सूरजपाल की जवानी की कहानी, उसके दोस्त की जुबानी
By -DB News Update| Edited by -supriya
लखनऊ. ‘बाबा हमारे साथ पढ़े थे. आगरा में रहे थे हम. वहां पर उन्होंने अपने साले से गोद ली हुई लड़की को भी अपने साथ रखा था. अचानक वह खत्म हो गई तो यह कहा गया कि भोले बाबा उसे सही कर देंगे. दो दिन बाद उसके शव से बदबू आने लगी.
इसके बाद भोले बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था. उक्त खुलासा हाथरस में सत्संग करने वाले भोले बाबा उर्फ सूरजपाल के साथ लंबे समय तक यूपी पुलिस में तैनात रहे सब-इंस्पेक्टर राम सनेहि राजपूत ने किए हैं।
‘गोपीकाएं बहुत थीं बाबा की’
भगवान कृष्ण के अवतार हैं तो क्षीरसागर में चले जाएं. यहां क्यों बैठे हैं अगर सुदर्शन चक्र है. एक तो शादी इनकी थी. पता नहीं बाकी गोपीकाएं बहुत थी. यह कृष्णा हो गए थे कोई चमत्कार नहीं है. यह सब ढकोसला है आडंबर है. 90 के दशक में हमारे ट्रांसफर कानपुर में हुए थे फिर मेरी पोस्टिंग हो गई थी उनकी पोस्टिंग इटावा हो गई थी.
उन्होंने कहा, 20 साल से जानते हैं. शक्ति पहले भी नहीं थी और अब भी नहीं है. यह तो लकीर का फकीर है. बाबा के खिलाफ़ शाहगंज थाने में मुकदमा भी दर्ज हुआ था. क्योंकि उन्होंने डेडबॉडी जीवित करने का दावा किया था और घर मे ही शव रखा था.’ दो दिन बाद उसके शव से बदबू आने लगी. इसके बाद भोले बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था. काफी पुरानी बात है मैंने सुना था. उन्होंने सरेंडर किया था शायद.’
‘बाबा के खिलाफ थे चार से पांच मुकदमे’
इसके अलावा उन्होंने कहा कि वह कोर्ट मौर्य थे. पैरोकार नहीं थे, जो कोर्ट के अंदर काम करते हैं. एक मकान था. उस समय उनके पास, उसी में यह रहते थे और लोग भी रहते थे. वहां पर उनके अपने लोग रहते थे. कभी कभार सत्संग होने की जानकारी मुझे मिली थी. लेकिन मैंने कभी देखा नहीं था. उनकी जमानत आसन सिंह नाम के एक शख्स ने करवाई थी. मेरे सुनने में आया था कि चार-पांच मुकदमा और हुए थे. लेकिन मैं इसके लिए पुख्ता नहीं कह सकता.’
‘बाबा के पास कोई शक्ति नहीं’
राम सनेहि राजपूत ने बताया, ‘पहले सत्संग दिन और रात दोनों समय में होता था. यहां पर रात में बहुत गड़बड़ होती थी. दुनिया लकीर की फकीर है. लोग भोले बाबा के दर्शन करने जाते थे कि विष्णु के अवतार हैं यहां पर पता नहीं क्या करते थे. शुरू से ही मैंने काम किया है. कानपुर में यह हमारे पास भी आते थे. हम कानपुर में ही थे तब कोई भक्ति शक्ति कुछ नहीं थी. आज भी क्या है. सुदर्शन चक्र कौन देखता है.’

