सावन महीने की शिवरात्रि बहुत खास और पूर्ण फल देने वाली है. शिवपुराण में भी इसका महत्व बताया गया है.
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By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Sawan Shivratri 2025 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाई जाती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहते हैं. हिंदू धर्म में शिवरात्रि को महत्वपूर्ण पर्व माना गया है. इस दिन भगवान शिव जी खास पूजा की जाती है, शिवलिंग कर रुद्राभिषेक-जलाभिषेक किया जाता है और भक्त व्रत भी रखते हैं. शिवरात्रि को लेकर ऐसी मान्यता भी है कि इस रात्रि शिव और शक्ति का मिलन होता है.
लेकिन सावन महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व है. इसे सावन शिवरात्रि कहा जाता है. क्योंकि सावन का पवित्र महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. ऐसे में सावन माह में शिवरात्रि की पूजा का फल कई गुणा बढ़ जाता है. सावन शिवरात्रि पर की गई पूजा-व्रत का शिव भक्तों को महाशिवरात्रि के समान फल प्राप्त होता है. इस दिन भक्त रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और पूजा-अराधना करते हैं.
सावन शिवरात्रि 2025 डेट
सावन शिवरात्रि की तिथि को लेकर भक्तों के बीच असमंजस की स्थिति है. बता दें कि इस साल 2025 में सावन शिवरात्रि बुधवार, 23 जुलाई को होगी. यह शुभ तिथि सावन महीने की के 14वें दिन पड़ती है. सावन महीने की शुरुआत 11 जुलाई से हो रही है.
सावन शिवरात्रि में चार प्रहर का महत्व
चतुर्दशी तिथि आरंभ 23 जुलाई को सुबह 04 बजकर 39 मिनट पर होगा, जिसका समापन अगले दिन 24 जुलाई को रात 02 बजकर 48 मिनट पर होगा. ऐसे में बुधवार 23 जुलाई 2025 को ही सावन शिवरात्रि रहेगी और इसी दिन रात्रि में भगवान शिव की पूजा की जाएगी. बता दें कि शिवरात्रि में रात्रि में चार प्रहर पूजा का महत्व होता है.
व्रत की विधि
शिवरात्रि के एक दिन पहले, मतलब त्रयोदशी तिथि के दिन, भक्तों को केवल एक समय ही भोजन ग्रहण करना चाहिए. शिवरात्रि के दिन, सुबह नित्य कर्म करने के पश्चात्, भक्त गणों को पुरे दिन के व्रत का संकल्प लेना चाहिए. संकल्प के दौरान, भक्तों को मन ही मन अपनी प्रतिज्ञा दोहरानी चाहिए और भगवान शिव से व्रत को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करने हेतु आशीर्वाद मांगना चाहिए. हिन्दु धर्म में व्रत कठिन होते है, भक्तों को उन्हें पूर्ण करने हेतु श्रद्धा व विश्वास रखकर अपने आराध्य देव से उसके निर्विघ्न पूर्ण होने की कामना करनी चाहिए.
तिथि और पूजा का शुभ समय
- निशिता काल पूजा समय 00:07 AM से 00:48 AM (कुल अवधि 41 मिनट)
- प्रथम प्रहर पूजा का समय 23 जुलाई 07:17 PM से 09:53 PM
- दूसरे प्रहर पूजा का समय 23 जुलाई 09:53 PM से 00:28 AM
- तीसरे प्रहर में पूजा का समय 24 जुलाई 00:28 AM से 03:03 AM
- चौथे प्रहर में पूजा का समय 24 जुलाई 03:03 AM से 05:38 AM
शिवरात्रि व्रत पारण टाइम शिवरात्रि व्रत पारण टाइम
सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर पूजा का महत्व
शिवरात्रि की पूजा रात्रि के समय एक बार या चार बार की जा सकती है. रात्रि के चार प्रहर होते हैं और हर प्रहर में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. महाशिवरात्रि के दिन चार प्रहर में भोलेनाथ और माता पार्वती की उपासना करने से व्यक्ति को विशेष फलों की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. साथ ही जातक को अक्षय पुण्य मिलता है.
शिवरात्रि पर ऐसे करें पूजा
- शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
- इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें.
- पूजा की जगह को गंगाजल से शुद्ध करें.
- शिवलिंग पर पहले जल और गंगाजल चढ़ाएं.
- इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें.
- अंत में साफ जल अर्पित करें.
- भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, चंदन, अक्षत और सफेद पुष्प चढ़ाएं.
- इसके बाद फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें.
- ‘ॐ नमः शिवाय’ और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें.
- शिव चालीसा का पाठ करें.
- भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें.
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