श्रावण मास में आपको कुछ विशेष चीजों से शिवलिंग का अभिषेक करने से आपके नव ग्रहों को शांत किया जा सकता है.
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By : DB News Update | Edited By- Supriya
Sawan Maas Navgrah Shanti Upay : हिन्दू पंचांग का सबसे पवित्र माह कहा जाने वाला सावन का महीना शुरू है. सावन के इस पवित्र महीने में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है.आज जबलपुर निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित संजय तिवारी ने हमें बता रहे हैं कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिनसे अभिषेक करना आपके लिए लाभदायक हो सकता है.
यदि आप सावन के महीने में कुछ विशेष चीजों से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं तो इससे नौग्रहों की शांति होगी और इससे आपके जीवन के सभी कष्ट दूर होंगे, क्योंकि 9 ग्रहों की मजबूती सुखमय जीवन प्रदान करती है.
भगवान शिव का अभिषेक की प्रक्रिया
प्लेटफ़ॉर्म तैयार करें- वेदी या उस स्थान को साफ करें जहां शिवलिंग स्थापित है. शिवलिंग को एक साफ चबूतरे पर स्थापित करें.
विभूति लगाएं- माथे पर त्रिपुंड्रम के रूप में विभूति लगाएं. त्रिपुंड्रम आपकी भौहों को पार नहीं करना चाहिए.
दीपक जलाएं- रुई की बत्तियों और तेल से दीपक जलाएं और “ॐ रुद्राय अग्नि मुर्तये नमः” का जाप करें.
अभिषेक शुरू करें- भगवान शिव को समर्पित प्रार्थनाओं या मंत्रों का जाप करके अनुष्ठान प्रारंभ करें. जाप करते समय, किसी पात्र या अपने हाथों का उपयोग करके शिवलिंग पर तरल पदार्थ अर्पित करना शुरू करें.
बिल्व पत्र या विभूति रखें- अभिषेक पूरा होने के बाद शिवलिंग पर बिल्व पत्र रखें. शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग का सिरा खाली नहीं छोड़ा जा सकता.
विभूति और चंदन का लेप लगाएं- अभिषेक पूजा के बाद त्रिपुंड्रम पर विभूति लगाएं, फिर त्रिपुंड्रम की मध्य रेखा पर चंदन का पेस्ट लगाकर एक बिंदी बनाएं और उस बिंदी पर कुमकुम लगाएं.
सुगंधित जल- लिंगम पर गुलाब जल या सुगंधित जल छिड़कें ताकि उसमें मनमोहक खुशबू आ जाए.
अर्चना करें- इन फूलों और पत्तियों से शिवलिंग की अर्चना करें.
नैवेद्यम (भोजन अर्पण)- अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए, अपने द्वारा तैयार किए गए भोजन को काले बेर, अनार, नींबू, भारतीय बेर या लाल खजूर, अमरूद, नींबू, केला, आंवला, आम और कटहल जैसे फलों के साथ परोसें.
आरती- आरती (दीपक लहराने) के साथ अभिषेक पूजा का समापन करें.
आत्म प्रदक्षिणा- आत्म प्रदक्षिणा को 3, 5, 7, 9, 11 बार दोहराएं.
ये हैं 9 ग्रह और उनकी पूजा पद्धति
1. सूर्य ग्रह
यदि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है तो आप सावन की पूरे महीने प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं.
2. चंद्र ग्रह
यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा नीचे का है तो आप इसके लिए प्रतिदिन कच्चे दूध को काले तिल में मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें.
3. मंगल ग्रह
आपकी कुंडली में मंगल को मजबूत करने के लिए शिवलिंग का सावन के महीने में शहद से अभिषेक करें.
4. बुध ग्रह
इस ग्रह को शांत करने के लिए आपको श्रावण मास में हर रोज कच्चे दूध में कनेर के पीले फूल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना होगा.
5. गुरु ग्रह
यदि गुरु आपकी कुंडली में अशुभ स्थिति में है तो आप हर रोज पानी में पीला चंदन मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें.
6. शुक्र ग्रह
शुक्र धन और सुख का कारक है, इसे कुंडली में मजबूत बनाने के लिए आप सावन में हर रोज शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें.
7. शनि ग्रह
शनि के प्रकोप से बचने के लिए आपको कुंडली में शनि को शांत करना होगा. इसके लिए सावन में प्रति दिन गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करें.
8. राहु ग्रह
राहु को शांत करना भी जरूरी है. इसके लिए आपको श्रावण मास में हर रोज शिवलिंग पर भांग चढ़ाना होगी. इससे आपको लाभ मिलेगा.
9. केतु ग्रह
यदि आपकी कुंडली में केतु कमजोर है तो सावन के महीने में आप एक उपाय से इसे मजबूत कर सकत हैं. इसके लिए आपको सरसों के तेल से शिवलिंग का अभिषेक करना होगा.
रुद्राभिषेक करने की पवित्र वस्तुएं और उनके लाभ
जल (गंगाजल): सबसे पहले शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करें, इससे मानसिक शांति और सौभाग्य की वृद्धि होती है.
गाय का कच्चा दूध: शिव जी को दूध अर्पित करने से दीर्घायु (लंबी उम्र) मिलती है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं.
दही: दही से अभिषेक करने पर संतान सुख की प्राप्ति होती है और जीवन में स्थिरता आती है.
शहद: शहद चढ़ाने से जीवन के तमाम कष्ट और परेशानियां दूर होती हैं तथा वाणी में मधुरता आती है.
शुद्ध देसी घी: घी से अभिषेक करने पर वंश की वृद्धि होती है और शारीरिक दुर्बलता नष्ट होती है.
गन्ने का रस: इससे अभिषेक करने पर धन, लक्ष्मी और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है और दरिद्रता का नाश होता है.
इत्र (सुगंधित तेल): शिवलिंग पर इत्र या सुगंधित तेल अर्पित करने से भौतिक सुख-साधनों और भोग की प्राप्ति होती है.
चंदन का पानी: चंदन से अभिषेक करने पर मान-सम्मान, यश और मानसिक शीतलता प्राप्त होती है.
सरसों का तेल: विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय पाने और ग्रह बाधाओं (जैसे शनि दोष) को शांत करने के लिए सरसों के तेल से अभिषेक किया जाता है.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
