सूर्य का गोचर जब रोहिणी नक्षत्र में होता है तब 9 दिनों के नौतपा की शुरुआत होती है. इस दौरान प्रचंड गर्मी पड़ती है. मौसम विभाग के अनुसार भी इस साल रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ सकती है.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Nautapa : विज्ञान के साथ ही शास्त्रों में भी नौतपा के बारे में बताया गया है. अप्रैल महीने से ही कई राज्यों में गर्मी का आभास होने लगा है. मई-जून में तो सूर्य देवता कहर बरपाने वाले हैं. वहीं इस बीच नौतपा या नवतपा भी शुरू हो जाएगा, जब नौ दिनों तक ऐसी भीषण गर्मी पड़ेगी कि लोगों को न दिन में चैन मिलेगा और न रात में आराम. क्योंकि नौतपा के 9 दिनों में गर्मी अपने उच्च स्तर पर होती है और तापमान (tempreture) सामान्य से कई गुणा ऊपर होता है.
क्या होता है नौतपा?
गीष्मकाल (Summer) के दौरान 9 दिन ऐसे होते हैं जब सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम हो जाती है और इस कारण लोगों को सूर्य का ताप अधिक महसूस होने लगता है. इसे ही नौतपा कहा जाता है. यानि नौतपा के 9 दिन तेज गर्मी और सूर्य के तेज से लोग तपने लगते हैं.
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा बताते हैं कि, सूर्य जब कृत्तिका नक्षत्र से निकलकर चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा की शुरुआत होती है. इस नक्षत्र में सूर्य के गोचर करते ही चंद्रमा की शीतलता कम हो जाती है और सूर्य पृथ्वी के करीब आ जाता है, जिस कारण भीषण गर्मी पड़ने लगती है. इसे ही नौतपा यानि हीटवेव (Heat Wave) कहा जाता है.
नौतपा कब शुरू होगा?
इस साल नौतपा की शुरुआत 25 मई से हो रही है और 3 जून तक रहेगा. बता दें कि सूर्य 25 मई को सुबह 03 बजकर 27 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे 8 जून 2025 तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र में चले जाएंगे. सूर्य 15 दिनों के लिए रोहिणी नक्षत्र में रहते हैं, जिसके शुरुआती 9 दिनों को नौतपा कहा जाता है. हालांकि दूसरी ओर यह भी माना जाता है कि, नौतपा के 9 दिन अगर तपते हैं तो यह अच्छी बारिश का संकेत भी होता है.
नौतपा का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
जब सूर्य देव कृतिका नक्षत्र से निकलकर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो शुरुआती 9 दिनों तक उनका प्रभाव बेहद आक्रामक और प्रचंड होता है. रोहिणी को चंद्रमा का नक्षत्र को शीतलता का प्रतीक माना गया है, जिसे सूर्य अपने प्रभाव में लेकर पूरी तरह तपा देता है. ऐसी पारंपरिक मान्यता है कि नौतपा के इन 9 दिनों में जितनी अधिक तपिश और गर्मी होगी, उस साल मानसून उतना ही अच्छा और संतुलित रहेगा. “जेठ तपे तो सावन बरसे” जैसी पुरानी कहावतें इसी अनुभव पर आधारित हैं. वहीं यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बात करें तो मई के अंत और जून की शुरुआत में पृथ्वी अपने अक्ष पर झुके होने के कारण सूर्य उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के बेहद करीब होता है. इस स्थिति में सूर्य की किरणें भारतीय उपमहाद्वीप पर लगभग 90 डिग्री के कोण पर (सीधी) पड़ती हैं. इस अवधि में दिन लंबे और रातें छोटी होती हैं. दिनभर जमीन अत्यधिक गर्मी सोखती है और आसमान साफ होने के कारण तापमान 45°C से 48°C या उससे भी ऊपर चला जाता है. राजस्थान और पाकिस्तान के रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली शुष्क पश्चिमी हवाएं (लू) इस तपिश को और बढ़ा देती हैं.
नौतपा में करें ये काम
- नौतपा में सूर्य देव की उपासना करे.
- हल्का भोजन करें और अधिक पानी पीएं.
- नौतपा में मांसाहार, अधिक तला भुना और बैंगन का सेवन न करें.
- दही, शीतल जल, भोजन आदि का दान नौतपा में करना चाहिए.
नौतपा पर खानपान में रखें सावधानी
गर्मियों में आने वाले फलों में पानी की मात्रा काफी होती है, इसलिए इनका सेवन जरूर करें. तरबूज, खरबूज, खीरा आदि को नियमित रूप से खाने से शरीर में पानी के साथ खनिज-लवणों की भी पूर्ति होती है. इन दिनों सामान्य खाना जैसे दाल, चावल, सब्जी, रोटी आदि खाना ठीक रहता है. तीखी गर्मी में भूख से थोड़ा कम खाना चाहिए. इससे आपका हाजमा भी ठीक रहेगा और फुर्ती भी बनी रहेगी. इसके साथ तली हुई चीजों को ज्यादा न खाएं, यह आपका हाजमा बिगाड़ सकते हैं. गर्मी के मौसम में तली और मसालेदार चीजें खाने की इच्छा ज्यादा होती है.लेकिन इस मौसम में इन चीजों से बचा जाना ही बेहतर होता है.
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