मध्य प्रदेश में सोयबीन पर एमएसपी को लेकर सरकार के खिलाफ अब भारतीय किसान संघ ने भी मोर्चा खोल दिया है.
Source : DB News Update
By : DB News Update| Edited By: प्रिंस अवस्थी
BKS Rally News: कांग्रेस के बाद अब भारतीय किसान संघ ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में भारतीय किसान संघ ने एक हजार ट्रैक्टरों की रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेगा. भारतीय किसान संघ के नेता भारत सिंह बेस ने बताया कि सोमवार को हरिफाटक ब्रिज से दोपहर 1 बजे किसानों के जरिये रैली निकाली जाएगी. इस रैली में एक हजार से अधिक ट्रैक्टरों के शामिल होने की संभावना है.
BKS ने किया ये दावा
भारत सिंह बेस ने कहा, “सरकार ने जो 4 हजार 892 रुपये समर्थन मूल्य घोषित किया है. यह लागत के हिसाब से काफी कम है, ऐसी स्थिति में किसानों को इस साल भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.’ प्रदर्शन को लेकर भारत सिंह बेस ने कहा, “किसानों को सोयाबीन का उचित दाम मिले, इसी उद्देश्य के साथ भारतीय किसान संघ ट्रैक्टर रैली निकालने जा रहा है.’ इस रैली को भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी जोरशोर से तैयारी कर रहे हैं. यह ट्रैक्टर रैली हरि फाटक ब्रिज से देवास गेट, चामुंडा माता चौराहा होते हुए शहर के अलग-अलग मार्गों से कलेक्टर कार्यालय पहुंचेगी. जहां पर किसानों के जरिये कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा जाएगा.
किसानों का नहीं होगा नुकसान
वहीं, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि किसानों की फसल का दाम एमएसपी के बराबर करने के लिए सरकार ने भावांतर योजना लागू की है. जिन किसानों की फसल कम भाव में बिकेगी उन्हें भावांतर के माध्यम से शेष राशि खाते में पहुंचेगी. जिससे उनका नुकसान नहीं होगा और पर्याप्त भाव मिल जाएगा.
भावांतर योजना से हमें खुशी
रैली में शामिल होने आए गांव गोंदिया के किसान महेंद्र देथलिया ने बताया कि हम मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सरकार को धन्यवाद देने के लिए रैली में आए हैं. स्वयं के खर्चे पर यह रैली निकाली जा रही है. हमें खुशी है कि 15 दिन के भीतर भावांतर राशि हमारे खातों में आ जाएगी. वहीं, एक अन्य किसान दिनेश पटेल ने बताया कि भावांतर योजना काफी कारगर साबित होगी. यही कारण है कि इसकी खुशी में हम इस रैली में शामिल होने आए हैं.
किसानों की सबसे बड़ी और मुख्य मांग यह है कि सोयाबीन और मक्का की खरीदी भावांतर योजना के तहत नहीं, बल्कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सीधे की जाए. सरकार द्वारा घोषित सोयाबीन का MSP 5328/क्विंटल है. सरकार ने मॉडल रेट पर सोयाबीन का भावांतर देने की घोषणा की है, जबकि मंडियों में यह 3200 से 3500 में बिक रही है. भावांतर योजना केवल MSP और मंडी भाव का अंतर देती है, जिससे किसानों को 500 से 1000 प्रति क्विंटल का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है. किसान पूछ रहे हैं, जब मेहनत हमारी है, पसीना हमारा है, तो भाव क्यों कटे-कटे मिल रहे हैं?
अतिवृष्टि और मुआवजे की पुकार
क्षेत्र में लगातार हुई अतिवृष्टि से फसलें बर्बाद हो गईं. किसानों की हालत यह है कि न खेत में फसल बची और न ही मंडी में सही दाम मिल रहे हैं. किसान संगठन ने मांग उठाई है कि सरकार तत्काल सर्वे कराए और प्रभावित किसानों को मुआवजा एवं बीमा राशि दिलाए. यह केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि किसानों की टूटी उम्मीदों को संबल देने का काम करेगा.
खेती घाटे का सौदा क्यों?
किसानों का कहना है कि महंगाई के अनुपात में उनकी फसलों का मूल्य नहीं बढ़ रहा. जब खाद, बीज, डीजल, बिजली और मजदूरी सब कुछ महंगा हो रहा है, तब भी फसलों के दाम जस के तस हैं. किसान अब यह मानने लगे हैं कि खेती मुनाफे का नहीं बल्कि घाटे का सौदा बन चुकी है. ऐसे में अगर एमएसपी पर खरीदी सुनिश्चित न हुई तो किसान अपनी ज़मीन बेचने और खेती छोड़ने को मजबूर होंगे.
रबी सीजन और खाद की किल्लत
किसानों की मांगों में एक और अहम बिंदु है. रबी सीजन के लिए डीएपी और यूरिया खाद की पर्याप्त आपूर्ति. अक्सर सीजन की शुरुआत में खाद की कमी से किसान परेशान होते हैं. लंबे-लंबे इंतजार, कालाबाज़ारी और अतिरिक्त दाम चुकाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. किसान संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर समय पर खाद उपलब्ध नहीं कराई गई, तो अगली फसलों का उत्पादन भी प्रभावित होगा और यह संकट और गहराएगा.
