विदेश मंत्री एस जयशंकर 15-16 अक्टूबर को पाकिस्तान दौरे पर रहेंगे. हमारा एक पड़ोसी आतंकवाद का समर्थन करना जारी रखता है और अगर ऐसा है, तो इसके परिणाम अवश्य होंगे.
Source : MEDIA
By : DB News Update| Edited By : प्रिंस अवस्थी
SCO Meeting: विदेश मंत्री एस जयशंकर 15-16 अक्टूबर को पाकिस्तान जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान ने 29 अगस्त को SCO मीटिंग के लिए न्योता दिया था. इस बैठक का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे. वे इस्लामाबाद में SCO के हेड्स ऑफ गवर्नमेंट (CHG) की बैठक में हिस्सा लेंगे. 9 साल में यह पहली बार होगा जब भारत का कोई मंत्री पाकिस्तान जाएगा.
पाकिस्तान यात्रा पर विदेश मंत्री का बयान
एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अपनी आगामी पाकिस्तान यात्रा पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “यह (यात्रा) एक बहुपक्षीय कार्यक्रम के लिए होगी. मैं वहां भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने के लिए नहीं जा रहा हूं. एससीओ के अच्छे सदस्य के रूप में मैं वहां जा रहा हूं. आप जानते हैं कि मैं एक विनम्र और सभ्य व्यक्ति हूं, इसलिए मैं उसी के अनुसार व्यवहार करूंगा.
इन देशों के नेता भी पहुंच रहे हैं इस्लामाबाद
देश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने विदेश मंत्री जयशंकर की पाकिस्तानी यात्रा को लेकर बताया था, “इस्लामाबाद में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री जयशंकर करेंगे. उनके साथ एक प्रतिनिमंडल भी जाएगा.”
पाकिस्तान पर फिर साधा निशाना
जयशंकर ने समूह की आकांक्षाओं को साकार करने में एससीओ की विफलता के पीछे के कारणों को समझाया और साथ ही पाकिस्तान पर उसके आतंकी कारखानों को लेकर परोक्ष हमला भी किया. उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद एक ऐसी चीज है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. इस पर वैश्विक दृष्टिकोण के बावजूद, हमारा एक पड़ोसी आतंकवाद का समर्थन करना जारी रखता है और अगर ऐसा है, तो इसके परिणाम अवश्य होंगे. इस क्षेत्र में यह हमेशा की तरह नहीं चल सकता. यही कारण है कि हाल के वर्षों में सार्क की बैठकें नहीं हुई हैं.
उन्होंने आगे कहा, ‘हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि क्षेत्रीय गतिविधियां बंद हो गई हैं. वास्तव में, पिछले 5-6 वर्षों में, हमने भारतीय उपमहाद्वीप में कहीं अधिक क्षेत्रीय एकीकरण देखा है. आज, यदि आप बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और श्रीलंका के साथ हमारे संबंधों को देखें, तो आप देखेंगे कि रेलवे लाइनों को बहाल किया जा रहा है, सड़कों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है और बिजली ग्रिड का निर्माण किया जा रहा है.
गौरतलब है कि इस्लामाबाद में एससीओ समिट आगामी 15-16 अक्तूबर को होगी. शंघाई सहयोग संगठन की इस बैठक में भारत और पाकिस्तान के अलावा कजाखस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान के शीर्ष नेता भी हिस्सा लेंगे.
पिछली बैठक में उठा था आतंकवाद का मुद्दा
अस्ताना में इससे पहले 3-4 जुलाई को शंघाई सहयोग संगठन की बैठक हुई थी. इस बैठक में PM मोदी शामिल नहीं हो पाए थे, जिसके बाद विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सम्मेलन में हिस्सा लिया था. इस दौरान उन्होंने उन देशों को अलग-थलग और बेनकाब करने को कहा था जो आतंकवादियों को प्रश्रय देते हैं.
आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते
आतंकवाद के मुद्दे पर भारत अडिग है और भारत सख्ती का रुख अपनाया हुआ है. भारत का मानना है कि “आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते. हाल ही में पूर्व अधिकारियों या नागरिकों द्वारा किए गए अनौपचारिक संपर्कों या पत्रों में भारत सरकार की कोई आधिकारिक भागीदारी, समर्थन या संलिप्तता नहीं है. व्यापार, सिंधु जल संधि या जम्मू-कश्मीर जैसे मुद्दों पर किसी भी प्रकार की बातचीत तभी संभव होगी जब पाकिस्तान आतंकवाद का रास्ता छोड़ दे.
2008 के हमले में पाकिस्तान का हाथ है
2008 के मुंबई हमलों का ज़िक्र करते हुए शशि थरूर ने भी खुलासा किया है कि भारत ने पाकिस्तान के शामिल होने के “पुख्ता सबूत” दिए थे, जिनमें लाइव इंटरसेप्ट और डॉसियर शामिल थे. इसके बावजूद, “एक भी मास्टरमाइंड के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई.” उन्होंने कहा कि भारत ने हमलों के बाद ‘असाधारण संयम’ दिखाया, मगर बार-बार की उकसावे की वजह से भारत को 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे कदम उठाने पड़े. थरूर ने अपनी किताब पैक्स इंडिका (2012) का हवाला देते हुए कहा, “मैंने चेतावनी दी थी कि अगर मुंबई जैसे हमले दोबारा हुए और पाकिस्तान की संलिप्तता साफ हुई, तो 2008 जैसा संयम दिखाना नामुमकिन हो जाएगा और वही हुआ. कोई भी लोकतांत्रिक सरकार, खासकर भारत जो पाकिस्तान के बार-बार धोखे झेल चुका है. वह अपने नागरिकों और मासूम पर्यटकों पर हमले बर्दाश्त नहीं कर सकती.
