Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी पर बप्पा की स्थापना (Ganesh sthapana) विधिवत की जाए तो सालभर सुख की कमी नहीं होती.
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By : DB News Update| Edited By : Supriya
Ganesh Chaturthi 2024: गणेशोत्सव (Ganesh utsav) की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. घर-घर में बप्पा की स्थापना के लिए गणेश चतुर्थी से पहले साफ-सफाई कर झाकी सजाई जाती है. इस साल गणेश चतुर्थी 7 सितंबर 2024 को है. इस दिन शुभ मुहूर्त में विधिवत गणेश जी की स्थापना करें, क्योंकि शुभ मुहूर्त पर किए गए कार्य सिद्ध होते हैं और बिना मुहूर्त के कार्यो में अधिकांश असफलता मिलती है. जबलपुर के विद्वान पंडित प्रदीप मिश्रा ने गणेश स्थापना और शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने गणेश चतुर्थी पर घर में कैसे करें बप्पा की स्थापना और पूजा? इसकी विस्तृत जानकारी प्रदान की. आइए जानते हैं उनके द्वारा बताए मुहूर्त और पूजा पद्धति के बारे में…
गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें गणपति स्थापना
- गणेश चतुर्थी के दिन स्नान आदि के बाद स्वच्छ पीले या लाल रंग के कपड़े पहनें. व्रत का संकल्प लें.
- उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा की चौकी रखें और उस पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाएं. बप्पा की झांकी सजाएं. सुगंधित फूल, आम के पत्तों का प्रयोग करना शुभ होगा.
- चौकी पर थोड़े से चावल रखकर शुभ मुहूर्त में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. गणपति के दहीने ओर कलश की स्थापना करें.
- कलश में जल, आम के पत्ते, सिक्का, अक्षत डालें और ऊपर से नारियल रखकर उस पर मौली बांध दें.
- गणेश जी को कुमकुम, चंदन, हल्दी, सिंदूर, मेहंदी, गुलाल, अक्षत, अबीर, गुलाल, लाल पुष्प , लौंग, इलायची, पान का पत्ता, जनेऊ नारियल अर्पित करें.
- दूर्वा जोड़े में बनाकर अर्पित करें. लड्डू या मोदक भोग लगाएं. गणेश चतुर्थी की कथा सुनें. अंत में आरती कर, पुष्पांजलि करें और फिर सभी प्रसाद बांटें.
गणेश जी स्थापना का मंत्र
अस्य प्राण प्रतिष्ठन्तु अस्य प्राणा: क्षरंतु च।
अस्यै देवत्वमर्चार्यै मामहेति च कश्चन
ऊं सिद्धि-बुद्धि सहिताय श्री महागणाधिपतयें नम:।
सुप्रतिष्ठो वरदो भव।।
ऐसी हो गणेश जी की मूर्ति
- गणपति के बाईं सूंड में चंद्रमा का प्रभाव होता है और जैसे चंद्रमा का स्वभाव है शांत-शीतल और सौम्य उसी तरह बाईं ओर वाले सूंड के गणपति हमारे लिए श्री, लक्ष्मी, आनंद, सुख-समृद्धि, यश व ऐश्वर्य के दायक होते हैं.
- घर में सिंदूरी रंग के गणपति की मूर्ति लाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.
- इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि, यदि आप वास्तु दोष निवारण के लिए वास्तु गणपति विराजमान करते हैं
- श्वेतार्क गणपति (सफेद रंग की मूर्ति) की आप पूजा करते है तो वह साक्षात गणेश स्वरूप ही हैं.
गणेश जी की मूर्ति लाते समय ध्यान रखने योग्य बातें
घर के लिए हमेशा बैठी हुई मुद्रा में भगवान गणेश की मूर्ति लाएं. उनकी सूंड बाईं (left) तरफ मुड़ी होनी चाहिए, जिन्हें वाममुखी गणेश कहते हैं, यह गृहस्थों के लिए अत्यंत शुभ होती है. मूर्ति में बप्पा का वाहन मूषक (चूहा) और उनके हाथ में मोदक अवश्य होना चाहिए. जब आप बप्पा को दुकान से घर लाएं, तो उनका चेहरा एक साफ कपड़े से ढका होना चाहिए. घर के मुख्य द्वार पर कपूर या दीये से उनकी आरती उतारकर ही उन्हें भीतर लाएं.
गणेश स्थापना के लिए स्थान की तैयारी
बप्पा की स्थापना के लिए घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) या पूर्व दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है. एक लकड़ी की चौकी (बाजोट) रखें. उस पर लाल या पीला साफ कपड़ा बिछाएं. कपड़े पर थोड़े से अक्षत (साबुत चावल) की ढेरी बनाएं.
सरल पूजा विधि स्टेप-बाय-स्टेप
- अक्षत की ढेरी के ऊपर बप्पा की मूर्ति को स्थापित करें. मूर्ति से कपड़ा हटा दें.
- बप्पा के दाईं ओर एक तांबे या मिट्टी के कलश में पानी, गंगाजल, सिक्का, सुपारी और आम के पत्ते रखकर ऊपर नारियल स्थापित करें.
- हाथ में जल और अक्षत लेकर बप्पा से अपने घर में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करें.
- फिर मूर्ति पर गंगाजल छिड़ककर उनका आह्वान करें.
- बप्पा को मौली (कलावा), जनेऊ और सुंदर वस्त्र अर्पित करें. उनके माथे पर चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएं.
- बप्पा को बेहद प्रिय दूर्वा घास (21 गांठें), लाल रंग के फूल (विशेषकर गुड़हल) और सिंदूर चढ़ाएं.
- बप्पा को मोदक या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं. साथ ही मौसमी फल (केला, सेब) भी अर्पित करें.
- घी का दीपक जलाकर पूरे परिवार के साथ ‘जय गणेश जय गणेश देवा’ की आरती गाएं.
- अंत में अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें.
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