जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है, काल भैरव अष्टकम, भगवान काल भैरव को समर्पित है.
Source : DB News Update
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Kaal Bhairav Ashtakam : काल भैरव अष्टकम महादेव के उग्र रूप भगवान काल भैरव को समर्पित एक स्तोत्र है. शास्त्रों में इसके पाठ का खास महत्व बताया गया है. मान्यता है कि काल भैरव अष्टकम का पाठ करने से जातक को भय और चिंता से मुक्ति मिलती है. साथ ही, जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
इसका विधि पूर्वक पाठ करने से जातक को ग्रहों के बुरे प्रभावों से भी राहत मिल सकती है और जीवन में सुख-समृद्धि हासिल होती है. साथ ही, काल भैरव अष्टकम के पाठ से आपको सफलता जीवन में सफलता प्राप्त हो सकती है और कार्यों में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं.
कालभैरव: रूप को डिकोड करना
कालभैरव का वाहन शवाना (कुत्ता) है । यह भगवान शिव का सबसे भयानक रूप है। कालभैरव मृत्यु/समय के देवता हैं। आध्यात्मिकता में, ‘मृत्यु’ और ‘समय’ शब्द प्रतीकात्मक हैं। शवाना शब्द ‘श्वा’ और ‘न’ से मिलकर बना है। वैदिक साहित्य में, शवाना का अर्थ है कल और परसों, और न का अर्थ है ‘नहीं’। इसलिए शवाना का अर्थ है वह जो न तो परसों है और न ही कल, वह जो केवल वर्तमान क्षण में है।
कालभैरव का आध्यात्मिक महत्व
संतों की मानें तो उनका तर्क यह है कि कालभैरव वह हैं जो न तो बीते कल के हैं और न ही आने वाले कल के. वे सदा वर्तमान में विद्यमान हैं. साथ ही, भगवान कालभैरव काशी नगर के स्वामी हैं. इसका भी एक प्रतीकात्मक अर्थ है. तंत्र में, काशी को आज्ञा चक्र के रूप में जाना जाता है , जो भौंहों के बीच स्थित होता है.
कालभैरव का चित्रण विकराल (विशाल और भयावह) है. यह दर्शाता है कि समय सब कुछ नष्ट कर देता है. इस संसार में जो कुछ भी मौजूद है, वह समय के साथ घुलमिल जाएगा और नष्ट हो जाएगा. हजारों वर्ष पूर्व के राजा और साम्राज्य, वर्तमान में मौजूद चमत्कार और भविष्य में आने वाली हर चीज – समय बीतने के साथ ये सब नष्ट हो जाएंगे.
और समय कहाँ है? यह न तो अतीत में है और न ही भविष्य में. यह वर्तमान क्षण में है. और जब समय और वर्तमान क्षण का यह अहसास होता है, तो हमारा आज्ञा चक्र (हमारे शरीर में ज्ञान का केंद्र) तीव्र हो जाता है, जो हमारे भीतर भगवान कालभैरव की उपस्थिति का संकेत देता है. यह हमें समाधि (ध्यान) की सबसे गहरी अवस्था तक ले जाता है, जिसे भैरव अवस्था भी कहा जाता है.
वर्तमान क्षण की पूर्ण जागरूकता का प्रती है
कालभैरव अष्टकम में , जहाँ आदि शंकराचार्य ने भगवान कालभैरव को काशी का स्वामी कहकर उनकी स्तुति की है, उनका तात्पर्य वास्तव में आज्ञा चक्र से है – जो वर्तमान क्षण की पूर्ण जागरूकता का प्रतीक है. यह सभी देवताओं (दिव्य शक्तियों) द्वारा भी प्रशंसित है. आदि शंकराचार्य कहते हैं कि यहाँ तक कि भगवान, वे दिव्य शक्तियाँ भी, उस आनंद और समाधि की अवस्था की लालसा में कालभैरव के चरणों में नतमस्तक होती हैं.
कालभैरव अष्टकम का जाप करने के लाभ
कालभैरव की अवस्था का स्मरण मात्र , प्रतिदिन कालभैरव अष्टकम का जाप करने से हमें जीवन का ज्ञान प्राप्त होता है और मोक्ष की ओर अग्रसर होता है. इससे हमें ऐसे पुण्य प्राप्त होते हैं जो अज्ञात, अकल्पनीय और अमूर्त हैं. इस अष्टकम का जाप करने से शोक, मोह, दैन्य, लोभ, क्रोध और तप से मुक्ति मिलती है.
भूत संघ नायक हैं भगवान काल भैरव
विद्वानों के विचार पर गौर करें तो उनका कहना है कि भगवान कालभैरव को भूत संघ नायक हैं , यानी पंचभूतों के स्वामी (पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश). वे जीवन में सभी प्रकार की वांछित श्रेष्ठता और ज्ञान प्रदान करते हैं. विद्या और ज्ञान में अंतर होता है और यह आनंद की अवस्था व्यक्ति को सभी वांछित श्रेष्ठता प्रदान करती है। कालभैरव का स्मरण करने से व्यक्ति समाधि की उस परम अवस्था को प्राप्त करता है , जहाँ वह सभी चिंताओं से मुक्त हो जाता है, किसी भी बात से विचलित नहीं होता.
काल भैरव अष्टकम
देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं
व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् , नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं
नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्, कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं
श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्, भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं
भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्, विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं
कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्, स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं
नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरंजनम्, मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं
दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्, अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।
भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकं
काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्, नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।
कालभैरवाष्टकं पठंति ये मनोहरं
ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम्, शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं
प्रयान्ति कालभैरवांघ्रिसन्निधिं नरा ध्रुवम्।
इथि श्रीमास्चंकराचार्य विरचितं कालभैरवाष्टकम् सम्पूर्णम।
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
