400 पार का नारा देश में फेल, आरएसएस नाराज, नसीहत देते हुए मर्यादा का पालन करते हुए कार्य करने के लिए दिया गया था संदेश
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Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में 400 पार का नारा लगा रही बीजेपी बहुमत का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई है। इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी 240 सीटों पर ही सिमट गई। चुनाव के नतीजों से साफ हो गया हो गया कि इस बार पार्टी को उत्तर प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों में भी काफी नुकसान हुआ है। जिसके बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने केंद्र सरकार को नसीहत भी दी कि जो मर्यादा का पालन करते हुए कार्य करता है लेकिन अहंकार नहीं करता है वही सही में सेवक कहलाता है।
संघ की समन्वय बैठक पर सबकी नजरें
संघ प्रमुख के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में अटकलें तेज हो गईं कि बीजेपी और संघ के बीज कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसे में अब अगले महीने होने वाली संघ की समन्वय बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं क्योंकि इसमें बीजेपी संगठन महासचिव भी शामिल होंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि संघ और बीजेपी के रिश्तों में आई खटास की जो बातें हो रही हैं वो भी खत्म हो जाएंगी।
कहां होगी RSS की समन्वय बैठक
आरएसएस की समन्वय बैठक अगले महीने 31 जुलाई से 2 अगस्त तक होगी। ये बैठक केरल में होने जा रही है। इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार केरल में त्रिशूर सीट पर जीत हासिल करके सबको चौंका दिया। ऐसे में अब केरल में होने वाली इस बैठक से विरोधियों को एक पैगाम भी जाएगा कि संघ और बीजेपी दोनों के रिश्ते किसी भी तरह की कोई खटास नहीं आई है। वहीं इससे बीजेपी को साउथ में अपनी पकड़ भी मजबूत करने में मदद मिलेगी।
तीन राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव
आरएसएस की इस समन्वय बैठक में लोकसभा चुनाव में मिली कम सीटों के साथ ही आने वाले विधानसभा चुनाव पर भी चर्चा हो सकती है। क्योंकि इससे पहले जब संघ की ये बैठक साल 2023 के सितंबर में हुई थी और उसमें लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई थी। बता दें कि हरियाणा, महाराष्ट्र और फिर झारखंड विधानसभा के लिए चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में अब लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने में जुट गई है।
भाजपा) का सपना हमेशा अधूरा ही रहेगा- सीएम
तिरुवनंतपुरम में 11 अक्टूबर को केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा कि राज्य की सत्ता में आने का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सपना हमेशा अधूरा ही रहेगा क्योंकि राज्य का धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना इस दक्षिणपंथी पार्टी के अपने राजनीतिक आधार को बढ़ाने के प्रयासों के आड़े आएगा। सतीशन ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखने वाली कांग्रेस पार्टी के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कोई बड़ा खतरा नहीं हैं।
सतीशन ने राज्य में तीन विधानसभा सीट और तिरुवनंतपुरम नगर निगम में जीत दर्ज कर चुनावी बढ़त हासिल करने वाली भाजपा की सफलता का श्रेय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की राजनीतिक विफलताओं को दिया। उन्होंने दोनों दलों के बीच ‘‘नापाक गठजोड़’’ का भी आरोप लगाया।
उन्होंने शुक्रवार को ‘पीटीआई-वीडियो’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव और तीन विधानसभा सीट जीतना माकपा (तत्कालीन सत्तारूढ़) द्वारा (भाजपा को) थाली में सजाकर दिया गया उपहार था।’’
सतीशन ने कहा कि भाजपा की इन सफलताओं का मतलब यह नहीं है कि केरलम के राजनीतिक परिदृश्य में कोई बड़ा बदलाव आ गया है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक आधार पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिशों के बावजूद पार्टी की संभावनाएं सीमित हैं क्योंकि राज्य धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखे हुए है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि भाजपा कभी केरलम में सत्ता में आएगी। उन्हें अधिकतम 15 प्रतिशत या उससे कम वोट मिल सकते हैं, ज्यादा से ज्यादा 20 प्रतिशत से नीचे ही रहेगा, इससे अधिक नहीं, क्योंकि केरलम धर्मनिरपेक्ष है।’’ सतीशन के अनुसार, भाजपा से मिलने वाली चुनौती केवल चुनावी नहीं बल्कि वैचारिक भी है। उन्होंने भाजपा और संघ परिवार पर समुदायों के बीच मतभेदों का फायदा उठाकर केरलम के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस साल अप्रैल में हुए चुनाव प्रचार के दौरान भी सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ कड़ा रुख बनाए रखा और चुनावी फायदे के लिए अपने रुख से कोई समझौता नहीं किया।
यह पूछे जाने पर कि भाजपा के बढ़ते जनसमर्थन की वजह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता है या आरएसएस की संगठनात्मक ताकत, इस पर सतीशन ने कहा कि पार्टी के विस्तार में दोनों कारकों का योगदान रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी के सत्ता में आने के बाद से वे कई सालों से शासन कर रहे हैं, यह एक कारक हो सकता है। वहीं आरएसएस और संघ परिवार लोगों के बीच मतभेद पैदा करने और ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।’’
