भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कथित तौर पर 10,000 करोड़ के रुपये फंड डायवर्जन को लेकर अपनी जांच रिपोर्ट ईडी और दो अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंपी थी.
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By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Bank Loan Fraud Case: प्रवर्तन निदेशालय ने 17,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड केस में रिलायंस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन अनिल अंबानी को समन जारी कर दिया है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने उन्हें 5 अगस्त को दिल्ली स्थित मुख्यालय में पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है.
पिछले हफ्ते ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दिल्ली से लेकर मुंबई तक रिलायंस ग्रुप से जुड़े लगभग 35 ठिकानों पर छापेमारी की थी. इन छापेमारियों के दौरान कई दस्तावेज़, वित्तीय लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सबूत जब्त किए गए.
क्या है जांच एजेंसी का दावा?
इससे पहले, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कथित तौर पर 10,000 करोड़ के रुपये फंड डायवर्जन को लेकर अपनी जांच रिपोर्ट ईडी और दो अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंपी थी. आरोप है कि लोन की राशि को कथित तौर पर अन्य कंपनियों में डायवर्ट किया गया और उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्यों से हटकर किया गया, जो मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आता है.
2019 से कई कानूनी मामलों में फंसी हुई RCOM
बताया जा रहा है कि RCOM पहले से ही दिवालिया प्रक्रिया में है और कंपनी 2019 से कई कानूनी मामलों में फंसी हुई है. अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियां जैसे रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस भी जांच के दायरे में हैं. ED ने पहले 40 से ज्यादा प्रॉपर्टी अटैच की थीं, जिनकी वैल्यू 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा थी. फिलहाल छापेमारी जारी है और कोई आधिकारिक बयान ED की तरफ से नहीं आया है. लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह जांच तेज हो गई है और आगे और कार्रवाई हो सकती है.
अनिल अंबानी की कंपनियां इन आरोपों से इनकार करती रही हैं और कहती हैं कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं. यह घटना अनिल अंबानी ग्रुप पर चल रही कई एजेंसियों (ED, CBI, SFIO) की जांच का हिस्सा है, जहां कुल फ्रॉड अमाउंट 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा बताया जा रहा है.
अंबानी समूह के स्वामित्व व नियंत्रण से जुड़े संदिग्ध लेनदेन
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक घोटाला मामले की जांच के तहत मंगलवार को ई-कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके एक निदेशक के आवास पर छापेमारी अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप रिलायंस अनिल अंबानी समूह के स्वामित्व या नियंत्रण से जुड़े संदिग्ध लेनदेन और संपत्तियों से संबंधित अहम सबूत जब्त किए गए हैं. बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी सामने आई है. बयान में कहा गया है कि तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, अचल संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड और बैंक घोटाले की जांच से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए हैं.
अब तक की जांच में क्या सामने आया?
अब तक की जांच में सामने आया है कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) द्वारा जुटाए गए हजारों करोड़ रुपए के सार्वजनिक धन को रिलायंस अनिल अंबानी समूह के नियंत्रण और प्रबंधन वाली शेल तथा समूह की अन्य कंपनियों के नेटवर्क के जरिए सुनियोजित तरीके से दूसरी जगह भेजा गया.
जांच एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों को सामान्य बैंकिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन करते हुए पर्याप्त जांच-पड़ताल, उचित दस्तावेजी प्रक्रिया और ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन किए बिना कॉरपोरेट लोन मंजूर किए गए। जिन कंपनियों को यह कर्ज मिला, वे आर्थिक रूप से कमजोर थीं, उनका वास्तविक कारोबारी संचालन नहीं था और उनके पास ऋण चुकाने की क्षमता भी बेहद सीमित थी.
कौन थे शेल कंपनियों के निदेशक?
ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि इन शेल कंपनियों के निदेशक रिलायंस अनिल अंबानी समूह के कर्मचारी या करीबी सहयोगी थे और वे समूह के वरिष्ठ प्रबंधन के निर्देशों पर काम कर रहे थे. जांच एजेंसी के मुताबिक, इन कंपनियों के बैंक खाते और लेखा-जोखा समूह की प्रमुख कंपनियों रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के अधिकारियों द्वारा संचालित किए जाते , जिससे इन शेल कंपनियों पर समूह के प्रभावी नियंत्रण की पुष्टि होती है.
पीएमएलए के तहत कुर्क की जा चुकी संपत्तियां
ईडी ने इस मामले में 12 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) भी दाखिल की थी. जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अब तक 15,548 करोड़ रुपए की कथित अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का आकलन किया गया है.
वहीं, 4,510 करोड़ रुपए की संपत्तियां पीएमएलए के तहत कुर्क की जा चुकी हैं, जिनमें से 3,926 करोड़ रुपए की कुर्की को अब तक निर्णायक प्राधिकरण भी मंजूरी दे चुका है. इससे पहले ईडी ने 15 अप्रैल 2026 को इस मामले में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला और पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) अमित बापना को गिरफ्तार किया था.
फंड डायवर्जन में भूमिका
जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों की आरएचएफएल और आरसीएफएल से धन के कथित डायवर्जन में सक्रिय भूमिका थी। उस समय आरएचएफएल और आरसीएफएल, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड की सहायक कंपनियां थीं. फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। बयान में आगे कहा गया है कि मामले की जांच अभी जारी है.
जांच एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड द्वारा सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग और गबन से जुड़े मामलों की जांच कर रही है.
यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), दिल्ली द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी. ये एफआईआर यस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक की शिकायतों के बाद दर्ज की गई थीं.
