मराठी लोग गुड़ी पड़वा को महाराष्ट्र में खास तरीके से मनाते है. इस दिन की तैयारियां पहले से ही होने लगती हैं. घरों की सफाई की जाती है.बहुत से घरों में रंगोली बनाई जाती है.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Gudi Padwa 2025 : इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का सूरज नई किरणों, नई ऊर्जा, नई उम्मीद और नई शुरुआत के साथ उगने वाला है. इस दिन मराठी नववर्ष गुड़ी पड़वा है. जिसकी शुरुआत श्रद्धा, भक्ति और शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि और हिंदू पंचांग का नववर्ष यानी नव संवत्सर 2082 से हो रही है. यह खास तारीख है 30 मार्च. गुड़ी पड़वा का धार्मिक ही नहीं सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व भी है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ब्रह्मा जी ने इसी दिन नई सृष्टि की रचना की. इसलिए इस दिन नई शुरुआत की जाती है. इस बार एक साथ कई त्योहार एक साथ पड़ने की वजह से गुड़ी पड़वा का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है. इसलिए इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. अगर आप इस फेस्टिवल पर अपने घर को नया और खूबसूरत लुक देना चाहते हैं, तो यहां जानते हैं, 5 बेहतरीन डेकोरेशन आइडियाज…
पारंपरिक तरीके से सजाएं घर
गुड़ी पड़वा का मुख्य आकर्षण गुड़ी स्थापना होती है. घर के बाहर या बालकनी में एक लंबी बांस की लकड़ी पर चमकदार साड़ी या कपड़ा बांधकर, उसके ऊपर नीम के पत्ते, गाठी (गुड़), फूल और एक उल्टा तांबे या चांदी का लोटा रखा जाता है. इसे रंग-बिरंगे फूलों और बंदनवार से सजाएं ताकि यह ज्यादा आकर्षक बन सके.
रंगोली से सजाएं घर का मुख्य द्वार
गुड़ी पड़वा पर रंगोली बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है. आप पारंपरिक महाराष्ट्रीयन रंगोली डिजाइन, जैसे मोर, स्वास्तिक, दीपक या भगवान गणपति की आकृति बना सकते हैं. फूलों की रंगोली से भी आप घर के मुख्य द्वार को सजा सकते हैं. इससे घर की सुंदरता में चार-चांद लग जाएगी.
फूलों और बंदनवार से डेकोरेशन
अगर आप अपने घर को नेचुरल तरीके से सजाना चाहते हैं तो गेंदे और गुलाब के फूलों की माला दरवाजे पर लगा सकते हैं. बाजार में बिकने वाले बंदनवार और तोरण से खास तरीके से सजावट कर सकते हैं. आम के पत्ते और फूल वाले बंदनवार घर को पारंपरिक और खूबसूरत लुक देंगे.
दीयों और लाइटिंग से जगमगाएं घर
गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa 2025) के मौके पर घर को दीयों और लाइट्स से जरूर सजाएं. खासकर शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे, खिड़कियों और पूजा वाली जगह पर छोटे-छोटे दीये जलाएं. इसके अलावा, एलईडी लाइट्स और फेयरी लाइट्स से भी घर को खास लुक दे सकते हैं.
पारंपरिक थीम पर सजाएं ड्राइंग रूम
गुड़ी पड़वा पारंपरिक त्योहार है, इसलिए अपने ड्राइंग रूम और पूजा स्थल को थीम बेस्ड सजाएं. महाराष्ट्रीयन संस्कृति को दिखाने वाले वॉल हैंगिंग, हैंडमेड पेंटिंग्स, पंचांग (मराठी कैलेंडर) और पारंपरिक वस्त्रों से सजे शोपीस का इस्तेमाल करें.
गुड़ी पड़वा के पीछे की कहानी
गुड़ी पड़वा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – गुड़ी और पड़वा. गुड़ी का मतलब झंडा होता है जबकि पड़वा संस्कृत शब्द प्रतिपदा से आया है, जिसका अर्थ है चंद्र पखवाड़े का पहला दिन.
ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान ब्रह्मा ने विशाल बाढ़ के बाद पूरी दुनिया को नष्ट करने के बाद ब्रह्मांड का निर्माण किया था. यही कारण है कि गुड़ी को ब्रह्म ध्वजा के रूप में भी जाना जाता है और इस घटना का सम्मान करने के लिए इसे उठाया जाता है.
इसके अलावा, एक और कहानी कहती है कि इसी दिन भगवान राम को 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या का राजा बनाया गया था. यह अवसर भगवान राम की रावण के खिलाफ जीत का भी प्रतीक है. यही कारण है कि घर के बाहर गुड़ी लगाई जाती है.
गुड़ी पड़वा के उत्सव
- सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और अपने घर की सफाई करें. ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपने घरों को सजाने के लिए गाय के गोबर का उपयोग कर सकते हैं.
- अरुणोदय काल में विशेष उत्सव पूजा करें.
- भोर होते ही बिना किसी विलम्ब के गुड़ी की पूजा करें.
- नये पारंपरिक कपड़े पहनें.
- अपने घर को रंगोली, फूलों और लाइटों से सजाएं.
- घर पर मित्रों और रिश्तेदारों को आमंत्रित करें और बड़ों से आशीर्वाद लें.
- नीम के पत्तों, शहद और इमली से बने स्वादिष्ट नीम के पत्तों का प्रसाद खाएँ। यह पेस्ट तीन स्वादों – मिठास, तीखापन और तीखापन का मिश्रण है.
- पूरन पोली, खीर और सन्ना जैसे व्यंजन तैयार करें. भोजन के बाद लेज़िम नृत्य करें – जो महाराष्ट्र का एक नृत्य है.
