जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरीडोर के समेकित विकास के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी के गठन की स्वीकृति, स्थानीय स्तर पर 6 लाख से अधिक रोजगार का होगा सृजन
Source : DB News Update
Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Jabalpur-Indore Economic Corridor Development Company Limited: “हर अंचल में निवेश और हर जिले में रोजगार” के संकल्प को साकार करते हुए मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के सर्वांगीण, समावेशी और संतुलित क्षेत्रीय विकास को अभूतपूर्व गति देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्णय लिया है. प्रदेश के तीन सबसे बड़े आर्थिक, व्यापारिक और ज्ञान केंद्रों जबलपुर, भोपाल और इन्दौर जोड़ते हुए ‘इंडस्ट्रियल कॉरीडोर’ समेकित एवं योजनाबद्ध विकास को स्वीकृति प्रदान की गई है. इस दूरगामी परियोजना के माध्यम से 7 प्रमुख जिलों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, सीहोर और देवास में विश्वस्तरीय आर्थिक और औद्योगिक संकुलों की स्थापना की जाएगी. इससे महाकौशल, मध्य क्षेत्र और मालवा अंचल के जन-जीवन में व्यापक आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा. शासन का यह प्रयास राज्य के औद्योगिक विकास को बड़े महानगरों तक सीमित न रखकर प्रदेश के शहरी और ग्रामीण अंचलों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
स्थानीय युवाओं को मिलेंगे रोजगार
राज्य शासन की इस विकास पहल का सर्वोच्च ध्येय स्थानीय नागरिकों और युवाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाना है. जबलपुर से इन्दौर तक नियोजित औद्योगिक हब में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मध्यप्रदेश के हुनरमंद युवाओं को रोजगार अथवा आजीविका की तलाश में अपने गृह नगर और राज्य से पलायन न करना पड़े. कॉरीडोर के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे युवा अपनी योग्यता के अनुरूप सम्मानजनक आजीविका प्राप्त कर सकेंगे और देश-दुनिया के बड़े निवेशक मध्यप्रदेश की धरती पर निवेश करने के लिए आकर्षित होंगे.
किसानों की समृद्धि का आधार बनेगा नरसिंहपुर और रायसेन
औद्योगिक कॉरीडोर में कृषक कल्याण को केंद्रीय प्राथमिकता दी गई है. नर्मदा घाटी की समृद्ध कृषि पट्टी से जुड़े नरसिंहपुर और रायसेन जिलों में आधुनिक फूड पार्क्स, उन्नत कृषि-प्रसंस्करण इकाइयां, वेयरहाउसिंग और कोल्ड चेन नेटवर्क स्थापित किए जाएंगे. इस पहल से स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित फसलों, दलहन, तिलहन, फल एवं सब्जियों का स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन सुनिश्चित होगा. किसानों को बिचौलियों से मुक्ति पाकर अपनी उपज का लाभकारी व बेहतर मूल्य सीधे प्राप्त होगा. साथ ही ग्रामीण युवाओं को अपने ही गांव व तहसील के निकट कृषि-आधारित उद्योगों में रोजगार प्राप्त होगा.
जबलपुर में रक्षा व इंजीनियरिंग विनिर्माण को मिलेगी नई पहचान
महाकौशल क्षेत्र में जबलपुर और उसके आसपास के भू-भाग को उन्नत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ठोस कार्य योजना बनाई गई है. इस क्षेत्र में भारी इंजीनियरिंग, आधुनिक विनिर्माण, रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र की सहायक इकाइयों तथा लॉजिस्टिक्स हब का विकास किया जाएगा. क्लस्टर के विकास से न केवल स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बड़े पैमाने पर काम मिलेगा बल्कि महाकौशल के तकनीकी व गैर-तकनीकी युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर हजारों नए रोजगार सृजित होंगे.
भोपाल को वैश्विक केंद्र के रूप में किया जाएगा विकसित
राजधानी भोपाल और उसके समीपवर्ती क्षेत्र को आधुनिक ज्ञान और उच्च प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. यहाँ सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी-सक्षम सेवाओं, नॉलेज सर्विसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग और अनुसंधान एवं विकास से जुड़े आधुनिक क्लस्टर्स स्थापित होंगे. इससे राजधानी के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थानों से निकलने वाले उच्च-शिक्षित युवाओं को अत्याधुनिक और उच्च-वेतन वाले रोजगार के अवसर अपने शहर में ही उपलब्ध होंगे. इसके साथ ही इस क्षेत्र में उच्च स्तरीय नागरिक व सामाजिक अधोसंरचना का भी विस्तार किया जाएगा जिससे संपूर्ण क्षेत्र का जीवन स्तर बेहतर होगा.
मालवा-निमाड़ के औद्योगिक क्षेत्र का होगा सुदृढ़ीकरण
मध्य और पश्चिमी मध्यप्रदेश के आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले सीहोर एवं देवास क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, विनिर्माण उद्योग, वेयरहाउसिंग और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब स्थापित किए जाएंगे. देश की वाणिज्यिक राजधानी इन्दौर को एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, आधुनिक आईटी सेवाओं और वैश्विक सेवा उद्योग के केंद्र के रूप में और अधिक विस्तार दिया जाएगा. इस नए कॉरीडोर का सीधा जुड़ाव देवास और पीथमपुर के पहले से विकसित सुदृढ़ औद्योगिक इको सिस्टम से किया जाएगा, जिससे समूचे मालवा-निमाड़ अंचल में परिवहन, होटल, खुदरा व्यापार और सहायक सेवाओं में अभूतपूर्व आर्थिक वृद्धि होगी.
ऐसे तैयार किया गया है रोडमैप
- -राज्य सरकार द्वारा इस कॉरीडोर के सड़क के किनारे सुनियोजित औद्योगिक टाउनशिप निर्माण का प्रारूप तैयार किया गया है. इन हबों के भीतर केवल कारखाने ही नहीं होंगे बल्कि कार्यरत श्रमिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों के लिए सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर तैयार किए जाएंगे.
- – निवेशकों और उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए इस कॉरीडोर में अत्याधुनिक ‘प्लग-एंड-प्ले’ अधोसंरचना उपलब्ध कराई जाएगी. उद्योगपतियों को समतल व विकसित भूमि, चौड़ी आंतरिक सड़कें, 24 घंटे निर्बाध गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति, प्रचुर औद्योगिक जल, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वैज्ञानिक सीवरेज प्रणाली और हाई-स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी पहले से पूरी तरह तैयार मिलेगी.
- – परियोजना के प्रथम चरण में 7 जिलों के रणनीतिक स्थानों पर लगभग 10 हजार एकड़ क्षेत्र में 3 से 5 प्राथमिक औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे. प्रारंभिक आंकलन और अध्ययन के अनुसार मार्च 2028 तक इस कॉरीडोर में एक लाख करोड़ से अधिक का निजी एवं संस्थागत निवेश आकर्षित होने की संभावना है.
- – इस प्रारंभिक निवेश से प्रदेश में एक लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे. आगामी तीन वर्षों में कॉरिडोर के पूर्ण विकास के साथ कुल निवेश का आंकड़ा 3 लाख करोड़ रूपये से अधिक पहुँचने का अनुमान है. इससे कुल 6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे.
कंपनी के गठन को मंजूरी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूर्ण पेशेवर दक्षता, समयबद्धता और वित्तीय पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए मंत्रि-परिषद ने एक समर्पित विशेष प्रयोजन साधन कंपनी के गठन को मंजूरी दी है. “जबलपुर-भोपाल-इन्दौर इकोनॉमिक कॉरीडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड” मध्यप्रदेश शासन के स्वामित्व और नियंत्रण वाली शत-प्रतिशत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी होगी. राज्य शासन द्वारा कंपनी के सुदृढ़ वित्तीय आधार के लिए 100 करोड़ की प्रारंभिक चुकता अंशपूंजी उपलब्ध कराई जाएगी. इसके अतिरिक्त कंपनी को 20 करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण प्रारंभिक कार्यशील पूंजी के रूप में प्रदान किया जाएगा.
30 दिन से 12 माह के चरणबद्ध एवं समयबद्ध क्रियान्वयन रोडमैप
परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए मंत्रि-परिषद द्वारा एक स्पष्ट रोडमैप अनुमोदित किया गया है. प्रारंभिक 30 दिन में कंपनी का औपचारिक निगमन, मेमोरेंडम एवं आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (MoA/AoA) का निष्पादन, इक्विटी आवंटन और बोर्ड की स्थापना की जाएगी. 0 से 3 माह की अवधि में मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं पेशेवर तकनीकी टीमों की नियुक्ति, प्री-फिजिबिलिटी अध्ययन, मांग का वैज्ञानिक आंकलन और पर्यावरणीय-सामाजिक स्क्रीनिंग की जाएगी. साथ ही 0 से 6 माह की अवधि में संपूर्ण कॉरीडोर की सटीक जीआईएस मैपिंग और पारदर्शी लैंड बैंक का निर्माण होगा. तीन से 9 माह की अवधि में प्राथमिक हबों का डिटेल मास्टर प्लान और वित्तीय मॉडल तैयार किया जाएगा. इसके साथ ही 6 से 12 माह की अवधि में विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), वैधानिक अनुमतियां, आंतरिक ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर का आरंभ और प्रमुख एंकर निवेशकों के साथ अनुबंध होगा. रोडमैप अनुसार 12 माह के उपरांत: पीपीपी आधार पर परियोजनाओं का निष्पादन, आंतरिक सुविधाओं का विकास और निवेशकों को भूखंडों का विधिवत आवंटन प्रारंभ किया जाएगा.
