बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है. साल 2025 में बसंत पंचमी कब है, जानें सरस्वती पूजा का मुहूर्त, डेट और इस दिन कौन से काम करना बेस्ट है.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Basant Panchami 2027: मांगलिक कार्यों के लिए बसंत पंचमी का दिन बहुत अच्छा माना जाता है. शादी से लेकर गृह प्रवेश या कुछ नया काम इस दिन शुरू करने पर उसमें सफलता मिलती है. बसंत पंचमी 11 फरवरी 2027 को है. माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर विद्या, वाणी और ज्ञान की देवी सरस्वती प्रकट हुईं थी. बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा के लिए सुबह 07:03 AM से दोपहर 12:36 PM तक पूजा का मुहूर्त है.
इस दिन बिना मुहूर्त देखे शादी विवाह
शास्त्रों के अनुसार इस तिथि को अबूझ मुहूर्त बनता है, जिसमें पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती है. इस दिन बिना मुहूर्त देखे शादी विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश सहित अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं.
इस दिन को क्यों माना जाता है इतना शुभ?
पौराणिक मान्यता है कि, इस दिन ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था. साथ ही, यह दिन ऋतुराज वसंत के आगमन का उत्सव है, जब प्रकृति स्वयं चारों ओर हरियाली और फूलों के रूप में सजकर नई शुरुआत का संदेश देती है. इस दिन ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है. जैसा कि पहले चर्चा हुई थी, वर्ष 2027 में बसंत पंचमी 11 फरवरी (गुरुवार) को मनाई जाएगी.
बसंत पंचमी पर किए जाने वाले मुख्य मांगलिक कार्य
छोटे बच्चों को पहली बार लिखना और पढ़ना सिखाने (अक्षर ज्ञान कराने) के लिए यह साल का सबसे उत्तम दिन माना जाता है. इस दिन बच्चे का हाथ पकड़कर स्लेट पर पहला अक्षर लिखवाया जाता है.
जिन लोगों की शादियों के लिए सामान्य दिनों में मुहूर्त नहीं मिल पाते, उनके विवाह इस दिन बिना किसी अड़चन के संपन्न होते हैं. इस दिन देश भर में रिकॉर्ड शादियां होती हैं.
नए घर में प्रवेश करना या नए मकान के निर्माण के लिए नींव रखना (भूमि पूजन) इस दिन बेहद समृद्धि दायक माना जाता है.
नई दुकान खोलना, नया व्यापारिक सौदा करना, वाहन खरीदना या सोना-चांदी खरीदना इस दिन भाग्य को मजबूत करता है.
बच्चों के मुंडन या कान छेदन (कर्णवेध) जैसे महत्वपूर्ण संस्कार भी इस अबूझ मुहूर्त में किए जाते हैं.
11 माला जाप करें बच्चे
बच्चा पढ़ाई में पिछड़ा रहता हैं या उसका मन पढ़ने में नहीं लगता. तो आप बसंत पंचमी की सुबह घर के पूजा स्थान पर अभिमंत्रित सरस्वती यंत्र रखकर, सफेद चंदन, पीले और सफेद पुष्प अर्पित करके धूप-दीप करें और ऊँ हृं हृं हृं सरस्वत्यै नमः इस मंत्र का 11 माला जाप करें. मान्यता है इससे बच्चे का बौद्धिक विकास होता है.
बसंत पंचमी पर बच्चों के हाथों मां सरस्वती की पूजा कराएं और जरुरतमंदों को किताबें भेंट कराएं. इससे वाणी दोष दूर होता है. स्मरण शक्ति तेज होती है. बच्चों का मन आध्यात्म की ओर अग्रसर रहता है.
विद्यारंभ संस्कार की चरणबद्ध पूजा विधि
सुबह बच्चे को स्नान कराएं और संभव हो तो पीले या सफेद रंग के साफ वस्त्र पहनाएं.
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके एक चौकी रखें.
उस पर पीला कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की स्थापना करें.
उनके ठीक सामने बच्चे की नई स्लेट-चॉक या नोटबुक और पेन को आदरपूर्वक रखें.
सबसे पहले गणेश जी और मां सरस्वती का ध्यान करें.
घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं.
बच्चे के हाथ में थोड़े चावल और फूल देकर मां सरस्वती के चरणों में अर्पित करवाएं.
मां सरस्वती को रोली, चंदन और हल्दी का तिलक लगाएं.
इसके बाद, बच्चे के माथे पर भी तिलक लगाएं और उसकी दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र (कलावा) बांधें.
मां सरस्वती को पीले फूल और बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं.
बच्चे की स्लेट या कॉपी और पेन पर रोली से स्वास्तिक बनाएं.
अक्षत और फूल चढ़ाकर कलम-दवात की पूजा करें, क्योंकि इनमें मां सरस्वती का वास माना जाता है.
बच्चे को अपने पास पूर्व दिशा की ओर मुख करके बिठाएं.
पिता, माता या गुरु, बच्चे की उंगली (दाहिने हाथ की तर्जनी और अंगूठा) पकड़कर स्लेट या कागज पर सबसे पहले “ॐ” (ओम) लिखवाएं.
इसके बाद कोई भी शुभ धार्मिक प्रतीक, गायत्री मंत्र या वर्णमाला का पहला अक्षर (जैसे ‘अ’ या ‘A’) लिखवाएं.
बच्चे से मां सरस्वती के सामने हाथ जुड़वाएं और इस सरल मंत्र का 3 या 5 बार उच्चारण करवाएं.
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः”
अंत में मां सरस्वती की आरती करें और पूजा में रही कमियों के लिए क्षमा याचना करें.
पूजा के बाद बच्चे को बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए.
