53 साल बाद ढाका पहुंचेंगे पाक फौजी, PAK आर्मी बांग्लादेश आर्मी की सभी 10 कमांड में ट्रेनिंग देगी, बांग्लादेश के 12 सरकारी अधिकारियों जिनमें एक अतिरिक्त सचिव और 11 संयुक्त सचिव हैं उन्हें 4 से 21 मई तक लाहौर की सिविल सर्विसेज एकेडमी में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था.
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By : DB News Update | Edited By: Prince Awasthi
Bangladesh-Pakistan Relations: बांग्लादेश ने अपने सैनिकों की ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान आर्मी की टीम को इनवाइट किया है. 1971 के भारत-पाक युद्ध में करारी हार के 53 साल बाद पाकिस्तानी आर्मी बांग्लादेश की जमीन पर कदम रखेगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेनिंग अगले साल फरवरी में शुरू होगी, जिसका पहला फेज एक साल तक चलेगा. इसके बाद PAK आर्मी बांग्लादेश आर्मी की सभी 10 कमांड में भी ट्रेनिंग देगी.
पाक से गोला बारूद मंगाया, युद्धाभ्यास में शामिल होगा
बांग्लादेश ने पाकिस्तान से सितंबर और दिसंबर के बीच 40 हजार राउंड एम्युनिशन मंगवाया है. ये बीते साल की तुलना में 3 गुना हैं. इसके अलावा 2 हजार राउंड टैंक एम्युनिशन और 40 टन RDX भी मंगवाया है. बांग्लादेश की नेवी फरवरी 2025 में पाकिस्तान के साथ कराची पोर्ट पर अमन-2025′ युद्धाभ्यास करेगी. पाकिस्तान हर 2 साल बाद इस युद्धाभ्यास का आयोजन करता है. बांग्लादेश 15 साल बाद शामिल हो रहा है. शेख हसीना के पूरे कार्यकाल में बांग्लादेश ने इसमें हिस्सा नहीं लिया था.
पाकिस्तान में ट्रेनिंग लेंगे बांग्लादेश के ब्यूरोक्रेट्स
बांग्लादेश में भारत के पूर्व राजदूत पिनाक रंजन चक्रवर्ती ने दिप्रिंट की रिपोर्ट में कहा है कि यह बदलाव बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के तहत संबंधों में विविधता लाने का संकेत हैं. उन्होंने कहा “अवामी लीग के शासनकाल में संबंधों में आई ठहराव के दौर के बाद बांग्लादेश का पाकिस्तान के साथ जुड़ाव बढ़ा है. यह आंशिक रूप से पिछले यूनुस-नेतृत्व वाले अंतरिम प्रशासन के दौरान कूटनीतिक विकल्पों में विविधता लाने की इच्छा को दर्शाता है. इस नजरिए से इस तरह की पहल को भारत के प्रति एक संतुलन बनाने की रणनीति के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है भले ही ढांचागत बाधाओं के चलते इसकी गुंजाइश सीमित ही क्यों न हो.” उन्होंने आगे कहा कि बांग्लादेश की विदेश नीति में ऐतिहासिक रूप से अपने प्रमुख साझेदारों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया जाता रहा है.
बांग्लादेश के फैसलों में दिखेगी पाकिस्तान की छाप
बांग्लादेश के अधिकारियों के फैसलों में पाकिस्तान की छाप देखने को मिलेगी. पहले बांग्लादेश अपने अधिकारियों को ट्रेनिंग के लिए भारत के मसूरी में भेजता था. यह कदम दोनों देशों के बीच अपनी तरह का पहला व्यवस्थित कार्यक्रम है. बांग्लादेश के 12 सरकारी अधिकारियों जिनमें एक अतिरिक्त सचिव और 11 संयुक्त सचिव हैं उन्हें 4 से 21 मई तक लाहौर की सिविल सर्विसेज एकेडमी में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था. दिप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक इसका सारा खर्च पाकिस्तान ने उठाया है.
शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान के साथ नजदीकी संबंध बनाने शुरू कर दिए थे और तारिक रहमान उस रिश्ते को आगे ले जा रहे हैं. शेख हसीना के जाने के बाद ढाका में पाकिस्तान के उच्च-स्तरीय दौरे फिर से शुरू हो गए हैं. ढाका और कराची के बीच सीधी उड़ानें भी दोबारा चालू हो गई हैं और रक्षा सहयोग पर चर्चाएं भी की गई हैं जिनमें पाकिस्तान के JF-17 लड़ाकू विमान में बांग्लादेश की दिलचस्पी भी शामिल है. कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बांग्लादेश, पाकिस्तानी लड़ाकू विमान खरीदने के लिए बात कर रहा है.
जमात-ए-इस्लामी जैसे समूहों के साथ उनके पुराने जुड़ाव
उन्होंने दिप्रिंट से कहा “बांग्लादेश ने समय-समय पर भारत के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की कोशिश की है जिसके लिए उसने अन्य साझेदारों जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है उसके साथ ज्यादा सक्रियता से जुड़ने का प्रयास किया है और ऐसा घरेलू राजनीति की वजह से हुआ. BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के भीतर कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जो ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान के प्रति ज्यादा सहानुभूति रखते रहे हैं और जमात-ए-इस्लामी जैसे समूहों के साथ उनके पुराने जुड़ाव हैं. बांग्लादेश में पाकिस्तान का मुख्य हित उसे भारत-विरोधी बनाना और वहां अपना प्रभाव बढ़ाना है.
भारत के साथ रिश्ते संतुलित करने का प्रयास
बांग्लादेश के एक हजार से ज्यादा ब्यूरोक्रेट्स भारत में ट्रेनिंग ले चुके हैं. चक्रवर्ती ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां जरूरी नहीं कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच किसी बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत हों. दिप्रिंट से बात करते हुए बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच होने वाले कूटनीतिक आदान-प्रदान से परिचित अन्य लोगों ने भी इस तरह के कार्यक्रमों को किसी बड़े बदलाव का संकेत मानने के बजाय एक सामान्य प्रक्रिया ही बताया.
