शारदीय नवरात्र में जरूर अर्पित करें यह सामग्री, जल्द मिलेगा मां दुर्गा का आशीर्वाद
By : पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Shardiya Navratri: हिंदू धर्म के अनुसार शारदीय नवरात्र के त्योहार को लेकर हर सनातन धर्मावलंबी को इंतजार रहता है. इस त्योहार को बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस दौरान मां दुर्गा की मूर्ति घर या फिर किसी मंदिर स्थापित रहती है. उन देवी मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की कतार लगी रहती है. इन 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने का विधान है. शारदीय नवरात्र आश्विन माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो रही है और नवमी तिथि तक मनाई जाएगी.
इस बार शारदीय नवरात्र 22 सितंबर से शुरू होने जा रही है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष शारदीय नवरात्र की शुरुआत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है.
नियम और सात्विकता की सावधानी जरूरी
साधना के समय घर पर पूरी तरह सात्विक का माहौल रहे. इस बात का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है कि घर पर मांस, मदिरा या तामसिक भोजन न बनें. इसके अलावा शास्त्रों में जैसा वर्णन मिलता है कि देवताओं की कृपा तभी फलित होती है जब मन में संदेह न हो. पूरी श्रद्धा के साथ किया गया छोटा सा उपाय भी चमत्कार दिखा सकता है.
नवार्ण मंत्र की साधना का रहस्य
नवार्ण मंत्र “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” माँ दुर्गा का सबसे शक्तिशाली और चमत्कारी महामंत्र माना गया है. इस नौ अक्षरों वाले मंत्र में माँ सरस्वती (ऐं), माँ लक्ष्मी (ह्रीं) और माँ काली (क्लीं) तीनों महाशक्तियों की ऊर्जा समाहित है. शास्त्रों के अनुसार, नवार्ण मंत्र की सही विधि से साधना करने पर साधक को ज्ञान, ऐश्वर्य, बल और सभी संकटों से मुक्ति मिलती है.
सरल और सटीक साधना विधि
साधना का शुभ समय और स्थान निश्चित है. इस मंत्र की साधना किसी भी शुक्रवार, महाष्टमी, नवरात्रि (शारदीय, चैत्र या गुप्त नवरात्रि) या ग्रहण काल से शुरू करना सबसे उत्तम माना जाता है और ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:00 से 6:00 बजे) या रात्रि काल (रात 9:00 बजे के बाद) इस साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि साधना कक्ष में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं होना चाहिए.
साधना करने की विधि
स्नान करके साफ-सुथरे लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें.
पूजा के लिए कुश (घास) या ऊन का लाल आसन इस्तेमाल करें.
मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.
माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर के सामने गाय के घी का एक दीपक जलाएं जो पूरी साधना के दौरान जलता रहना चाहिए.
एक तांबे के पात्र में जल भरकर रखें.
सीधे हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत (चावल) और एक फूल लेकर मन ही मन संकल्प करें. “हे माँ दुर्गा, मैं (अपना नाम बोलें) आपकी कृपा पाने और (अपनी मनोकामना बोलें) के लिए नवार्ण मंत्र का जाप कर रहा या कर रही हूँ, इसे स्वीकार करें.” इसके बाद जल जमीन पर छोड़ दें.
साधना की निर्विघ्न पूर्णता के लिए सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और “ॐ गं गणपतये नमः” का 11 बार जाप करें.
यदि आपने किसी गुरु से गुरु मंत्र लिया है तो गुरु मंत्र का जप करें और उनका आशीर्वाद लें.
अब स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से नवार्ण मंत्र का जाप शुरू करें.
मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चेनोट: मूल मंत्र में ‘ॐ’ (ओम्) लगाकर जाप करना अधिक कल्याणकारी माना जाता है.
जाप पूरा होने के बाद माला को आसन के नीचे स्पर्श कराकर माथे से लगाएं.
माँ दुर्गा की कपूर से आरती करें और भोग (मिश्री या मखाने) अर्पित करें.
मातारानी को ये अर्पण करने से मिलता है मनचाहा फल
लौंग
अपनी उम्र के बराबर लौंग लेकर उसे काले या लाल धागे में पिरोकर माला बना लें. नवरात्र में किसी भी दिन इस माला को मातारानी को अर्पित करें और प्रार्थना करें. लगभग 1 से 3 महीने के अंदर आपकी मनोकामना पूरी होगी.
सुपारी
नवरात्र के दिनों में पूजा की सुपारी का भी खास महत्व है. नवरात्र में एक सुपारी लें, उसके चारों ओर सिंदूर लगाकर पीले कपड़े में बांधें और मां दुर्गा को अर्पित कर दें. इससे शीघ्र विवाह का वरदान प्राप्त होता है. विवाह के बाद भी इस सुपारी को अपने पास ही रखे रहना चाहिए.
हल्दी
नवरात्र में दो हल्दी की गांठ का एक अलग ही महत्व है. हल्दी गांठ को देवी के चरणों में अर्पित करें और श्री सूक्त का पाठ करें. फिर इन्हें लाल कपड़े में लपेटकर धन की जगह पर रख दें, इससे धन की समस्या दूर हो जाएगी.
पान के पत्ते
पूजन के लिए पान के पत्ते पवित्रता का प्रतीक हैं. नवरात्र के दिनों में 27 पत्तों की माला बनाकर देवी को अर्पित करें और रोजगार की कामना करें. रोजगार मिलने के बाद माला को जल में प्रवाहित कर दें.
नारियल
नारियल को भी नवरात्र के दिनों में बहुत शुभ माना गया है. एक पानी वाला नारियल लेकर देवी के समक्ष बैठें और विशेष मंत्र का जाप करें. फिर उसे बहते जल में प्रवाहित कर दें इससे बुरी ग्रह दशाएं दूर होती हैं.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
