तख्तापलट के बाद भारत में पनाह ली हुई हैं शेख हसीना, केस चलाना चाहती है बांग्लादेश सरकार
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Bangladesh News : बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना को वापस भेजने की मांग की है. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सोमवार को कहा कि उसने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका वापस भेजने के लिए भारत को एक राजनयिक संदेश भेजा है. हसीना पांच अगस्त से भारत में निर्वासन में रह रही हैं. वह छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के बीच देश छोड़कर भारत आ गई थीं. ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने ‘‘मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार’’ के लिए हसीना और उनकी कैबिनेट में शामिल मंत्रियों, सलाहकारों और सैन्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं.
बांग्लादेश के विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा, ‘हमने हसीना के प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार को राजनयिक चिट्ठी भेजी है. हम पूर्व PM के खिलाफ केस चलाना चाहते हैं. दरअसल, 5 अगस्त को तख्तापलट के बाद हसीना ने भारत में पनाह ली थी. वे तब से यही पर हैं.
हसीना के खिलाफ 225 केस
बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद बनी यूनुस सरकार ने हसीना पर हत्या, अपहरण से लेकर देशद्रोह के 225 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं. वहीं, बांग्लादेशी सरकार ने चेतावनी दी है कि भारत में रहते हुए हसीना की तरफ से दिए जा रहे बयान दोनों देशों के संबंध बिगाड़ रहे हैं.
बांग्लादेश ने दी प्रत्यर्पण संधि की दलील
इससे पहले बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के सलाहकार जहांगीर आलम ने भी जानकारी दी है कि उनके कार्यालय की ओर से भी विदेश मंत्रालय को अपदस्थ प्रधानमंत्री हसीना के प्रत्यर्पण के लिए पत्र भेजा गया है. इसकी प्रक्रिया जारी है. गृह मंत्रालय के सलाहकार जहांगीर आलम दावा किया है कि ढाका और नयी दिल्ली के बीच प्रत्यर्पण संधि पहले से ही मौजूद है. इस संधि के तहत शेख हसीना को बांग्लादेश वापस लाया जा सकता है.
भारत में रह रही हैं शेख हसीना
बीते अगस्त महीने में बांग्लादेश में बड़े स्तर पर प्रदर्शन और हिंसा के बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 5 अगस्त देश छोड़ दिया था. वह तभी से भारत में निर्वासन में रह रही हैं. शेख हसीना और उनकी सरकार के मंत्रियों पर मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोप लगाए गए हैं और गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं.
शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई गई
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने 17 नवंबर को हसीना और उनकी सरकार में गृहमंत्री रहे असदुज्जमान खान कमाल को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में मौत की सजा सुनाई. दोनों की यह सुनवाई गैरहाजिरी में हुई थी. उन्हें ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने के लिए मौत की सजा दी. बाकी मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। ICT ने उन्हें 5 मामलों में आरोपी बनाया था.
ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया. तीसरे आरोपी पूर्व IGP अब्दुल्ला अल-ममून को 5 साल जेल की सजा सुनाई गई. ममून हिरासत में हैं और सरकारी गवाह बन चुके हैं.
जिस कोर्ट की स्थापना कराई उसी ने सजा सुनाई
बताया जा रहा है कि हसीना को मौत की सजा सुनाने वाले इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की स्थापना उन्होंने ही की थी. इसे 2010 में बनाया गया था. इस कोर्ट को 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुए वॉर क्राइम्स और नरसंहार जैसे मामलों की जांच और सजा के लिए बनाया गया था.
हालांकि इस ट्रिब्यूनल को बनाने के लिए 1973 में ही कानून बना दिया गया था, लेकिन दशकों तक प्रक्रिया रुकी रही. इसके बाद 2010 में हसीना ने इसकी स्थापना की ताकि अपराधियों पर मुकदमा चल सके.
शेख हसीना को बांग्लादेश भेजने की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट से पता चल रहा है कि शेख हसीना की सुरक्षित वापसी बांग्लादेश वापसी को लेकर ढाका और नई दिल्ली में शीर्ष पर बैठे लोगों के बीच सहमति बन गई है. नॉर्थ ईस्ट न्यूज ने बांग्लादेश के प्रशासनिक ढांचे में मौजूद कई प्रभावशाली सूत्रों के हवाले से इसकी पुष्टि की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरक्षा इंतजामों और स्थिति को लेकर एक रोडमैप तैयार कर लिया गया है. सूत्रों का कहना है कि शेख हसीना की वापसी में उनकी पूरी सुरक्षा गारंटी शामिल है.
रिपोर्ट में कहा गया कि सूत्रों ने मामले में अधिक जानकारी नहीं दी लेकिन कहा कि कई महीनों की बातचीत के बाद पूरी सुरक्षा का मुद्दा सुलझा लिया गया है.
