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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > गुरु पूर्णिमा के बीज मंत्र को सिद्ध करने का बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें विधि
Religion

गुरु पूर्णिमा के बीज मंत्र को सिद्ध करने का बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें विधि

DB News
Last updated: 17/09/2026 9:22 PM
DB News
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9 Min Read
श्रावण मास में गुरु मंत्र सिद्ध करने का बन रहा शुभ योग
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गुरु पूर्णिमा के दिन जिन भक्तों ने गुरु मंत्र लिया है और बीज मंत्र भूल गए हैं, उनके लिए श्रावण मास के शुभ अवसर पर शुभ योग बन रहा है. गुरु मंत्र से हवन, जप करने से कैसे कंठस्थ होता है गुरु मंत्र यह सब जानें…

Source : DB News Update

Contents
गुरु पूर्णिमा के दिन जिन भक्तों ने गुरु मंत्र लिया है और बीज मंत्र भूल गए हैं, उनके लिए श्रावण मास के शुभ अवसर पर शुभ योग बन रहा है. गुरु मंत्र से हवन, जप करने से कैसे कंठस्थ होता है गुरु मंत्र यह सब जानें… शिव स्वरूप में गुरु को पूजने की मान्यतावेद व्यास जी की पूजा क्यों होती है?स्कंद पुराण में गुरु की महिमागुरु मंत्र को याद करना और उसके जप का महत्वश्रावण मास में गुरु मंत्र का जपगुरु पूर्णिमा पर क्यों की जाती है गुरु की पूजा?गुरु को क्या भेंट करें?गुरु पूर्णिमा पर कौन से रंग का वस्त्र धारण करें?गुरु कृपा प्राप्ति मंत्र – वेदव्यास जी का स्मरण मंत्र –गुरु बीज मंत्र कैसे याद करें?Gen Z के लिए शिक्षा लेने का माह है श्रावणकर्म पर ध्यान देंमेंटर की जरूरतसमय की कद्रसही संगति

Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जिन हिंदू धर्मावलंबियों ने गुरु पूजन किया है और इस अवसर पर गुरु मंत्र भी लिया है. इसके लिए श्रद्धालु गुरु पूजन करने की शुभ घड़ी रवि योग, शश महापुरुष राजयोग, हंस राजयोग, गुरु आदित्य राजयोग का इंतजार किया और उसके बाद गुरु मंत्र ग्रहण किया है. किसी कारणवश गुरु मंत्र जप करना ही भूल गया या फिर गुरु मंत्र की उपयोगिता ही नहीं समझी. ऐसे लोगों के लिए श्रावण माह अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है. क्योंकि कई लोग न तो गुरु के द्वारा दिए गए बीज मंत्र को सिद्ध करने की शुभ घड़ी जानने का प्रयास किया और न ही पूजन, हवन इत्यादि में गुरु मंत्र जप करने का प्रयास किया. ऐसे गुरु भक्त जो गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूजन के बाद गुरु मंत्र लिया है और उन्हें गुरु मंत्र विस्मृत हो गया है. ऐसे भक्तों के लिए श्रावण महीनें में गुरु मंत्र सिद्ध करने का शुभ योग बन रहा है. सभी के लिए गुरु मंत्र याद रखने और मंत्र सिद्ध करने के लिए सबसे अच्छा समय है. क्योंकि श्रावण मास में भगवान शंकर के समक्ष गुरु मंत्र का जप करने से भक्त की सभी ईच्छाओं की पूर्ति होती है. इन दिनों गुरु मंत्र का अपने आराध्य गुरु से पूछकर उच्चारण भी करने का विधान है. जो साधक के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है. आइए जानते हैं किस दिन भूले गुरु मंत्र को दूसरी बार याद करें और अपने बीज मंत्र को कैसे सिद्ध करें.

 शिव स्वरूप में गुरु को पूजने की मान्यता

2026 में गुरु पूर्णिमा पर 29 जुलाई को मनाया गया. चूंकि आषाढ़ पूर्णिमा को महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन गुरुजन की पूजा करने का विधान है. इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन वैदिक काल से ही माता पिता के अलावा गुरु को ईश्वर के समान पूजनीय माना जाता है. संसार के सबसे पहले गुरु भगवान शिव माने गए हैं. इस कारण श्रावण मास में गुरु और उनके दिए गए बीज मंत्र का जप करने का अच्छा समय है. शिवभक्ति में लीन भक्तों को गुरु मंत्र का जप करने से कई गुना फलों की प्राप्ति होती है.

वेद व्यास जी की पूजा क्यों होती है?

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा (Vyas Purnima) के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इसी तिथि पर महर्षि वेदव्यास का प्राकट्य हुआ था. उनके द्वारा वेदों का विभाजन किया गया, महाभारत, 18 पुराण तथा ब्रह्मसूत्र की रचना की गई. इसलिए इस दिन उन्हें आदि गुरु के रूप में स्मरण किया जाता है और उनका पादुका पूजन करने की मान्यता है.

स्कंद पुराण में गुरु की महिमा

ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः पूजामूलं गुरोः पदम्.

मन्त्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा॥

श्लोक का अर्थात – गुरु का स्वरूप ही ध्यान का आधार है, गुरु के चरण पूजा का मूल हैं. गुरु के वचन ही मंत्र हैं और गुरु की कृपा से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसलिए गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुजन को सम्मान पूर्वक पूजें और भेंट दें.

गुरु मंत्र को याद करना और उसके जप का महत्व

श्रावण मास में शिव पूजन के साथ-साथ गुरु पूजन और उनने बीज मंत्र को याद करने और जप करने का विशेष महत्व है. तुलसीदास जी महाराज की यह चौपाई- “प्रथम गुरु माता-पिता, दूजे गुरु शिक्षक जान. तीजे गुरु ईश्वर कहें, इन तीनों को मान” का यदि अर्थ समझें तो पहली पूजा गुरु माता, दूसरे पिता, तीसरे शिक्षक, चौथे आध्यात्मिक गुरु, पांचवें जगतगुरु जैसे वेद व्यास जी, भगवान शिव. इन पांचों का पूजन करने का विधान बताया गया है. श्रावण मास में गुरु मंत्र का जप करने सारी मनोकामनाओं की पूर्ति  होती है.

श्रावण मास में गुरु मंत्र का जप

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें.
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें.
  • सायंकाल शुभ मुहूर्त में शिव पूजन करें.
  • वेद व्यास जी का स्मरण करें और गुरु मंत्र का जप करें.
  • रात में चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करें और प्रार्थना के साथ व्रत का पारण करें.

गुरु पूर्णिमा पर क्यों की जाती है गुरु की पूजा?

गुरु को ज्ञान और सही मार्ग दिखाने वाला माना गया है, इसलिए इस दिन उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है.

गुरु को क्या भेंट करें?

अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पुस्तक, वस्त्र, फल, मिठाई या दक्षिणा भेंट कर सकते हैं.

गुरु पूर्णिमा पर कौन से रंग का वस्त्र धारण करें?

पीला या सफेद रंग शुभ और सकारात्मकता से जुड़ा माना जाता है.

गुरु कृपा प्राप्ति मंत्र – 

ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः पूजामूलं गुरोः पदम्। मन्त्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा॥

वेदव्यास जी का स्मरण मंत्र –

व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे। नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नमः॥

ॐ वेदाहि गुरु देवाय विद्महे परम गुरुवे धीमहि तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्

ॐ गुं गुरुभ्यो नम:

ॐ परमतत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम:

गुरु बीज मंत्र कैसे याद करें?

  • श्रावण मास में भगवान शिव का अभिषेक-पूजन के पश्चात गुरु मंत्र का जप अवश्य करना चाहिए.
  • गुरु मंत्र को 108 माला (मनके) से जाप करें.
  • शिव अभिषेक के पश्चात गुरु मंत्र से हवन अवश्य करना चाहिए.
  • गुरु मंत्र से अग्नि को आहुति देते समय स्वाहा का उच्चारण अवश्य करें.
  • रुद्राभिषेक की आरती में अपने इष्ट गुरु की आरती करना बिल्कुल भी न भूलें.

Gen Z के लिए शिक्षा लेने का माह है श्रावण

श्रावण के इस पावन महीने में आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) के लिए लाभकारी है. इन दिनों Gen Z शिक्षा के साथ-साथ सफलता की ऊंचाई तय करने के सूत्र भी मिलते हैं. आइए जानते हैं श्रावण माह में भगवान श्रीकृष्ण जन्म से लेकर गीता उपदेश के माध्यम से Gen Z को क्या सीख मिलती है और आचार्य चाणक्य ने सफलता की कुंजी के क्या मंत्र दिए हैं?

कर्म पर ध्यान दें

श्रीमद्भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण करते हैं: ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते…’ श्लोक के अनुसार कर्म करो, फल या शॉर्टकट की चिंता छोड़ों, पढ़ाई व काम पर फोकस करो.

मेंटर की जरूरत

भगवान शिव को भगवान राम ने गुरु स्वरुप में रामेश्वरम् में पूजन किया है. भगवान श्रीराम को जब लंका की ओर प्रस्थान करना था तो उन्होंने शिव से मार्ग प्रशस्त करने का आग्रह किया था. भगवान राम को समुद्र लांघने की क्षमता थी. लेकिन अपने भाई-मित्र, सेना का मनोबल बढ़ाने के शिव पूजन किया. यानि इंटरनेट से जानकारी हासिल करने के बाद भी सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए जीवन में एक योग्य गुरु या मेंटर का होना बहुत जरूरी है.

समय की कद्र

चाणक्य के अनुसार जो समय की कद्र नहीं करता, वह असफल हो जाता है. सही अवसर को पहचानना ही बुद्धिमानी है.

सही संगति

चाणक्य ने कहा है कि दुष्टों का साथ छोड़कर ऐसे दोस्तों व सहकर्मियों के साथ रहो जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें.

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