US Presidential Election: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कमला हैरिस की उम्मीदवारी को चुनावी विश्लेशकों ने डेमोक्रेटिक के लिए फायदेमंद बताया है. इसकी दो वजहें भी बताई है.
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By : DB News Update | Edited By: Supriya
US Presidential Election: अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए 5 नवंबर को चुनाव होने हैं, इसी बीच रविवार को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन अपनी दावेदारी से पीछ हट गए हैं. इसके साथ ही बाइडेन ने उपराष्ट्रपति कमला हैरिस का समर्थन किया है. अब इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि नवंबर में होने वाले चुनाव में कमला हैरिस रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के सामने हो सकती हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने रविवार को घोषणा की है कि वह राष्ट्रपति पद का आगामी चुनाव नहीं लड़ेंगे. बाइडन ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ से हटने का एलान करते हुए कहा कि ‘‘यह मेरी पार्टी और देश के सर्वोत्तम हित में है.” बाइडन (81) का यह निर्णय अमेरिका में पांच नवंबर को होने वाले मतदान से चार महीने पहले आया है.
जून के अंत में अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी एवं देश के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बहस में खराब प्रदर्शन के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता पिछले कई हफ्तों से बाइडन पर मुकाबले से हटने का दबाव बना रहे थे जिसके बाद उन्होंने यह फैसला किया है.
साल की शुरुआत में हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी में बाइडेन ने 19-22 अगस्त के बीच होने वाले डेमोक्रेटिक सम्मेलन के लिए सभी प्रतिनिधियो में से करीब 95 प्रतिशत जीत हासिल की थी. ऐसे में माना जा रहा है कि बाइडेन के समर्थन के बाद ये प्रतिनिधि कमला हैरिस का भी समर्थन करेंगे. बाइडेन की दावेदारी से पीछे हटने से पहले अमेरिका के एबीसी न्यूज ने इप्सोस पोल का आयोज किया था, जिसमें डेमोक्रेटिक मतदाताओं ने 60-39 से बाइडेन के हटने का समर्थन किया.
ट्रंप के सामने बाइडेन हुए पीछे
इसके अलावा ट्रंप की बात की जाए तो 15-18 जुलाई के बीच रिपब्लिकन सम्मेलन के बाद ट्रंप का वोट प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद जताई गई है. राष्ट्रीय सर्वेक्षणों से बता चला है कि ट्रंप की बाइडेन पर बढ़त 13 जुलाई को 1.9 अंक से बढ़कर 3.2 अंक हो गई है. वोटों की हिस्सेदारी ट्रंप के लिए 43.5 प्रतिशत और बाइडेन के लिए 40.2 प्रतिशत आंकी गई है. दरअसल , अमेरिका में राष्ट्रपति पद का फैसला वोट से नहीं बल्कि ईवी से होता है. ऐसे में यह अनुमान लगाया गया कि ईवी प्रणाली में बाइडेन काफी पीछे चल रहे हैं.
दो चीजों से हैरिस को मिलेगा फायदा
मेलबर्न विश्वविद्यालय के चुनावी विश्लेषक एड्रियन ब्यूमोंट ने कमला हैरिस की उम्मीदवारी पर अपना विश्लेषण दिया है. इसमें उन्होंने कहा कि अभी हैरिस बनाम ट्रंप चुनाव का विश्लेषण करना जल्दबाजी होगी, फिलहाल उन्होंने हैरिस की उम्मीदवारी को उचित बताया है. चुनावी विश्लेषक ने दो चीजों की तरफ ध्यान आकर्षित किया है. उन्होंने कहा कि दो चीजें हैं जिनकी वजह से हैरिस को फायदा हो सकता है.
उम्र के मामले में हैरिस को मिलेगी बढ़त
एड्रियन ब्यूमोंट ने कहा कि अमेरिका में आर्थिक आंकड़ों में सुधार हुआ है और मुद्रास्फीति में गिरावट आई है, इसका फायदा सीधे तौर पर हैरिस को मिल सकता है. इसके अलावा बाइडेन चुनाव तक 82 साल के हो चुके हैं, जबकि हैरिस उस समय 60 साल की रहेंगी. दूसरी तरफ ट्रंप 78 साल के हैं, ऐसे में बाइडेन के लिए जो उम्र का मसला था, वह हैरिस के लिए अब फायदेमंद हो सकता है. फिर भी ऐसे उम्मीदवार का चयन करना जिसका प्राइमरी में चयन नहीं हुआ यह काफी जोखिम भरा हो सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति के पुनर्निर्वाचन की दूसरी घटना
बताया जा रहा है कि पांच नवंबर में होने वाले चुनाव में 2025 से चार वर्षों के लिए राष्ट्रपति का चुनाव होना है. 1968 के बाद यह पहला मौका है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पुनर्निर्वाचन की दौड़ से खुद को अलग कर लिया है. इससे पहले 1968 में राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने दोबारा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था. खराब स्वास्थ्य और स्मृति दोष के चलते बाइडन पर उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी का दावेदारी छोड़ने के लिए दबाव बढ़ता जा रहा था.
लिहाजा बाइडन का नाम उस लिस्ट में जुड़ना तय है, जो अमेरिकी राष्टपति के पुनर्निर्वाचन की प्रक्रिया का हिस्सा बन जाएगी और उनका नाम अमेरिका के इतिहास में राष्ट्रपति चुनाव न लड़ने वालों की लिस्ट में जुड़ जाएगा.
