रीवा जिले अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के प्रशासन का गैर-जिम्मेदाराना रवैया सामने आया है, जिससे सैकड़ों छात्रों के रिजल्ट रोक लिए गए हैं. छात्रों का रिजल्ट महीनों से अटका, जिम्मेदारों ने किया बड़ा ‘खेल’
Source : DB News Update
By- DBnewsupdate | Edited by – Supriya
MP News Rewa : रीवा जिले अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के प्रशासन का गैर-जिम्मेदाराना रवैया सामने आया है, जिससे सैकड़ों छात्रों के रिजल्ट रोक लिए गए हैं. ऐसे में तमाम छात्रों के बीच खासा नाराज़गी देखने को मिल रही है.
इसी कड़ी में रीवा, सतना, सीधी, शहडोल और अन्य जिलों के सैकड़ों छात्र इस समस्या को लेकर विश्वविद्यालय पहुंचे हैं. जिसके बाद रजिस्ट्रार सुरेंद्र सिंह ने आश्वासन दिया है कि 10 तारीख के पहले सभी छात्रों की मार्कशीट उनके कॉलेज तक पहुंच जाएगी और किसी भी छात्र का भविष्य खराब नहीं होगा. हालांकि, छात्रों का कहना है कि ऐसे आश्वासन उन्हें कई बार मिले हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ.
छात्रों ने कुलपति का किया घेराव
आज अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले रीवा, सतना, सीधी, शहडोल और मैहर के छात्रों ने कुलपति का घेराव किया और अपनी शिकायतें पेश कीं. छात्रों का कहना है कि परीक्षा देने के बाद भी उन्हें मार्कशीट नहीं मिल पा रही है, जिससे वे अगली कक्षा के परीक्षा फार्म नहीं भर पा रहे हैं. यह समस्या केवल रीवा तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य जिलों के कॉलेजों के भी यही हालात है. सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने प्रशासनिक भवन का घेराव किया और कुलपति को रोककर शिकायतों का पुलिंदा सौंपा.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कही ये बात
भारी संख्या में छात्रों की शिकायतों पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीरता दिखाई और तत्काल एक कमेटी बनाई गई. रजिस्ट्रार सुरेंद्र सिंह ने कहा कि 10 तारीख के पहले सभी बच्चों का रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा और मार्कशीट उनके कॉलेज पहुंच जाएगी.
शहडोल और मैहर के छात्रों की परेशानी
कुलपति का घेराव करने वाले विद्यार्थियों में ज्यादातर छात्र-छात्राएं रीवा, सतना, मैहर शासकीय कॉलेज, और शहडोल के इंदिरा गांधी गृह विज्ञान कॉलेज के थे. इन छात्रों ने बताया कि रीवा आने में हर बार 500 से 1000 रुपये तक खर्च हो रहे हैं और उनकी सुनवाई नहीं हो रही है
छात्रों ने विरोध के बाद बताई समस्या
इसी कड़ी में NDTV की टीम ने विश्वविद्यालय पहुंचे छात्रों से बात की और ज्यादातर छात्रों की समस्या मार्क शीट नहीं मिलना बताया गया. उन्होंने बताया कि वे परीक्षा में शामिल हुए, ऑनलाइन रिजल्ट भी शो कर रहा है जिसमें वे पास हैं, लेकिन विश्वविद्यालय से अब तक मार्क शीट जारी नहीं की गई है. इसके अलावा, परीक्षा फार्म भरने में भी उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
कई बार सौंपा जा चुका है ज्ञापन
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APSU), रीवा में परीक्षा परिणामों में देरी और मूल्यांकन में विसंगतियों को लेकर छात्र लगातार परेशान हैं. हाल ही में, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने परीक्षा परिणामों में हो रही अत्यधिक देरी और अन्य शैक्षणिक समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया था और कुलगुरु को 16 सूत्रीय ज्ञापन भी सौंपा था.
परीक्षा परिणाम को लेकर ऐसे किए गए थे दावे
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का 2025 का परिणाम ऑनलाइन जारी करने के दावे किए थे. जिससे विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. बीए, बीएससी, बीकॉम ऑनर्स, एमए, एमएससी, एमकॉम, बीबीए, एमसीए और एमबीए जैसे स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की विभिन्न सेमेस्टर परीक्षाओं के परिणाम उम्मीदवार विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन देखने के दावे किए थे.
परिणाम का पीडीएफ देखने की ऐसी थी व्यवस्था
चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट- apsurewa.ac.in पर जाएं.
चरण 2: ‘स्टूडेंट ज़ोन’ चुनें और ‘यूटीडी रिजल्ट्स’ पर क्लिक करें.
चरण 3: प्रोग्राम का चयन करें और अपने कोर्स पर क्लिक करें.
चरण 4: नामांकन संख्या दर्ज करें, सेमेस्टर चुनें, कैप्चा दर्ज करें और ‘परिणाम देखें’ पर क्लिक करें.
चरण 5: परिणाम स्क्रीन पर दिखाई देगा.
चरण 6: परिणामों की जांच करें और भविष्य के संदर्भ के लिए पीडीएफ डाउनलोड करें.
रिजल्ट न दिखने पर क्या करें?
विश्वविद्यालय समय-समय पर ATKT और प्राइवेट छात्रों के लिए संशोधित समय सारणी और रिजल्ट नोटिफिकेशन जारी कर रहा है, APSU All Notifications पेज पर अपने कोर्स का लेटेस्ट अपडेट देखें.
यदि रिजल्ट आ गया है लेकिन आप अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, तो मुख्य परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं.
यदि पोर्टल पर ‘Result Withheld’ या ‘Not Found’ आ रहा है, तो अपने कॉलेज प्रशासन या विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examination – COE) विभाग से सीधे संपर्क करना सबसे सही विकल्प होगा.
