गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को है. इस दिन गुरु दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष उपाय कर सकते हैं, इससे न सिर्फ जीवन संवरता बल्कि संकट के बादल भी छट जाते हैं.
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Guru Purnima 2025: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति सभी ग्रहों में सबसे शुभ ग्रह माना गया हैं. देवताओं के गुरु होने के कारण वे देवगुरु कहलाते हैं और ग्रहों में सबसे विशाल होने के कारण वे गुरु ग्रह के रूप में प्रसिद्ध हैं. गुरु पूर्णिमा का दिन भी गुरुजन को समर्पित है. इस साल गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई 2025 को है. कुंडली में अगर गुरु दोष (Guru Dosh) है तो गुरु पूर्णिमा पर कुछ खास उपाय कर इससे मुक्ति पाई जा सकती है.
कमजोर गुरु के प्रभाव
- कुंडली में गुरु कमजोर स्थिति में हो तो उसे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है.
- जातक में आत्मविश्वास की कमी होती है. व्यक्ति को फैसले लेने में भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता है.
- कुंडली में गुरु कमजोर हों तो व्यक्ति चाहकर भी सभी चीजों का सुख नहीं भोग पाता है.
- संकट की स्थिति में उसे मदद नहीं मिल पाती है. एकाग्रता की कमी होती है.
- संपत्ति से जुड़े विवाद का सामना करना पड़ सकता है.
- व्यक्ति नैतिक और आध्यात्मिक रूप से भ्रष्ट होता है. वह धार्मिक मार्ग पर नहीं चलता है.
- वैवाहिक जीवन में भी अड़चनें आती हैं.
आध्यात्मिक विकास का कारक है ग्रह ?
गुरु शिक्षा, करियर, विवाह, संतान, धन और समृद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु, आध्यात्मिक विकास का कारक ग्रह है. कुंडली में गुरु दूषित हो तो इन क्षेत्रों पर व्यक्ति को परेशानी झेलनी पड़ती है. करियर में बाधाएं आती है, विवाह-संतान में विलंब, शिक्षा पर नकारात्मक असर और धन का संकट घहराने लगता है.
गुरु पूर्णिमा पर जरूर करें यह उपाय
- करियर में उन्नति पाना चाहते हैं, तो गुरु पूर्णिमा पर पीले वस्त्र, पीली दाल, केसर, घी, पीतल, पीले रंग की मिठाई आदि का दान कर सकते हैं.
- मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान लक्ष्मीनारायण का पूजन किया जाता है. इस दिन लक्ष्मीनारायण मंदिर में जाकर नारियल अर्पित करना चाहिए. मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ऐसा करने से रूके हुए कार्य पूर्ण हो जाते हैं.
- गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है. इसलिए इस विशेष दिन पर किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को पीली दाल, पीले रंग का वस्त्र या इस रंग की मिठाई का दान करें. ऐसा करने से जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं.
- गुरु दोष के दुष्प्रभाव से मुक्ति या प्रभाव को कम करने के लिए गुरु पूर्णिमा पर अपने पूजा घर में गुरु यंत्र की स्थापना करके पूजन करें. उसके बाद हर गुरुवार को विधिपूर्वक पूजा करें. इससे आपके जीवन में गुरु ग्रह का सकारात्मक प्रभाव बढ़ेगा, आपकी तरक्की होगी. कमजोर गुरु ग्रह मजबूत होगा.
गुरु दोष के दुष्प्रभाव
गुरु दोष से प्रभावित जातक को विवाह में विलंब या बाधा हो सकती है, संतान सुख में समस्या हो सकती है, शिक्षा और करियर में रुकावट हो सकती है, आध्यात्मिक विकास में रुकावट हो सकती है, झूठे आरोप या मान-सम्मान में हानि हो सकती है. इसके अलावा पैतृक संपत्ति से वंचित रहना, मानसिक अस्थिरता और गलत निर्णय से भी जूझना पड़ सकता है.
गुरु दोष से बचने के सरल उपाय
गुरु दोष से बचने के लिए गुरु पूर्णिमा पर व्रत रखें, पीले वस्त्र पहनें और व्रती आचरण करें. हर गुरुवार विष्णु जी और देव गुरु बृहस्पति की पूजा करें. साथ ही बृहस्पति बीज मंत्र ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः’ का 108 बार जाप करें. अपने जीवन के सच्चे गुरु (शिक्षक/आध्यात्मिक गुरु) का सम्मान करें. उन्हें दक्षिणा या वस्त्र दान करें. विशेषकर गुरुवार के दिन गाय को चने की दाल, गुड़ आदि खिलाएं. गुरुवार को पीपल पर जल चढ़ाएँ और दीपक जलाएँ. इस दिन पीली वस्तुएँ दान करें, गरीब कन्याओं को भोजन और वस्त्र दें और जरूरतमंद छात्रों की सहायता करें. कुंडली में गुरु दोष से मुक्ति पाना है, तो गुरु पूर्णिमा पर सुबह केले के पेड़ में जल में हल्दी मिलाकर अर्पित करें. पीले फूल, चने की दाल चढ़ाएं और शाम को घी का दीपक लगाएं. इस दौरान ‘ॐ बृं बृहस्पते नम:’ मंत्र का जाप करें.
गुरु के उपाय
- 5 गुरुवार व्रत का संकल्प लें और हर गुरुवार विष्णु जी और देव गुरु बृहस्पति की पूजा करें.
- गुरु पूर्णिमा पर पीली दाल, पीले रंग के वस्त्र, केसर, केला आदि का दान करना चाहिए. रक्तदान करें.
- नियमित रूप से गुरु के मंत्र ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः या ऊं बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जप करें.
- कुंडली में गुरु दोष से मुक्ति पाना है तो गुरु पूर्णिमा पर सुबह केले के पेड़ में जल में हल्दी मिलाकर अर्पित करें
- केले के पेड़ के नीचे गाय के घी का दीया जलाएं.
- रिश्तों में ईमानदारी बरतें, किसी तीसरे पर नजर न डालें.
- घर में बृहस्पति यंत्र को स्थापित करें और बृहस्पति से जुड़े मंत्रों और स्तोत्र का पाठ करें.
- गुरुजनों, शिक्षकों, ब्राह्मणों का सम्मान करें.
- गोशाला में जाकर गायों की सेवा करें.
- किसी ज्योतिष से सलाह लेने के बाद पुखराज रत्न का धारण कर सकते हैं.
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