Prayagraj Mahakumbh: प्रयागराज महाकुंभ की तैयारियां तेज हो गई हैं, अखाड़ा परिषद ने उर्दू शब्द ‘शाही स्नान’ को लेकर उठाया सवाल कहा ‘राजसी स्नान’ का होगा प्रयोग
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By : सुप्रिया
Prayag Kumbh : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ 2024 के आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. इसी बीच अखाड़ा परिषद के एक बयान ने धर्म प्रेमियों के बीच खलबली मचा दी है और वह बयान इस समय खास चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, अखाड़ा परिषद के रवींद्र पुरी ने शाही शब्द को लेकर अापत्ति की है और शाही शब्द को एक उर्दू शब्द कहा है और इसे बदलने पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि शाही और राजसी में कोई अंतर नहीं है. बस राजसी शब्द “देव वाणी’ संस्कृत का शब्द है. यह समृद्ध सनातनी परंपराओं का प्रतीक है. रवींद्र पुरी ने कहा कि शाही शब्द गुलामी का प्रतीक है और इसे मुगलों ने गढ़ा था. इस नाम को बदलने का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे.
सनातन धर्म के खिलाफ है शाही शब्द
अखाड़ा परिषद की ओर से आए बयान में कहा गया है कि स्नान का नाम बदले जाने का उद्देश्य उर्दू शब्द ‘शाही’ की जगह ‘राजसी’ रखना है। यह सनातन परंपराओं से अधिक मेल खाता है। महाकुंभ अगले साल की शुरुआत में प्रयागराज में आयोजित किया जाएगा। प्रयागराज दौरे पर आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी महाकुंभ के आयोजन तैयारियों की समीक्षा की।
मुगलों की ओर से गढ़ा गया शब्द
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी का इस संबंध में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन को मुगलों की ओर से गढ़े गए शब्द से जोड़ने पर नाराजगी जताई. रवींद्र पुरी ने कहा कि शाही स्नान को राजसी स्नान (राजाओं की ओर से किया जाने वाला स्नान) कहा जाना चाहिए. रवींद्र पुरी देश में 13 अखाड़ों या धार्मिक मठों के प्रमुख हैं.
भारत धर्म निरपेक्ष देश है- रवीन्द्र पुरी
परिषद की बैठक के दूसरे दिन अध्यक्ष श्रीमहंत रवीन्द्र पुरी ने कहा कि भारत धर्म निरपेक्ष देश है, जहां संविधान सर्वोपरि है. संविधान ने समस्त नागरिकों को बराबर अधिकार दिया है. इसके बावजूद जाति-धर्म के नाम पर विशेष वर्ग के लोगों को अतिरिक्त सुविधा दी जा रही है.
ऐसे में देशभर में समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए. अखाड़ों के संत प्रवचन, वैचारिक गोष्ठी, संवाद के जरिए माहौल बनाएंगे. उन्होंने लव जिहाद व हिंदुओं के मतांतरण को गंभीर समस्या बताते हुए सख्त कानून बनाने की मांग की.
उन्होंने कहा कि शाही स्नान व पेशवाई की जगह नए नाम पर महाकुंभ से पहले निर्णय ले लिया जाएगा. फिर उसे जहां-जहां कुंभ लगता है, उन प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को भेजा जाएगा, जिससे वह उसके अनुरूप उचित कदम उठाएं.
यह प्रस्ताव भी पारित हुए
- मंदिरों का सरकारी अधिग्रहण होने से उनकी परंपरा नष्ट हो रही है. मंदिर का पैसा मदरसा व चर्चों के विस्तार को भेजा जा रहा है. ऐसे में सरकार मंदिरों से अपना हस्तक्षेप खत्म करे.
- केंद्र सरकार से मांग किया कि गाय को राष्ट्र माता घोषित करके उनके संरक्षण और संवर्धन को ठोस कदम उठाए.
- महाकुंभ क्षेत्र के पास के मोहल्लों में मांस-मदिरा की दुकानों को बंद कराने की मांग की.
- अखाड़ों को कुंभ 2019 में दिए गए अनुदान को बढ़ाकर दोगुना किए जाने की मांग.
- गंगा की अविरलता और निर्मलता का प्रस्ताव पास हुआ.
- गंगा व यमुना पर बन रहे स्नान घाटों का नामकरण 13 अखाड़ों के इष्टदेव व देवताओं के नाम पर किए जाने की मांग की, ताकि श्रद्धालुओं में अखाड़ों की पहचान बनी रहे.
इन विकल्पों पर हुआ मंथन
शाही स्नान : राजसी स्नान, अमृत स्नान, वैभव स्नान, देव स्नान, देवर्षि स्नान
पेशवाई : छावनी प्रवेश, संत प्रवेश, देवर्षि प्रवेश, देव प्रवेश, आराध्य पालकी प्रवेश
अखाड़ों की विशेष संस्कृति व परंपरा
कुंभ व महाकुंभ का वैभव अखाड़े होते हैं. 13 अखाड़ों की विशेष संस्कृति व परंपरा है. जिस शहर में कुंभ मेला लगता है, उसके क्षेत्र में अखाड़े ध्वज-पताका, बैंडबाजा के साथ आराध्य की पालकी लेकर प्रवेश करते हैं. इसे पेशवाई कहते हैं. वहीं, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या व वसंत पंचमी के स्नान पर अखाड़े स्नान करते हैं, जिसे शाही स्नान कहा जाता है. इसमें अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, नागा संन्यासी सहित समस्त संत स्नान करते हैं.
उर्दू शब्द है शाही
रवींद्र पुरी ने बताया कि शाही एक उर्दू शब्द है. शाही और राजसी में कोई अंतर नहीं है. बस राजसी शब्द ‘देव वाणी’ संस्कृत का शब्द है. यह समृद्ध सनातनी परंपराओं का प्रतीक है. रवींद्र पुरी ने कहा कि शाही शब्द गुलामी का प्रतीक है और इसे मुगलों ने गढ़ा था. इस नाम को बदलने का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे.
