गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना की जाएगा. यदि आप इन वैदिक मंत्रों के साथ बप्पा की स्थापना और पूजन करेंगे तो यह विशेष फलदायी होगा.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Ganesh Chaturthi Puja Mantra: गणेश चतुर्थी का पर्व विघ्नहर्ता श्रीगणेश जी की पूजा-आराधना के लिए सबसे विशेष दिन माना गया है. क्योंकि इस दिन को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस साल गणेश चतुर्थी मंगलवार 27 अगस्त 2025 को है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणपति की पूजा करने पर जीवन से सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
गणेश चतुर्थी के शुभ दिन घर से लेकर पूजा पंडाल और मंदिरों में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना की जाती है. यदि आप भी अपने घर पर भगवान गणेश की स्थापना करने वाले हैं तो पूजा मे इन मंत्रों का जाप जरूर करें. इन मंत्रों के साथ गणपति की स्थापना और पूजा करने से बप्पा सभी विघ्नों को दूर करते हैं.
गणपति स्थापना का मुहूर्त
गणपति की स्थापना 27 अगस्त 2025 को मध्याह्न काल में करें. क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इसी समय पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था. गणेश चतुर्थी के दिन गणपति स्थापना के लिए सुबह 11 बजकर 5 मिनट से दोपहर 1 बजर 40 मिनट तक का समय सबसे शुभ रहेगा.
स्थापना और पूजन विधि
संकल्प: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें, हाथ में जल या अक्षत लेकर पूजा का संकल्प लें.
आवाहन व स्नान: गंगाजल के छींटे देकर बप्पा को स्नान कराएं और आसन अर्पित करें.
श्रृंगार: रोली, अक्षत (चावल) और सिंदूर का तिलक लगाएं. मौली (कलावा) वस्त्र रूप में तथा जनेऊ अर्पित करें.
दूर्वा व पुष्प: गणेश जी को 21 दूर्वा की गांठें और लाल या पीले फूल प्रिय, इन्हें अवश्य चढ़ाएं.
भोग: मोदक या बेसन के लड्डुओं का भोग लगाएं.
मंत्रमूल मंत्र: ॐ गं गणपतये नमःमहामंत्र: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
पूजा आरंभ करने से पहले पढ़ें ये मंत्र
भगवान गणेश की स्थापना करने से पहले पूजा के स्थान पर एक आसन बिछाकर बैठ जाएं. इसके बाद हाथ में जल और कुश लेकर इस मंत्र को पढ़ें-
ओम अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपी वा।
य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाहान्तर: शुचि:।।
इसके बाद हाथ वाले जल को अपने ऊपर छिड़कें. फिर तीन बार आचमन करें. फिर से हाथ में जल लेकर इस मंत्र को पढ़ें..
ओम केशवाय नम: ओम नाराणाय नम: ओम माधवाय नम: ओम ह्रषीकेशाय नम:।
और हाथ धो लें. इसके बाद ही भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें.
गणेश पूजा में पढ़ें ये मंत्र
आवाहन मंत्र
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आनः शृण्वन्नूतिभिःसीदसादनम्॥
गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि। तन्नो दंति: प्रचोदयात्॥
गणेश मूल मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
विघ्न विनाशक मंत्र
सिंहवाहन ओंकार, मोदक प्रिय करुणाकर।
विघ्नहर्ता मंगलकर्ता, चतुर्भुज धारी करुणासागर॥
श्री गणेश जी आरती ( Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva)
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय
आरती के बाद इस मंत्र का जप करें
वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥
गजाननं भूत गणादि सेवितं,
कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् ।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्,
नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ॥
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