Ratna Jyotish: रत्नों नौकरी, व्यापार, शादी, धन लाभ और ग्रहों की शुभता पाने के लिए पहने जाते हैं लेकिन कौन-कौन से रत्न एकसाथ नहीं पहनना चाहिए, ये जान लें नहीं तो फायदे की जगह नुकसान होता है.
Source : DB News Update
By : एस्ट्रोलॉजर पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By – Supriya
Gemology: रत्न शास्त्र के अनुसार रत्नों में ग्रहों की अशुभता दूर करने की ताकत होती है. कुंडली में कोई ग्रह (Planet) कमजोर हो तो भी रत्न पहनने की सलाह दी जाती है ताकि उसकी मदद से वो ग्रह के शुभ प्रभाव मिल सके. जन्म कुण्डली में जो ग्रह निर्बल तथा शुभ फल देने वाला हो उसे प्रसन्न करने के लिए उस ग्रह का रत्न विधिवत धारण करने का उपदेश शास्त्रों में किया गया है. जिस ग्रह की विंशोत्तरी महादशा या अंतर्दशा हो और वह अस्त, नीच या शत्रु राशिस्थ, लग्न से 6, 8या 12वें भाव में हो, पाप ग्रह से युक्त या दृष्ट हो, षड्बल विहीन हो, उस के रत्न को विधि अनुसार धारण करने से, या उसके उपाय करने से वह अपने अशुभ फल को त्याग कर शुभ फल प्रदान करता है.
रत्न धारण (Gemstone benefit) करने के लिए सही दिन, समय और विधि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. आमतौर पर देखने में आता है कि लोग एक साथ कई रत्न पहनते हैं लेकिन कुछ ऐसे रत्न हैं जिन्हें एक साथ धारण नहीं करना चाहिए, इससे अशुभ परिणाम मिलता है.
कौन-कौन से रत्न एक साथ नहीं पहनें (Gemstone Wearing Rules)
- माणिक्य (Manik) के साथ हीरा, नीलम, गोमेद, लहसुनिया न पहनें.
- पुखराज (Pukhraj) के साथ हीरा, पन्ना, नीलम, गोमेद धारण न करें
- लहसुनिया (Lehsuniya) के साथ माणिक्य, मोती, पुखराज, मूंगा न पहनें.
- नीलम (Neelam) के साथ माणिक्य, मूंगा, मोती, पुखराज वर्जित है.
- मोती (Moti) के साथ हीरा, पन्ना, नीलम, गोमेद, लहसुनिया वर्जित है.
- मूंगा (Munga)के साथ पन्ना, हीरा, गोमेद, नीलम,लहसुनिया नहीं पहनना चाहिए
- पन्ना (Panna) के साथ पुखराज, मूंगा, मोती वर्जित है.
- हीरे (Diamond) के साथ माणिक्य, मोती, मूंगा, पुखराज पहनना अशुभ होता है.
- गोमेद (Gomed) के साथ माणिक्य, पुखराज, मूंगा, मोती नहीं पहनना चाहिए.
रत्न पहनने के नियम (Gemstone Wearing Rules)
रत्न ज्योतिष के अनुसार रत्न सुबह के समय धारण करना चाहिए, रात या शाम को नहीं.
अमावस्या, ग्रहण वाले दिन नया रत्न धारण नहीं करना चाहिए.
उत्तरायण में रत्न पहनने से कई लाभ मिलते हैं, इसके लिए किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष का चयन करें.
रत्न धारण करने का महत्व (Gemstone Significance)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, किसी रत्न को पहनने का मतलब है उस रत्न से जुड़े ग्रह को एनर्जी देना. माना जाता है कि रत्न पहनने से ग्रह-नक्षत्र का दोष और नेगेटिव एनर्जी कम होती है. शादी, व्यापार में वृद्धि, नौकरी, प्रमोशन, सुखी वैवाहिक जीवन के लिए लोग रत्न पहनते हैं.
रत्नों कि संख्या असख्य, पर 84 उपरत्नों का बता रहे महत्व
नवरत्न :- माणिक्य, नीलम, हीरा, पुखराज, पन्ना, मूंगा, मोती, गोमेद, लहसुनिया.
84 हैं उपरत्न
लालड़ी, फिरोजा, एमनी, जबरजदद, ओपल, तुरमली, नरम, सुनैला, कटैला, संग-सितारा, सफेद बिल्लोर, गोदंती, तामड़ा, लुधिआ, मरियम, मकनातीस, सिंदूरिया, नीली, धुनेला, बैरूंज, मरगज, पित्तोनिया, बांसी, दुरवेजफ, सुलेमानी, आलेमानी, जजेमानी, सिवार, तुरसावा, अहवा, आबरी, लाजवर्त, कुदरत, चिट्टी, संग-सन, लारू, मारवार, दाने- फिरंग, कसौटी, दारचना, हकीक, हालन, सीजरी, मुबेनज्फ, कहरुवा, झना, संग बसरी, दांतला, मकड़ा, संगीया, गुदडी़, कामला, सिफरी, हरीद, हवास, सींगली, डेड़ी, हकीक, गौरी, सीया, सीमाक, मूसा, पनघन, अम्लीय, डूर, खारा, लिलियर, पारा-जहर, रवात, जहर-मोहरा, सेलखड़ी, सुरमा, सोनामाखी, हजरते-ऊद और पारस.
नोट- उपरोक्त उपरत्नों में से कुछ उपरत्न ही आज कल प्रचलित हैं. किस ग्रह का कौन सा रत्न है, उसे कब और किस प्रकार धारण करना चाहिए, रत्नों और उपरत्नों की और क्या विशेषताएं हैं, किस रोग में किस रत्न को धारण करने से लाभ होगा, इत्यादि प्रश्नों का शास्त्रों पर आधारित उत्तर इस लेख में प्रस्तुत है जो रत्नों से सम्बंधित आपकी सभी जिज्ञासाओं को शांत करेगा.
रत्नों की शक्ति
रत्नों में अद्भुत शक्ति होती है. रत्न अगर किसी के भाग्य को आसमन पर पहुंचा सकता है तो किसी को आसमान से ज़मीन पर लाने की क्षमता भी रखता है. रत्न के विपरीत प्रभाव से बचने के लिए सही प्रकार से जांच करवाकर ही रत्न धारण करना चाहिए. ग्रहों की स्थिति के अनुसार रत्न धारण करना चाहिए. रत्न धारण करते समय ग्रहों की दशा एवं अन्तर्दशा का भी ख्याल रखना चाहिए. रत्न पहनते समय मात्रा का ख्याल रखना आवश्यक होता है. अगर मात्रा सही नहीं हो, तो फल प्राप्ति में विलम्ब होता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि dbnewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
