली में और बुधवार को नौका से देवी मां दुर्गा का आगमन होता है. हिंदू शास्त्र में देवी के वाहनों के अलग-अलग फल बताए गए हैं.
नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त
- अमृत मुहूर्त : सुबह 6.19 से 7.49 बजे तक
- शुभ मुहूर्त : सुबह 9.14 से 10.49 बजे तक,
- अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11.55 से 12.43 बजे तक रहेगा
कलश स्थापना
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि, नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व है. कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है. नवरात्रि की शुरुआत घट स्थापना के साथ ही होती है. घट स्थापना शक्ति की देवी का आह्वान है.
मान्यता है कि गलत समय में घट स्थापना करने से देवी मां क्रोधित हो सकती हैं. रात के समय और अमावस्या के दिन घट स्थापित करने की मनाही है. घट स्थापना का सबसे शुभ समय प्रतिपदा का एक तिहाई भाग बीत जाने के बाद होता है.
अगर किसी कारणवश आप उस समय कलश स्थापित न कर पाएं, तो अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापित कर सकते हैं. प्रत्येक दिन का आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है. सामान्यत: यह 40 मिनट का होता है. हालांकि इस बार घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है.
कलश स्थापना की सामग्री
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि, मां दुर्गा को लाल रंग खास पसंद है, इसलिए लाल रंग का ही आसन खरीदें. इसके अलावा कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी भी चाहिए होते है.
कलश स्थापना कैसे करें?
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा को सुबह स्नान कर लें. मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद सबसे पहले गणेश जी का नाम लें और फिर मां दुर्गा के नाम से अखंड ज्योत जलाएं.
कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं. अब एक तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं. लोटे के ऊपरी हिस्से में मौली बांधें. अब इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं.
फिर उसमें सवा रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें. इसके बाद कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते लगाएं. अब एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांध दें. फिर नारियल को कलश के ऊपर रख दें.
अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीचों बीच रख दें जिसमें आपने जौ बोएं हैं. कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि के नौ व्रतों को रखने का संकल्प लिया जाता है. आप चाहें तो कलश स्थापना के साथ ही माता के नाम की अखंड ज्योति भी जला सकते हैं.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
