राजस्थान के जैसलमेर जिले की एक प्राईवेट बस में आग लगने से 20 लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है. जैसलमेर बस हादसे पर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दु:ख जताया है.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Jaisalmer Bus Fire Accident: राजस्थान के जैसलमेर जिले की एक प्राईवेट बस में आग लगने से 20 लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है. यह घटना आज मंगलवार (14 अक्टूबर) की दोपहर के सयम की बताई जा रही है. बस हादसे का भयावह मंजर देखने वालों ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आग की लपटों से घिरे लोग बुरी तरह से जख्मी थे. कई यात्री खून से लथपथ थे. उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया जा रहा था और दमकल कर्मी आग बुझाने में लगे थे.
महिलाओं के तन पर कपड़े तक नहीं बचे थे
प्रत्यक्षदर्शियों ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि महिलाओं के तन पर कपड़े तक नहीं थे. हालात इतने बुरे थे कि लोगों से कपड़े मांगकर महिलाओं पर डाले गए. कुछ देर बाद एंबुलेंस आई और महिला समेत अन्य घायलों एंबुलेंस में डालकर अस्पताल पहुंचाया गया.
प्रत्यक्ष दर्शिकयों की मानें तो 15 लोग सड़क पर बदहवास हालत में इधर उधर पड़े हुए थे. कोई पेड़ के नीचे बेसुध पड़ा था कोई सड़क पर पड़ा था. वो मंजर बड़ा ही दर्दनाक था. घायलों को सड़क से जा रहे लोग संभाल रहे थे और अस्पताल पहुंचाने में मदद कर रहे थे.
राज्यपाल-मुख्यमंत्री ने जताया शोक
वहीं इस हादसे को लेकर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हादसे पर शोक जताया है. शर्मा ने घटना को हृदयविदारक बताते हुए कहा कि घायलों के समुचित उपचार एवं प्रभावितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.
कहां हुआ हादसा
मीडिया को पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि बस जैसलमेर से जोधपुर जा रही थी तभी अपराह्न करीब तीन बजे थईयात गांव के पास उसके पिछले हिस्से से अचानक धुआं निकलने लगा और चालक ने बस को सड़क किनारे रोका. हालांकि कुछ ही पलों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया. स्थानीय निवासी और राहगीर मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य में मदद की. दमकल और पुलिस को सूचित किया गया और घायल यात्रियों को इलाज के लिए जैसलमेर के जवाहर अस्पताल ले जाया गया. आग लगने का कारण अभी पता नहीं चल पाया है. जैसलमेर के जिला कलेक्टर प्रताप सिंह ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की है और संबंधित अधिकारियों को तत्काल राहत एवं चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.
बस में आग लगने का कारण
फॉरेंसिक साइंस लैब की जांच रिपोर्ट में यह साफ हुआ था कि बस की छत पर अवैध रूप से लगाए गए एसी (AC) यूनिट और उसकी वायरिंग में शॉर्ट सर्किट होने की वजह से यह भयावह आग लगी थी. बस में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की गई थी. बताया जा रहा है कि बस में आपातकालीन द्वार (इमरजेंसी गेट) नहीं था और निकास के लिए केवल एक ही दरवाजा था. शॉर्ट सर्किट होने के बाद मुख्य दरवाजा भी लॉक हो गया और बस के भीतर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस भर गई, जिससे यात्रियों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिल सका.
मृतकों को शासन की ओर से सहायता
इस बड़ी लापरवाही के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बस मालिक, बॉडी निर्माता और ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया था. साथ ही, परिवहन विभाग के दोषी अधिकारियों को भी निलंबित किया गया था. केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से मृतकों के आश्रितों को 2-2 लाख रुपये तथा गंभीर घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने की घोषणा की गई थी.
बस में परिवहन नियमों की अनदेखी
बताया जा रहा है कि बस मूल रूप से गैर-एसी श्रेणी में पंजीकृत थी. आरटीओ से मंजूरी लिए बिना ही इसकी छत पर अवैध रूप से भारी एसी यूनिट और उसकी अस्थाई, घटिया वायरिंग लगा दी गई, जो बाद में शॉर्ट सर्किट का कारण बनी.
बस बॉडी कोड के तहत आपातकालीन निकास के सामने कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए. लेकिन इस बस में आपातकालीन खिड़की व दरवाजे के ठीक आगे दो अतिरिक्त सीटें फिट कर दी गई थीं, जिससे वह रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया.
बस का पिछला आपातकालीन दरवाजा निर्धारित मानकों से काफी छोटा था, जिससे आग लगने के बाद यात्री समय पर बाहर नहीं निकल सके.
स्लीपर केबिन और बस के आंतरिक हिस्से में सस्ते और अत्यधिक ज्वलनशील प्लास्टिक और फोम का इस्तेमाल किया गया था. इसी वजह से शॉर्ट सर्किट होते ही कुछ ही सेकंड में आग पूरी बस में फैल गई और जहरीली गैस भर ग.
नियमों के मुताबिक लंबी दूरी की कमर्शियल स्लीपर बसों में ‘फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम’ होना अनिवार्य है. इस बस में न तो धुआं पहचानने वाले सेंसर थे और न ही आग बुझाने के पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध थे.
बस की कुल लंबाई निर्धारित कानूनी सीमा से अधिक बढ़ाई गई थी. इसके अलावा, ड्राइवर केबिन और पैसेंजर सेक्शन के बीच अवैध रूप से ऐसा पार्टीशन (दीवार) बनाया गया था जिससे आपातकाल में आगे के रास्ते से भागना भी मुश्किल हो गया.
